Wednesday, April 17, 2013

हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो?

http://web.archive.org/web/20140403093603/http://hindini.com/fursatiya/archives/4181

हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो?

पी.एम.ऐसा चाहिये, जिससे सब कुछ सध जाये,
काम बने सब देश के, औ विदेश भी निभि जाये। होय कड़क डायमंड सा, जिससे सब कुछ कटि जाये,
अस झुके कभी मौका पड़े, मक्खन भी लजि जाये।
बुद्धिमान हो बहुत वो, जिससे सब दु्निया थर्राय,
कबहूं जब मौका पड़े, फ़ुल बौढ़मचंद बनि जाये।
होय गरीबों का रहनुमा, उनकी गरीबी देय भगाय,
सब अमीर उसकी सुने,उनकी सब बिगड़ी देय बनाय।
-कट्टा कानपुरी
मीडिया की माने तो आज देश की सबसे बड़ी समस्या अगले प्रधानमंत्री का चुनाव है। जैसे अगला प्रधानमंत्री तय होते ही सब बवाल कट जायेंगे। मीडिया रोज माइक लिये अगला प्रधानमंत्री खोजता रहता है।
जैसे लोग कपड़े की दुकान में जाते हैं। कोई कपड़ा देखते हैं। सीने से लगाकर साथ वाले से पूछते हैं- ये कैसा लगा रहा है। साथ वाला सर हिलाता है-ऊंहुन! जा नहीं रहा है। जा नही रहा मतलब जम नहीं रहा। उसको धर के अगला देखते हैं। वो और नहीं जाता। किसी का रंग पसंद आता है तो फ़िटिंग गड़बड़। फ़िटिंग ठीक तो रंग चुभता है आंखों। दुकान-दुकान घूमता है आदमी लेकिन एक जोड़ी कपड़ा नहीं पसन्द आता। वैसे ही मीडिया रोज एक नया प्रधानमंत्री ट्राई करता है, उतार के धर देता है। कोई पसंद नहीं आता।
मीडिया प्रधानमंत्री की खोज में उसी तरह हलकान है जैसे जवान लड़की का बाप उसके लिये वर की चिंता में घुला जाता है। जहां कहीं कोई जवान लड़का दिखता है, उसकी कुंडली मांग लेता है। मीडिया को भी किसी के साथ पचीस-पचास सांसद दिख जाते हैं वह उसको प्रधानमंत्री टेस्टिंग मशीन में चढा देता है- ये वाला प्रधानमंत्री कैसा रहेगा।
मीडिया लोगों से राय भी लेता रहता है। आपको कैसा पीएम चाहिये। ईमानदार पार्टी वाले कहते हैं उनका प्रधानमंत्री सब बेईमानों को जेल भेज देगा। शायद वो बेईमानी का कोई डोप टेस्ट कराये। जिससे उसके प्रधानमंत्री बनते ही ईमानदारी का टेस्ट पाजिटिव/निगेटिव आ जाये। फ़िर तो उसको प्रधानमंत्री बनते ही जेले बड़ी करवाने का काम करना होगा।
भ्रष्टाचार जड़ से उखाड़ फ़ेंकने वाला प्रधानमंत्री किसान टाइप का होगा। दिन भर लिये खुरपी भ्रष्टाचार की गाजर घास उखाड़ता रहेगा।
देश के स्वाभिमान की रक्षा करने वाला प्रधानमंत्री वीर रस का कवि टाइप होगा। ऐसी कड़क आवाज में धमकी देगा पाकिस्तान/बांग्लादेश को कि वे दहल जायेंगे। लेकिन चूंकि अमेरिका और चीन के लोग भारतीय भाषायें जानते नहीं सो उनको जब उसके भाषण का अनुवाद बताया जायेगा तो लगेगा कि देश का प्रधानमंत्री कित्ता विनम्र, मुलायम, समझदार और सहिष्णु है।
गरीबों का रहनुमा हो वह। उसकी आवाज में गरीबों के लिये खूब सारा दर्द होना चाहिये। उसको देखते ही गरीबों को लगे कि अब हमारी गरीबी के दिन गये।
अमीरों के हित की रक्षा वो ऐसे करे जैसे अमेरिका इजरायल की चिन्ता करता है।
जातिवाद विरोधी इत्ता विरोधी हो कि पूछने पर अपनी ही जाति भूल जाये। देशसेवा का व्रत लेते ही मैं अपनी जाति भूल गया। लेकिन मौका पढ़ने पर दुनिया भर के लोगों के कुल/गोत्र/बिस्वा की कुंडली गिना दे।
इतना काबिल हो प्रधानमंत्री कि मंहगाई को माउस से नियंत्रित कर सके। जहां मंहगाई उचके उसको माउस से घसीटकर एक जगह फ़्रीज कर दे डांटते हुये -चुपचाप यहीं बैठी रहो। खबरदार जो जरा सा भी हिली। हिली तो पिट्टी कर देंगे।
रोजगार तो ऐसे पैदा करे जैसे स्टेज पर जादूगर जब मन आता है घड़े से पानी निकालकर धर देता है। जहां लोग रोजगार मांगे वह उछाल के थमा दे जैसे बाबा लोग अपने भक्तों के बीच माला से फ़ूल/प्रसाद उछालते हैं, मुस्कराते हैं। लोग एक रोजगार मांगे वो दस थमा दे। लेव कित्ते चाहिये रोजगार।
देश में ऐसी अमन फ़ैला दे कि एकदम सन्नाटा सा पसर जाये हर तरफ़। अपराधियों को सजा देने का ऐसा जुगाड़ करे कि लगे सजा का एटीएम लगा दिया है। इधर अपराध हुआ उधर सजा निकल के आ गयी। तेज/त्वरित, सस्ता टिकाऊ न्याय।
मीडिया की प्रधानमंत्री की चिता और बेकली देखकर लगता है देश का अगला प्रधानमंत्री तय होते ही सब समस्यायें दुम दबाकर भाग लेंगी।
मीडिया की सरगर्मी देखकर देश की समस्याओं की जान सूख रही है। उनको डर है कि जहां अगला प्रधानमंत्री तय हुआ उनके दिन पूरे हुये।
देश के लोग भी सोच रहे हैं बस कुछ दिन और कामधाम कर लें। जहां अगला प्रधानमंत्री चुना गया बस फ़िर तो आराम-ही-आराम होगा। जो करना होगा अगला प्रधानमंत्री करेगा।
इसके पहले कि मीडिया अगले प्रधानमंत्री का स्पेशीफ़िकेशन फ़ाइनल करे। आप भी अपनी पसंद बता दीजिये कि आपको अगला प्रधानमंत्री कैसा चाहिये?
जरा गंभीरता से बताइयेगा। ये न कहने लगियेगा-
हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो,
रामभरोसे जैसा हो।
वर्मा मीडिया शाम तक पचीस ठो रामभरोसे पकड़ लायेगा और प्राइमटाइम बहस में उनसे पूछने लगेगा- प्रधानमंत्री बनने के बाद आप देश कैसे चलायेंगे? किस दिशा में ले जायेंगे?

