Friday, November 14, 2014

जबलपुर गन्दा शहर है

आज धूप नहीं निकली।देरी से गए पुलिया पर।रामफल बोले- "हमने सोचा दिल्ली चले गए।"

हमारे देखते-देखते एक मोटर साइकिल सवार खड़े-खड़े अपने साथी को लिए दिए सड़क पर लुढ़क गया।रामफल यादव देखते ही बोले-"पिए है लड़का।जबलपुर गन्दा शहर है।लड़के पीकर मोटर साइकिल चलाते हैं। गिरते हैं।"

रामफल का भतीजा उनकी ठेलिया ठेलकर बाजार में लगवाने के लिए आ गया था। रामफल उसको 100 रूपये रोज देते हैं इसके लिए।

रामफल को किताब दिखाई। वे ख़ुशी से देखते रहे।भतीजे को भी दिखाई। दोनों को पढ़ना नहीं आता।रामफल को बताया कि उनके बारे में देश विदेश के लोग पढ़ते हैं। वे खुश हुए। एक फ़ोटो किताब उनके हाथ में थमाकर विमोचन मुद्रा में ली।

रामफल के कान के बारे में हमारे मित्र Alok Prasad ने खमरिया में कार्यरत डॉ प्रसाद को दिखाने को कहा था। डॉ प्रसाद से वहीं से फोन करके पूछा तो उन्होंने कहा- "किसी भी कार्य दिवस पर आ जाएँ।देख लेंगे।" रामफल यादव से पूछा तो उन्होंने कहा -"वुधवार को दोपहर के बाद चलेंगे।" देखते हैं रामफल का कान ठीक होने की कितनी संभावना है।

समय हो गया था।रामफल का भतीजा ठेलिया लेकर बाजार की तरफ चल दिया।रामफल उसके पीछे साइकिल पर। हम वापस मेस।

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