Monday, November 17, 2025

आपको क्या करना अच्छा लगता है?

 आज सबेरे याद करने को कोशिश की कि बचपन में मैं क्या करना चाहता था। मुझे अचानक कुछ याद नहीं आया। यह एक आदमी और ख़ास आदमी होने का अंतर है। ख़ास आदमी को यह सुविधा होती है कि वह माइक के सामने खड़े होकर कुछ भी कह दे -‘ मैं यह बनना चाहता था। यह करना चाहता था।’ लोग माने भले न लेकिन ताली तो बजा ही देते हैं।

अपने माननीय का ‘बनना चाहता था’ इतना वायरल हो गया है कि लोग उनके दौरे की जगह के हिसाब से अनुमान लगा लेते हैं कि वो क्या बनना चाहते थे।
हमको याद नहीं कि मैं बचपन में क्या बनना चाहता था। पता ही नहीं था कि ‘ बनना चाहना’ भी कुछ होता है। इस लिहाज़ से देखा जाये तो मैं बचपन से ‘ कुछ नहीं’ बनना चाहता था। संयोग कि मैं उसने ‘ काम भर का’ सफल भी रहा। ‘ कुछ नहीं’ ही बना।
करना चाहने वाली लिस्ट में भी ‘ कुछ नहीं’ ही दर्ज है। लेकिन पढ़ना , खेलना और दोस्तों ( सहेलियाँ थीं नहीं ) के साथ बात करना अच्छा लगता था। पढ़ने में स्कूल की किताबों के अलावा कहानी, उपन्यास, कॉमिक्स वगैरह पढ़ने का चस्का था।
खेलना तो अब छूट गया लेकिन पढ़ने और बतियाने का शौक बना हुआ है। अब घूमना भी जुड़ गया है। पढ़ने में मैं कम से कम सारे क्लासिक्स पढ़ना चाहता हूँ। घूमने में दुनिया घूमने का मन है।
आपको क्या करना अच्छा लगता है?
https://www.facebook.com/share/p/19qFn3jVvu/

No comments:

Post a Comment