18 responses to “हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो?”

  1. Neeraj Diwan
    कहीं ऐसा ना हो कि सारी समस्याएँ हड़ताल ही कर दें.. चैनलवाले भूखे ही मर जाएंगे.. वही क्यूं.. फिर तो कइयों के लाले पड़ जाएंगे। वैसे फुरसतिया के अनुसार मिस समस्या मारे चिंता के जीरो साइज़ हो रही है। मिस समस्या का मुंह फुला देखकर मेरे चेहरे पर लालिमा छा गई है। सोचता हूं इसका दिल जीत लूं तो पत्रकारिता के धर्म का निर्वहन कर ही लूं।
    पीएम कैसा हो.. अपन दो लाइनें ठेल रहे हैं.. जोड़ लें..
    दिल खुलै पहीने टोपियन सबकी..टैम पड़े सभैय टोपा पहिनाय ।
    खुद पीएम भूखा ना रहैय.. पार्टीजन भी मौज उड़ाय ।।
    Neeraj Diwan की हालिया प्रविष्टी..गड्डी जांदी ए छलांगा मार दी
  2. प्रवीण पाण्डेय
    किसी संत को एक पुस्तक लिखनी पड़ेगी, पीएम संदर्भ। उसमें सारी योग्यतायें और अयोग्यताओं का क्रमवार लेखाजोखा होगा। बचपन से पढ़नी पड़ेगी ताकि बड़े होने के पहले कोई टोपी-टीका जैसी गलती न हो जाये।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..एक दुपहरी
  3. Yashwant Mathur
    हमारा प्रधान मंत्री कट्टा कानपुरी जैसा होना चाहिए।
    सादर
    Yashwant Mathur की हालिया प्रविष्टी..न यह गजल है न कविता है
  4. Yashwant Mathur
    आपने लिखा….हमने पढ़ा
    और भी पढ़ें
    इसलिए कल 18/04/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    धन्यवाद!
    Yashwant Mathur की हालिया प्रविष्टी..न यह गजल है न कविता है
  5. arvind mishra
    इन दिनों चिंतन उचाई के स्तर पर है :-)
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..नवरात्र की शुभ बेला और शक्ति पीठों का सांस्कृतिक पर्यटन (सोनभद्र एक पुनरान्वेषण-६)
  6. shikha varshney
    एक लिस्ट ब्लॉग जगत से भी जानी चाहिए :):).
  7. Anonymous
    सन्ता : क्या अब लगता है कि इस देश के दिन बहुरने वाले हैं?
    बन्ता : और नहीं तो क्या? इतना राप्चिक पी.एम. मिलेगा तो दिन बहुरेंगे ही। फुरसत में स्पेसिफ़िकेशन फाइनल किया गया है।
  8. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    सन्ता : क्या अब लगता है कि इस देश के दिन बहुरने वाले हैं?
    बन्ता : और नहीं तो क्या? इतना राप्चिक पी.एम. मिलेगा तो दिन बहुरेंगे ही। फुरसत में स्पेसिफ़िकेशन फाइनल किया गया है।
  9. PN Subramanian
    बस लल्लू ना हो.
    PN Subramanian की हालिया प्रविष्टी..गढ़ कुंडार
  10. Yashoda agrawal
    सब हैं लायक
    किसी को भी
    दो बना पी.एम
    पर…
    सच तो ये है
    पद पाते ही
    बन जाते हैं
    नालायक…..
    सादर
  11. Yashoda agrawal
    सब हैं लायक
    किसी को भी
    दो बना पी.एम
    पर…
    सच तो ये है
    पद पाते ही
    बन जाते हैं
    नालायक…..
    सादर
    Yashoda agrawal की हालिया प्रविष्टी..इंसानियत चाहे हर इंसान………………………….मंजूषा हांडा
  12. Anonymous
    जो भी पत्ता फेंको वही बादशाह वाला निकल जाता है ……
  13. shefali
    जो भी पत्ता फेंको वही बादशाह वाला निकल जाता है ……
  14. Rekha Srivastava
    प्रधान मंत्री का चुनाव हम ब्लॉग पर ही क्यों न कर लें? अपने को गुण बखान किये हैं न खोजने पर सब मिल जायेंगे. राजनीती में तो बड़ी राजनीती है – यहाँ पर सब साफ सुथरा है और देश के हित में भी रहेगा.
    Rekha Srivastava की हालिया प्रविष्टी..हौसले को सलाम ! (12)
  15. समीर लाल
    मैं खुद से तो कैसे खुद को प्रपोज करुँ…
  16. soniya srivastava
    aisa PM to computer engineer ko design karna padega. Saare specifications daal k Robot bana de. Aapke guidance mei jyada achha banega. Kyu na IIT Kanpur se design karaya jaaye? Sasta aur tikau padega aur sarkari alag?
  17. Rashmi Swaroop
    एक में तो ये सबकुछ होने से रहा… इत्ते सारे पी. एम…. एक कुर्सी पर कैसे बैठेंगे एक साथ? :P
    जब सब समस्याएं दूर हो जाएँगी तो फिर इन प्रधानमन्त्री’ज़ को कुर्सी से रिमूव करना ही कहीं एक समस्या ना बन जाए…!
    Rashmi Swaroop की हालिया प्रविष्टी..अपना गाँव… पार्ट 2
  18. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो? [...]

