Monday, November 24, 2025

आर्यन टी स्टॉल


 

कल आर्यन टी स्टॉल दिखा। जलवायु विहार के सामने। लेकिन चाय का कोई इंतजाम नहीं दिखा वहां। काउंटर पर अंडे ही अंडे रखे थे। हमने चाय वाले से पूछा तो उसने बताया चाय का काम चला नहीं तो अंडे बेचने लगे। आर्यन बेटे का नाम है। अब आम आदमी अपने बेटे को मंत्री तो नहीं सकता, दुकान का नाम ही सही।

आर्यन टी स्टॉल चाय बेचने के लिए खुली थी। चाय नहीं बिकी तो अंडा बेचने लगे। पेट के लिए बिकना जरूरी है। यह दुनिया का चलन है। विकास का नाम लेकर आए लोग विभाजन के सामान बेचने लगे। चल रही है दुकान धड़ल्ले से।
चाय की दुकान एक गुमटी में है। सरकारी लिहाज से अवैध ही है। कभी किसी ने शिकायत की तो उजड़ जायेगी। अपने यहाँ बड़ी तादाद ऐसी ही दुकानों की हैं। चल रहीं हैं बिना किसी परमिशन के। दुकानें क्या, बड़ी-बड़ी संस्थाएं बिना परमिशन /रजिस्ट्रेशन के चल रही हैं। संस्कृति के नाम पर खुली दुकाने राजनीति के मुख्यालय बने हुए हैं। नाम कुछ और काम कुछ और।
दुनिया इसी तरह चल रही है। सेवा के नाम पर सत्ता पर काबिज लोग गुंडागिरी कर रहे हैं। दुनिया के सबसे समर्थ देशों के राज्याध्यक्ष दूसरे देशों से गुंडों की फिरौती की तरह पैसे माँग रहे हैं। ऐसा वे अपने देश को महान बनाने के नाम पर कर रहे हैं। महानता का रास्ता चिरकुटई की गलियों से होकर गुजर रहा है।
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