Saturday, April 18, 2015

मोटर साइकिल की हेडलाइट में पर्स की मरम्मत

अभी गए साइकिल की सर्विसिंग कराने। हुआ क्या कि साईकिल की गद्दी गठबंधन सरकार की गद्दी की तरह कभी बाएं कभी दायें हो जाती। कभी कभी रेल के फाटक की तरह उठ जाती तो उठी ही रहती। ब्रेक के हाल यह हुए कि साइकिल जवान बिगड़ैल सन्तान की तरह उसके काबू से बाहर। हवा भी चुनाव हारे नेता के टेम्पो की तरह डाउन।

साइकिल कसवा के लौटे तो सोचा गद्दी का कवर भी बनवा लिया जाए।दूकान 'चमन बैग' पर पहुंचे तो देखा लाइट नहीं थी। लेकिन बुजुर्ग दर्जी काम में जुटे थे। एक महिलाजी स्टूल पर बैठी थीं। दर्जी जी उनका प...र्स सिल रहे थे। महिलाजी के साथ आये पुरुष जी मोटर साइकिल की हेड लाइट से सिलाई के लिए रौशनी प्रदान कर रहे थे।

साइकिल कवर के बारे में पूछने पर पता चला कि दर्जी जी ने साईकिल कवर का काम बन्द कर दिया है। हमको अब हितकारिणी कालेज के पास दर्जी की दुकान जाना पड़ेगा।

इस बीच पर्स रिपेयर हो गया। पुरुष जी ख़ुशी ख़ुशी दर्जी जी को मरम्मत के पैसे देते हुए बता रहे थे- "अच्छा हुआ कि मरम्मत हो गयी। वरना मैडम गुस्सा होतीं।मैडम को गुस्सा बहुत तेज आता है।"

यह सुनते हुए मैडम जी मुस्करा रहीं थीं।

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