Tuesday, April 09, 2013

देवलोक में चीनी चर्चा

http://web.archive.org/web/20140420081759/http://hindini.com/fursatiya/archives/4157

देवलोक में चीनी चर्चा

पिछ्ले दिनों खबर आयी कि सरकार ने चीनी भी अपने नियंत्रण से बाहर कर दी। अब चीनी के दाम बाजार तय करेगा। यह खबर जैसे ही देवलोक में पहुंची वहां हाहाकार मच गया। सारे देवता परेशान हो गये कि इससे उनके प्रसाद पर सीधी चोट पहुंचेगी। तमाम युवा देवता अपनी-अपनी आरती पुस्तिका, जिनमें उन पर लड्डू चढ़ने का जिक्र है, लहराते हुये देवचौपाल पर जमा हो गये। कुछ देवताओं ने साधु-साधु कहकर इसकी भर्त्सना की (देवता लोग गुस्से में भी साधु-साधु ही कहते हैं)। वे गुस्साये हुये थे। बौखलाये हुये थे। कुछ देवता तो बमक भी रहे थे। देवता लोग इतने आवेश में थे कि उनकी बातें साफ़ सुनाई नहीं दे रहीं थी। किसी लोकतांत्रिक देश के सदन सरीखा हो गया मामला। कुछ देवताओं के बयान आप भी सुन लीजिये:
  1. -यह घोर पातक है देव। जो देश हमारे भरोसे(भगवान भरोसे) चल रहा है वहीं पर हमारे प्रसाद पर कटौती की साजिश। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
  2. - हम देवता हैं, देवता। कोई आम जनता नहीं। इस पाप का दंड देंगे-भरपूर देंगे।
  3. -खोये की जगह आलू, शकरकंद हम बर्दास्त करते रहे लेकिन अब चीनी के भी लाले पड़ जायेंगे ऐसा कभी स्वप्न में भी नहीं सोच सकते हम तो। घोर कलयुग। अनर्थ।
  4. -देव अब आप फ़ौरन नया अवतार लेकर जायें पृथ्वी लोक पर और फ़ौरन उन पातकियों का संहार करें जिन्होंने यह पाप किया है। अब और विलम्ब सहन नहीं होता।
  5. -हमको वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति वाले कानून का सहारा लेकर उन लोगों की गन्ने से पिटाई करनी चाहिये जिनके उकसावे पर सरकार ने चीनी को अपने नियंत्रण से बाहर करने का निर्णय लिया। कुछ क्षण के लिये हमें अहिंसा की बात विस्मृत कर देनी चाहिये।।
पापियों की निन्दा करके जब देवगण थक गये तो वे सोचने लगे कि अब क्या किया जाये? अब चूंकि देवताओं को सोचने की आदत तो होती नहीं तो उनको समझ में ही नहीं आया कि किया क्या जाये? वे परेशान हो गये। फ़िर भी कुछ सोच नहीं पाये। उनकी स्थिति और सोचनीय हो गयी। डबल समस्या कि उनके ऊपर आफ़त आयी है और वे कुछ नहीं सोच पा रहे।
इस पर एक बुजुर्ग देवता ने समझाया कि वत्स देवगण अव्वल तो कुछ करते नहीं। करते भी हैं तो कभी कोई काम सोच-विचार कर नहीं करते। अगर कुछ करना ही होता, वह भी सोच-विचार कर ही, तो जुगाड़ लगाकर देवलोक क्यों आते? देवलोक में सोच-विचार का रिवाज नहीं रहा कभी। हर काम बिना सोचे-विचारे करते हैं देवगण। बिना विचारे वरदान देना, बिना बिचार दंड देना। बिना बिचारे कुछ भी करते रहने का यह विशेषाधिकार ही तो देवगणों को देवता बनाता है। देवलोक में प्रवेश करते ही देवगणों को वे सब सुविधायें प्राप्त हो जाती हैं जो मृत्युलोक में मात्र वी.वी.आई.पी.ओं, मवालियों, माफ़ियाओं को हासिल होती हैं।
इसके बाद देवगणों ने बिना सोचे कुछ उपायों पर चर्चा और उनको खारिज भी करते गये। देखिये आप भी नमूना उपायों पर चर्चा करने का:

