Thursday, March 31, 2016

अरे 31 मार्च जी,आओ, आओ

अरे 31 मार्च जी,आओ, आओ,
मजे करो, पसरो, मुस्काओ।

सबसे लम्बे दिन हो जी तुम,
हफ़्तों पसरे रहते हो जी तुम।

अप्रैल की भी कुर्सी रहते छेंके,
कैसे निष्ठुर, निर्मम हो जी तुम।

सबसे ज्यादा तुम ग्रांट पचाते,
सबसे ज्यादा काम दिखाते तुम।

सबसे ज्यादा भौकाली हो तुम,
बाबुओं की ईद, दीवाली हो तुम।

ट्रैजरी के आंखों के तारे हो तुम
एकाऊंट्स के राजदुलारे हो तुम।

सब दिन इतना काम अगर हो,
देश उछल के सबसे आगे तुम।

लेकिन ऐसा होगा कैसे जी,
लगते केवल फ़र्जी हो तुम।

अप्रैल फ़ूल बनाते जी तुम,
इधर-उधर करवाते जी तुम।

खैर चलो तुम मौज करो जी,
हम भी चलते सैर को हैं जी।

-कट्टा कानपुरी

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