नेता लोग चर्चा में बने रहने के लिए अक्सर ऊल जलूल बयान देते हैं। उसी तर्ज पर दुकान वाले ध्यान खैंचू नाम रखते हैं। आज लखनऊ, आशियाना में आमने-सामने दो दुकानें दिखीं। एक का नाम BHUKKAD डोसा दूसरे का नाम स्वामी डोसा। दोनों ही दुकानें बंद थीं इसलिए उनके नाम के मतलब पूछ नहीं पाये।
अंदाज़ लगा सकते हैं कि BHUKKAD डोसा भूखे लोगों की शरण स्थली होगी। भूखे लोगों की भूख का इलाज होता होगा। लेकिन इलाज मुफ्त नहीं होगा। फीस पड़ेगी। आजकल मुफ्त कुछ भी नहीं मिलता है। Nothing is free in this world .
स्वामी डोसा से हमको भाजपा के बुजुर्ग नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी जी की याद आई। स्वामी जी सनसनीखेज बयान देते रहते हैं। आजकल सरकार विरोधी बयान ज़्यादा देते हैं। हाल ही में उन्होंने एक बयान दिया जिसके अनुसार RSS वाले अमेरिका की तर्ज पर प्रधानमंत्री के अधिकतम दो कार्यकाल के हिमायती थे। लेकिन सत्ता में आते ही वे अपनी बात से पलट गए। शायद यह नीतीश कुमार जी की संगत का असर हो। वैसे RSS महान संगठन है। RSS के लोग समय के अनुसार अपने स्टैंड और बयान बदलते रहते हैं। तथ्यों की मनमानी व्याख्या करते रहते हैं। चंद्रमा की कलाओं की तरह अपने बयान बदलते रहते हैं।
भाजपा के लोग दिल्ली के प्रदूषण पर बवाल करते थे। सरकार को कोसते थे। अब जब सरकार में आए तो एक बयान आया किसी वैज्ञानिक का कि दिल्ली की भौगोलिक स्थति ही ऐसी है कि प्रदूषण देर तक बना रहना अपरिहार्य है। कितना प्यारा तर्क है। बहानेबाजी अपने देश के लोगों का नैसर्गिक गुण है।
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