  1. उपाय:फ़ौरन किसी देवता को धरती पर भेजा जाना चाहिये जो वहां जाकर दुष्टों का संहार करे।
    खारिज तर्क: किस देवता की जान जोखिम में डाल दें? जब वहां आला पुलिस अधिकारी तक की जान की गारंटी नहीं तो भला एक देवता की कौन सुनेगा वहां। जिसको भेजेंगे उसको कोई महंत पकड़ के किसी मंदिर में कैद कर लेगा और छुड़वाने के लिये फ़िरौती अलग से मांगेगा।
  2. उपाय: वोट क्लब पर धरना दिया जाये! आमरण अनशन किया जाये!
    खारिज तर्क:धरनें में हमारे पीताम्बर और धवल वस्त्र सारे भीग जायेंगे। लाठीचार्च हो गया तो घुटने अलग फ़ूटेंगे। रोज-रोज प्रसाद खाते रहने के चलते अब भूखे रहने का आदत रही नहीं। अनशन हमसे न सपरेगा। अनशन ही करना होता तो देवता ही काहे बनते!
  3. उपाय: जिस सरकार ने यह चीनी सरकारी नियंत्रण से बाहर की है उसको गिरा दिया जाये।
    खारिज तर्क:उससे क्या होगा? कोई फ़ायदा नहीं। अगली सरकार की क्या गारंटी कि वह चीनी वापस ले आयेगी नियंत्रण। जब वे लोग तक सरकार पर भरोसा नहीं करते जिनके वोट से सरकार बनती है तो हमारा किसी सरकार पर भरोसा करना देवतापना ही होगा।
  4. उपाय: मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाया जाये।
    खारिज तर्क:उससे क्या होगा। उससे मुद्दा कश्मीर समस्या सा उलझ जायेगा
  5. उपाय: चीनी की खुद खेती जाये। भक्तगण अगर चीनी कम डालेंगे प्रसाद में तो बाकी की भरपाई खुद की चीनी से की जाये।
    खारिज तर्क:फ़िर तो हम देवता नहीं किसान बनकर रह जायेंगे। देवगणों के लियेकाम हराम है
इसी तरह देवचौपाल पर चीनी के नियंत्रण मुक्ति की समस्या से निपटने के उपाय उछलते रहे और उनको तर्कों से खारिज किया जाता रहा। जब कभी खारिज तर्क के प्रकट होने में देरी होती, देवगणों के हलक सूखने लगते।
इस बीच किसी ने सुझाया कि सरकार ने देवगणों की भलाई के लिये ही यह कदम उठाया है। देवगण बैठे-बैठ प्रसाद खाते रहते हैं, कुछ करते नहीं तो उनके डायबिटीज होने का खतरा रहता है। प्रसाद में चीनी कम होने से यह खतरा कम होगा।
किसी ने यह भी बताया कि भूलोक की परिस्थितियां दिन पर दिन जटिल होती जा रही हैं। देवताओं के बिना वहां के लोगों का कोई सहारा नहीं। इसलिये चीनी भले ही सरकारी नियंत्रण से निकलकर सोने के भाव बिकने लगे लेकिन देवताओं के प्रसाद में कोई कमी न आयेगी।
फ़िल्मी जानकारी रखने वाले एक देवता ने अमिताभ बच्चन जी की एक फ़िल्म ( चीनी कम जिसमें नायक उम्रदराज था और नायिका युवा ) का हवाला देते हुये राय जाहिर की- हो सकता है सरकार हमारी चीनी का कोटा कम करके हमारे लिये नयी अप्सराओं की व्यवस्था पर कुछ विचार कर रही हो।
अप्सराओं का जिक्र आते ही देवगणों के, चीनी के सरकारी नियंत्रण में से बाहर जाने की खबर से मुरझाये, तमतमाये, बौखलाये चेहरे खिल उठे। वे अप्सरा दर्शन के लिये व्याकुल हो उठे। देवदरबार जम गया। देवगण सुरापान करते अप्सराओं के नृत्य का आनंद उठाने लगे। सब कुछ फ़िर देवलोक सरीखा हो गया।
कुछ युवा देवता अप्सराओं के नृत्य से विरत और बोर होकर अपने आई पैड पर आई.पी.एल. क्रिकेट मैच का सीधा प्रसारण देखने के बहाने चौकों-छक्कों पर ठुमके लगाती चीयरबालाओं को निहारने में तल्लीन हो गये।
चीनी चर्चा देवलोक से उसी तरह गायब हो गयी जिस तरह कभी टीवी मीडिया पर भयंकर तरीके से छाया भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन तिरोहित हो चुका है।

13 responses to “देवलोक में चीनी चर्चा”

