Saturday, November 22, 2014

यह यथार्थ से भी परिचय कराता है







आज पुलिया पर सत्येंदर और रामसत मिले।सत्येंदर पुलिया पर बैठे थे। रामसत पुलिया की आड़ में नीचे शायद निपट रहे थे।

बीस साल के सत्येन्दर ने बताया कि सुबह पहले वे गेट नंबर 3 पर मॉगने जाते हैं। इसके बाद पास के हनुमान मन्दिर।सुबह से 9 बजे तक 20-25 रुपया पा चुके थे। अब आगे के लिए मंदिर जा रहे थे।आज शनिवार था सो कुछ ज्यादा मिलने की आशा है।

रामसत इस बीच ऊपर आ चुके थे।बोतल के पानी से हाथ धोते हुए बोले-"हम लोग सूरदास हैं। जो थोडा बहुत मिल जाता है उसी में गुजारा कर लेते हैं।

इस बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट वाले तिवारी जी भी पुलिया पर नमूदार हुए।साइकिल अलग दिखी तो हमने पूछा-"आपकी साइकिल बदली-बदली लग रही है।" इस पर उन्होंने बताया उनकी साईकिल चोरी हो गयी।एक पुरानी साईकिल से काम चला रहे हैं।

सत्येंदर और रामसत को काम पर जाना था।हमको भी।इस तरह सुबह की पुलिया सभा विसर्जत हुई।

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