  1. देवांशु निगम
    हम को लगा देवता लोग कुछ चीन के बारे में बतिआ रहे है , यहाँ तो चीनी के बारे में बात हो गयी :) :)
    घर पर गन्ने की खेती होती है | सरकार समर्थन मूल्य में हर बार लफड़ा लोचा करती है | किसानों को काफी नुक्सान होता है | अभी अगर मार्किट तय करेगा मूल्य तब तो फिर मिल मालिकों और बिचौलियों की चांदी है !!!
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..बाइक की सवारी, गाँव घुम्मकड़ी और बाबा गुप्तिनाथ के दर्शन !!!
  2. दीपक बाबा
    एक अलग से ‘केंद्रीय चीनी मंत्रालय’ का गठन किया जाए… और फुर्सत के नामी फुरसतिये ही उसके आजीवन मंत्री बने रहेंगे..:)
    जो ब्लोग्गरजन मिठास भरी पोस्टें लिखते हैं, उन्हें इसी मंत्रालय से मानदेय के रूप में साल भर की चीनी का कोटा तय रहेगा.
  3. भारतीय नागरिक
    देवताओं को भी गद्दी चाहिये और नव-देवों को भी.
    भारतीय नागरिक की हालिया प्रविष्टी..दोष किसका.
  4. shikha varshney
    चीनी कम ..वाला ऑप्शन अच्छा है …बोले तो दिल के खुश रखने को देवो ये ख़याल अच्छा है :).
    1. sanjay jha
      (:(:(:
      प्रणाम.
  5. ajit gupta
    चीनी का अकाल भी पड़ जाए तो भी प्रसाद बनना बन्‍द नहीं हो सकता। बच्‍चे भूखे रहें लेकिन पण्डितजी तो अपने ठाकुर के लिए कोई न कोई जुगाड़ भिड़ा ही लेंगे।
    ajit gupta की हालिया प्रविष्टी..अब तो भईया बूढ़े हो गए, रंग नहीं बस गुलाल ही मल दो
  6. गौरव शर्मा
    ढेर दिन से एगो बात कहे के रहलीं, बाकि सोचत रहलीं के टटका पोस्ट पर कहीं. तोहार पोस्ट आये में थोड़ा टाइम लेला मगर भाई का ज़बरदस्त होला. हम त ई कहतनी के तोहार ब्लॉग इन्टरनेट पर बेस्ट हिंदी ब्लॉग ह!
    एही तरह लिखले रह!
  7. गौरव शर्मा
    औउर तोहार लेखनी में कबो-कबो श्रीलाल के छाया भी दिखाई पड़ जाला उनकर मौज लेवे के ढंग के नियर.
  8. प्रवीण पाण्डेय
    यह हमारी अब तक संयत मिठाई प्रेम पर सीधा प्रहार हो गया।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..गोवा, दक्षिण से
  9. arvind mishra
  10. Yashwant Mathur

    कल दिनांक 14/04/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    Yashwant Mathur की हालिया प्रविष्टी..बेटों की चाह में कहीं खो रही हैं बेटियाँ………
  11. Swapna Manjusha
    हमरा बड़का विरोध दर्ज किया जावे :)
    काहे से कि आप बहुते भारी बेइंसाफी कर रहे हैं ! आप बात-बात में देव लोक को काहे घसीट लाते हैं ? जब देखो देवलोक, देवलोक, आप तो सबसे पाहिले ई बताईये की ‘देविलोक’ भी कोई होता है की नहीं ?? सब देवी लोग कहाँ विराजती थीं? देवलोक संसद में भी एको गो देवी का सीट नहीं दिखा हमको, कम से कम 33% तो होना ही चाहिए, महिलाओं का प्रतिनिधित्व के साथ ऐसा बेइंसाफी, बाप रे ! हम तो सोचिये के दुबरा गए हैं । देवियों को अपना समस्या कहने का कोई अवसर नहीं मिला। आप ही बताईये मर्त्यलोक से चीनी का गायब होना , देवियों का भी पिरोब्लेन होगा न , उसका आप कौनो जीकर नहीं किये ?? देवियों को भी लड्डू, कलाकंद, पेंडा चढ़ता है की नहीं ? और फिर बाद में देव लोग तो मदिरा-उदीरा पी लिए अफसरा लोग का डांस देख लिए। और देवी लोगन का मनोरंजन का कोई उपाय है की नहीं, की ऊ लोग बस झाडू-बुहारू, बासन-बर्तन में ही जीवन बिता रही है सब ? ई इग्नोर्ड डिपार्टमेंट का भी कुछ खुलासा कीजिये, नहीं तो सब चीनी कम देवी बन के रह जायेंगी। बहुते चिंता में हैं हम :)
    Swapna Manjusha की हालिया प्रविष्टी..नारीवाद एक आन्दोलन …!
  12. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] देवलोक में चीनी चर्चा [...]

Tuesday, March 26, 2013

देवलोक में फ़ेसबुक

http://web.archive.org/web/20140404042305/http://hindini.com/fursatiya/archives/4127

देवलोक में फ़ेसबुक

इस बार संजय बेंगानी ने फ़िर हमसे होली के मौके पर लेख मांगा। हमने पुराने लेखों में से कोई देने की पेशकश की तो वे नाराज हो गये -बोले, क्या हमको किसी नेशनल डेली का संपादक समझ रखा है जो बासी माल अपने अखबार में छाप लेते हैं और उसको अपने फ़ेसबुक पर लगाकर आप मगन होते हो? हमें कोई नया लेख चाहिये। हमें अपनी होलीजीन में छापना है। उसके संपादक हम खुद हैं। इसलिये क्वालिटी लेख चाहिये- कूड़ा नहीं।
हमने सोचा कि जब कूड़ा नहीं चाहिये तो फ़िर हमसे क्यों मांग रहे हैं लेकिन फ़िर याद आया कि अभी संजय बेंगाणी संपादक के रोल में हैं। संपादक जो छापता है उसे उत्कृष्ट और बाकी को कूड़ा समझता है। पहले तो हमने सोचा कि मना कर दें कि भाई उत्कृष्ट लेखन अपन के बस की बात नहीं लेकिन फ़िर उनकी तमाम भावी प्रधानंमंत्रियों में से एक की नजदीकी का लिहाज करके रुक गये। फ़िर हमने कहा समय दो कुछ नया लिखने का तो उन्होंने कहा-ठीक है एकाध घंटे का टाइम दे देते हैं। उत्ती देर में टाइप करके भेजो। और टाइम देने से मना कर दिया।
अब संजय बेंगाणी खाली संपादक होते तो उनको मना किया जा सकता था लेकिन वे ब्लॉगिंग में चिरकुटों के अलम्बरदार भी हैं जिनका कि कहना है-फिकर नॉट, ब्लॉगिंग पर कब्जा रहेगा चिरकुटों का!
अब बताइये ऐसे को कैसे मना किया जाये सो उसके बाद मजबूरी में सब काम छोड़कर जो लिखा वह उन्होंने अपनी होलीजीन में छाप दिया। आज होलीजीन सब जगह अवतरित भी हो गयी। आप भी http://www.chhavi.in/holizine/ यहां जाकर पढिये चाहे आनलाइन चाहे डाउनलोड करके। हमारा जो लेख छापा संपादक साहब ने वह वहां जाकर पढिये क्योंकि वहां उन्होंने हमारी इस्मार्ट फ़ोटू भी लगायी है। अगर वहां जाने का मन न करे तो यहीं बांच लीजिये। शीर्षक है- देवलोक में फ़ेसबुक!

देवलोक में फ़ेसबुक

देवलोक में आजकल फ़ेसबुक की चर्चा है।
इस बार मृत्युलोक भ्रमण से लौटकर नारद जी देवलोक पहुंचे तो फ़ेसबुक की जानकारी दी। पुराने दोस्तों को खोजने में फ़ेसबुक की उपयोगिता। फ़टाफ़ट स्टेटस बनाने की क्षमता। फोटो, आवाज, वीडियो सटाने की उपयोगिता के बारे में प्रफ़ुल्लमन जानकारी दी तो सबसे साधु-साधु कहकर नारद जी की तारीफ़ की। नये देवताओं के मन फ़ेसबुक खाते बनाने के लिये मचल उठे। देवियां भी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल बनाने के लिये पोज देकर फोटो खिंचवाने लगीं। सबसे ज्यादा खुशी मेनका, रंभा, उर्वशी आदि अप्सराओं को हुई। वे सोचने लगी चिरयुवा देवताओं की सेवा और बुढऊ श्रृषियों की तपस्या भंग करने में सौंदर्य बरबाद हुआ अब तक। इस बहाने कम से कम नये प्रशंसक मिलेंगे। नये देवी/देवता सोचने लगे कि उनके भी फ़ालोवर बढ़ें तो शायद उनके नाम के भी मंदिर-संदिर बनें। पहचान के संकट से जूझते देवगण फ़ेसबुक खाते खुलने की कल्पना से किलकने लगे। देवियां और प्रमुदित हो गयीं।
देवलोक में फ़ेसबुक की सुविधा शुरु करने पर निर्णय लेने हेतु आम सभा बुलायी गयी। धरती की तरह ही वहां भी प्रमुख बड़े पदों पर बूढे देवताओं का ही कब्जा था। वे सब फ़ेसबुक के खिलाफ़ थे। उनको लग रहा था कि फ़ेसबुक खाता खुलते ही उनको सर्वसुलभ हो जाना पड़ेगा। कोई भी भक्त उनका मित्र बन जायेगा। कोई भी पोक करके चला जायेगा। अभी तो भक्तों को झांसा देकर बच जाते हैं उनकी पुकार उनतक पहुंची नहीं इसलिये उनका कल्याण नहीं हुआ लेकिन जब भक्त फ़ेसबुक पर उनके खाते में खुलेआम अपनी वेदना पोस्ट करेगा तो कैसे उसको नकारेंगे।
नये देवताओं का मानना था कि एकबार जब हम देवता बने हैं तो देवतागिरी भी फ़ुल ईमानदारी से करनी चाहिये। जो भक्त बुलाये उसके कल्याण के लिये जाना चाहिये। दुष्टों का संहार करना चाहिये। धर्म की स्थापना करनी चाहिये। उनका यह भी मानना था कि फ़ेसबुक खाता खुलने से भक्त से सीधा संवाद हो सकेगा। चढ़ावा जो आता है वो सीधा हम तक पहुंचेगा। अभी तो सब पुजारी मार जाते हैं। सुना है अरबों-खरबों का चढ़ावा चढ़ता है, दूध वस्त्र फ़ल मेवा मिष्टान। लेकिन यहां तक केवल किस्से पहुंचते हैं। विष्णुजी तक युगों से एक ही पीताम्बर धारण किये हैं, शिव जी वही बाघांबर पहने हैं, सरस्वती, लक्ष्मी जी अपनी साड़ियां तक नहीं बदल पायी हैं। फ़ेसबुक से जुड़ेंगे तो भक्तों से सीधा संवाद हो सकेगा। उनके स्टेटस से पता चलता रहेगा कि कित्ते का प्रसाद चढ़ाया उन्होंने मंदिर में। हिसाब जमेगा तो चढ़ावे की सीधे अपने खाते में ट्रांसफ़र की सुविधा हासिल की जायेगी जैसी भारत सरकार गरीबों के लिये करने जा रही है।
भक्त के चढ़ावे की सीधी जानकारी से फ़ेसबुक की खिलाफ़त करने वाले सीनियर देवता भी उत्सुक हो गये कि कैसे फ़ेसबुक से यह पता चलेगा कि किसने कित्ता चढ़ावा दिया है मंदिर में। इस पर एक नये देवता ने ,जो कि देवता बनने के पहले साफ़्टवेयर इंजीनियर था, ने जानकारी दी कि मृत्युलोक में अपने किये का गाना गाने का चलन देवलोक की ही तरह है। जैसे देवता लोग भक्त पर एक एहसान करने युगों-युगों तक उससे प्रसाद वसूलते रहते हैं वैसे ही धरती पर भी लोग नेकी कर फ़ेसबुक पर डाल पंरंपरा का पालन करते हैं। इधर प्रसाद चढ़ायेंगे उधर फ़ेसबुक पर गायेंगे- आज बीस आने का प्रसाद चढ़ाया। अब तो बजरंगबली काम कर ही देंगे। भक्तों के चढ़ावे के स्टेटस से देवी/देवता लोग अपने-अपने हिस्से का हिसाब कर लेंगे।
देवलोक के लोग यह सोचकर खुश हुये कि उनको इससे फ़र्जी भक्तों से छुटकारा मिलेगा। सबसे ज्यादा पार्वती जी खुश हुईं कि इससे कम से कम शंकरजी की मेहनत तो कम होगी। अब तक ऐसा होता आया कि जिसने भी देवलोक की तरफ़ मुंह करके कुछ भी प्रार्थना की उसे शंकरजी अपना भक्त समझकर उसका कल्य़ाण कर देते हैं। बाद में पता चलता है कि वो तो किसी और देवता का भक्त है। न जाने कित्ता नुकसान होता है इससे उनका। अब कल्याण करने के बाद शिवजी से यह तो होता नहीं कि दूसरे देवताओं से हिसाब करें बैठ के कि उनके भक्त के कल्याण ये खर्चा आया। एकध बार किसी देवता से जिकर किया भी तो वह हें हें हें करते हुये कहने लगा- प्रभो मैं भी तो आपका ही भक्त हूं। हमारा भक्त भी आपका ही भक्त तो ठहरा। शिवजी बेचारे गरल की तरह नुकसान भी धारण कर गये। कुछ देवता इस बात से खुन्नस खाते हैं शिवजी दूसरे देवताओं के भक्तों का भी भला करके यह संदेश देना चाहते है कि भला करना सिर्फ़ शंकर जी के ही बूते की बात है।
देवलोक में सभी एकमत से फ़ेसबुक की स्थापना से सहमत हो गये लेकिन तभी एक काइयां देवता ने सवाल किया कि इस फ़ेसबुक की कुछ खराबियां भी होंगी। जरा उनके बारे में भी चर्चा हो जाये। इस पर लोगों ने उसको घूरते हुये चुप हो जाने का इशारा किया लेकिन तब तक सवाल चर्चा में आ गया था सो कमियां भी पता की गयीं। देवताओं को पता चला कि:
फ़ेसबुक में खाता खुलने पर लोग सीता और रावण को एक साथ टैग करेंगे, मेनका और रंभा को सरस्वती और लक्ष्मी से ज्यादा लाइक किया जायेगा। कुबेर के आगे शंकर जी को कोई पूछेगा नहीं। माता पार्वती को कोई लंपट सेक्सी और क्यूट बतलायेगा। देवता किसी महिला के फ़ेसबुक स्टेटस पर दयालु होकर उस स्टेटस धारिणी को पुत्रवती बना देंगे लेकिन उधर से साठ साला जवान के मां बनने की खबर आयेगी। इसी तरह की अनगिन समस्याओं से जूझना पड़ेगा। देवलोक की गोपनीयता भंग होगी। देवलोक में फ़ेसबुक की शुरुआत सूचना का अधिकार लागू करने से भी आत्मघाती होगी। देवताओं को भारत में चुनाव की बाद की जनता की तरह कोई पूछेगा तक नहीं।
फ़ेसबुक के इतने सारे पंगे सुनकर देवताओं के चेहरे चुनाव में हारे बुजुर्ग नेता के चेहरे की झुर्रियों सरीखे लटक गये हैं। फ़ेसबुक पर तुरंत अमल का प्रस्ताव फ़िलहाल स्थगित हो गया है। युवा देवताओं को देवलोक से मृत्युलोक भेजा गया कि वे वहां जाकर अपना फ़ेसबुक खाता बनायें और फ़ेसबुक के बारे में अपने अनुभव बतायें ताकि इस बारे में अंतिम निर्णय लिया जा सके।
देवलोक टाइम्स की यह खबर मैं पढ़ ही रहा था कि अभी-अभी हमारे फ़ेसबुक खाते में किसी देवता का मित्रता अनुरोध आया है। क्या आपके यहां भी आया है? देखिये जरा।

23 responses to “देवलोक में फ़ेसबुक”

  1. shikha varshney
    उनको लग रहा था कि फ़ेसबुक खाता खुलते ही उनको सर्वसुलभ हो जाना पड़ेगा। कोई भी भक्त उनका मित्र बन जायेगा। कोई भी पोक करके चला जायेगा
    हा हा हा …जबरदस्त. आखिर देवलोक भी कैसे बचे इस जंजाल से.
    हमारे पास अभी तक किसी देवता की फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं आई है, आएगी तो आपको बताएँगे आखिर उनकी भी चर्चा तो आप ही करेंगे न :).
  2. Swapna Manjusha
    होली में चिरकुटई के
    रंगों की बौछार है
    एक चिरकुटों के अलम्बरदार
    दूजे चिरकुटई सरदार हैं
    देवताओं की मजाल क्या
    जो फेसबुक बनायेंगे
    जब हर फेस को बुक किये
    रँगे हुए सियार हैं :):)
  3. देवांशु निगम
    ये हुई ना बात , आप इस आईडिया को इम्प्लीमेंट का आर्डर दे दीजिये , हमारी कई सारी रिक्वेस्ट भगवान जी के यहाँ क्यू में पडी हैं , उसका स्टेटस भी पता करना है !!!!!
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..पं. पोंगादीन लप्पाचार्य से विस्फोटक बातचीत
  4. Dr. Monica Sharrma
    रोचक रहा देवलोक का फेसबुकिया किस्सा …..
  5. भारतीय नागरिक
    और फिर किसे किसे ब्लाक करना पड़ेगा… :)
    भारतीय नागरिक की हालिया प्रविष्टी..पड़ोसी के यहाँ आग लगे, हमें क्या!
  6. ashish rai
    बड़ा चौचक है ये किस्सा गोई , देवलोक से इंद्रा की सभा का विडिओ भी लगेगा . राम कसम बड़ा मज़ा आएगा .
  7. धीरेन्द्र पाण्डेय
    ये नही बतलाया कि इन्टरनेट किस कम्पनी का होगा ? और अगर किसी नि ब्लाक या अन्फ्रेंड कर दिया तो देवता का करिहें ?
  8. arvind mishra
    नारद की भूमिका को विधिवत चरितार्थ कर रहे हैं महराज -ईहाँ की बात उहाँ ले गए :-)
    लिखा जोरदार है व्यंग लेखक के रूप में अब आपकी पहचान बननी शुरू हुयी है -मोबाईल थरथराने लगे हैं :-)
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..क्या खाली पीली होली ?
  9. Yashwant Mathur
    होली का पर्व आपको सपरिवार शुभ और मंगलमय हो!
    ————————————-

    कल दिनांक28/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!
  10. संजय बेंगाणी
    दीपावली के बाद देवता गण देव-दीवाली तक सो जाया करते थे. अब फैसबुक पर लीन रहते है. जिसे विश्वास न हो हमारी बला से देवलोक होकर (इसे स्वर्गवासी होना भी कहते है) देख ले.
    संजय बेंगाणी की हालिया प्रविष्टी..न्याय की जीत या भय की जीत?
  11. Vibha Rani Shrivastava
    देवलोक टाइम्स की यह खबर मैं पढ़ ही रहा था कि अभी-अभी हमारे फ़ेसबुक खाते में किसी देवता का मित्रता अनुरोध आया है। क्या आपके यहां भी आया है? देखिये जरा।
    :)
  12. हेमा दीक्षित
    होली पर जबरदस्त फेसबुकिया कथा-प्रसंग है इस चुटपुटिया को पढ़ कर होली सार्थक हुई … :)
  13. kavita rawat
    जैसे मोबलिया हिट वैसे फेसबुकिया भी हिट ..
    देवलोक में फ़ेसबुक पर गंभीर, रोचक प्रस्तुति पढना बहुत अच्छा लगा …होली की शुभकामनायें
  14. सुमन्त मिश्रा,कानपुर
    प्रभु देवलोक/स्वर्ग लोक से लौटे कब? अभी-अभी ट्वीटरी नाम्नी अप्सरा का ट्वीट. मिला वो आपके लिए विरह व्याकुल है………
  15. दिनेशराय द्विवेदी
    नारद जी ने देवताओं को इंटरनेट मं घुसपैठ के लिए उकसाया है। तभी दुनिया भर का इंटरनेट एक्सप्रेस से पैसेंजर हो चला है।
  16. सुरेश साहनी,कानपुर
    और इस तरह देवलोक का विशद वर्णन सम्पन्न हुआ ।आगे की कथा अगले दिन ।ओम फेसबुकाय नमः ,ट्वीटराय नमः ,अंतरजालाय नमः ।।
    सुरेश साहनी,कानपुर की हालिया प्रविष्टी..बेहतर है, आप की पत्नी आप से सिर्फ तलाक चाहती है।
  17. अमित तिवारी,कानपुर
    पढ़कर बहुत मज़ा आया । देवलोक की समस्या को सुलझाने का उपाय भी अच्छा सोचा है ।
  18. mahendra gupta
    अच्छा रोचक प्रसंग वर्णित किया आपने.देवता भी समय के साथ आधुनिक होते जा रहें हैं. अच्छी रचना के लिए बधाई व आभार.
  19. प्रवीण पाण्डेय
    सब के सब अपना देवत्व भुलाकर चिरकुटाई पर उतर आयेंगे, भोग लाइक के लगेंगे, वर्षा भी लाइक की होगी।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..युक्तं मधुरं, मुक्तं मधुरं
  20. Ritesh Shrivastava
    बहुत खूब .. बड़ा ही रोच्किया रहा आपकादेवलोक प्रसंग
  21. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] देवलोक में फ़ेसबुक [...]
  22. Anonymous
    दैव दैव … कैसा हाहाकार मचाया है आपने ….बहुत रोचक , मनोरंजक …. ऐसे ही लिखते रहिये …
  23. shefali
    ऊपर वाला कमेंट मेरा है