Monday, June 11, 2018

सबसे स्मार्ट कौन ?

कोई भी स्वचालित वैकल्पिक पाठ उपलब्ध नहीं है.
दुनिया का सबसे पहला आलू कहां पाया गया, बताइये फौरन स्मार्ट बन जाइये।

कल पैदल टहले। ढेर सारा। टहलना शुरू करते ही रिकार्ड भी करते गए। चलन है भाई। कुछ भी करो, रिकार्ड रखो। क्या पता कल कोई अध्यादेश जारी हो जाये जो टहला है, वही सड़क पर चलने का अधिकारी है। बखत जरूरत काम आएगा।
फूलबाग चौराहे पर सिपाही तैनात था। बत्तियां जल रहीं थीं लेकिन ट्रैफिक हाथ से चल रहा था। हरी बत्ती पर हाथ से गाड़ी रोक देता। लाल पर कहता -'निकल लो।' कई बार गफलत में हरी बत्ती पर भी गाड़ियों को पास दे देता।
बगल में खड़े होकर हम उसको देखते रहे। कानपुर में दो दिन पहले मुख्यमंत्री जी ने ऑटोमैटिक ट्राफिक सिग्नल व्यवस्था का उद्घाटन किया। जहां उल्लंघन किया, चालान 'एटोमेटिकली' हो गया। फूलबाग में, नरोना चौराहे पर क्या व्यवस्था है, पता नहीं क्योंकि यहां सिपाही का हाथ ही सिग्नल है। चौराहे पर अंधेरे का भी इंतजाम पुख्ता है। सिपाही का हाथ केवल आगे वाली गाड़ी को दिखता है। बाकी उसके पीछे।
सिपाही ने हाथ के सिग्नल से गाड़ियों को निकलने की व्यवस्था देने के बाद खैनी ठोंकी। ठोंकता रहा। खैनी ठोंक-फटकार कर मुंह में स्थापित की। आनन्दित होकर दूसरी तरफ की गाड़ियों को जाने की अनुमति दी। हमने उससे पूछा -'ये ट्रैफिक सिग्नल तो बेकार ही लगे हैं फिर।'
बोला-'इसी लिए तो हम खड़े हैं यहां चौराहे पर।'
अंधेरे में भी धूप का चश्मा लगाए सिपाही ऐसी जगह खड़ा था जहां उसे दूर से देखकर संकेत ग्रहण करने की सम्भावनाएं एकदम खत्म थी।
आगे एक जगह कानपुर नगर निगम के सौजन्य से पानी बिक रहा था। पांच रुपये का बीस लीटर। कार्ड स्वैप करके लोग पानी भर रहे थे। बगल में एक नगर निगम की ही पौशाला थी। फूस की झोपड़ी। अंदर न आदमी, न घड़ा और जाहिर है न ही पानी। 'कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता दुनिया में' का खुला इश्तहार।
बड़ी बात नहीं कल को सड़क पर हवा, पानी, धूप सब प्रीपेड कार्ड पर दिखें, मिले। सड़क पर चलना भी कार्ड पर पेमेंट के बाद हो। पर किलोमीटर के रेट हों। आपने बड़े चौराहे तक की सड़क पर चलने के पैसे भरे हों। आपका मन किय्या कि जरा चौक तक घूम आएं, बिना पेमेंट आगे जा न पाएं। क्या पता आगे जाने के लिए पेमेंट के लिए कार्ड स्वाइप करें और आपका कार्ड हैक हो जाये। पड़े रहेंगे आप बड़ा चौराहे पर कानपुर के किसी अधबने फ्लाई ओवर सरीखे। कोई आएगा तब आपको वापस ले जाएगा।
जेड स्क्वायर माल में घुसते ही 'स्टार प्लस' का 'सबसे स्मार्ट कौन' तमाशा चल रहा था। अपना नाम भरिये। किसी सवाल का जबाब दीजिये। सही जबाब देने पर स्मार्ट बन जाइये। सवाल का भी मुलाहिजा हो जाये लगे हाथ:
1. एक लड़का महीने में 30 दिन जागता है। फिर भी तरोताजा दिखता है। कैसे?
2. दुनिया में आलू सबसे पहले कहां पाया गया था?
सभी सवालों के विकल्प भी दिए थे। आपको बस उनमें से एक चुनना था।
पहले का जबाब था -'क्योंकि वह रात को सोता है।' दूसरे का सही जबाब था -'जमीन में।' लोग मजाक-मजाक में स्मार्ट बन रहे थे। इतनी आसानी से स्मार्ट बनाकर 'स्टार प्लस'लोगों को बेवकूफ बना रहा था। अपना प्रचार कर रहा था।
क्या पता कल को लोग अपना, बच्चों का नाम, जन्मतिथि बताकर भी स्मार्ट बनने लगे। सबको स्मार्ट बनाते हुए, सबको बेवक़ूफ़ बनाना है।
माल में घुसते ही लोग सबसे पहले फ़ोटो, सेल्फी ले रहे थे। हमें लगता है कि माल में सेल्फी, फ़ोटो की सुविधा खत्म हो जाये तो बिक्री आधी हो जाये।
लौटते ने बैटरी ऑटो से आये। चौराहे पर सिपाही देखकर ऑटो वाले ने रास्ता बदल लिया। कागज सब ठीक हैं पर कहता है-'पता नहीं किस बात पर सनक जाएं साले। रोक दें, ठोंक दें कुछ ठिकाना नहीं। इसलिए इधर से आ गए।'
अंदर गली में एक दिन रात का मैच हो रहा था। पचास गुना पचास मीटर से भी कम बड़े मैदान में बत्ती की रोशनी में मैच। एक मंदिर पर बैनर लगा था। प्रीमियर टूर्नामेंट। रबर की गेंद से मैच हो रहा था। छज्जे से कमेंट्री हो रही थी। आसपास के लोग जमा थे मैच देखने को। हम भी जमे कुछ देर। कमेंटेटर ने कहा -' इस टीम के लिए यह ओवर पंजाब की खेती सरीखा साबित हुआ। खूब रन कूट डाले इन लोगों ने।'
कमेंट्रेटर को सुनकर लगा कि आगे जसदेव सिंह की तर्ज पर कहीं कमेंटेटर, एंकर बनने की संभावना है बालक में।
चौराहे पर एक आदमी फुटपाथ पर लेटा था। आंते दिखती हुई। गांधी जी का दरिद्रनारायण। वह सो रहा था। अनगिनत लोग ऐसे भूखे सोते रहते हैं। कुछ भूख से मर भी जाते हैं। हल्ला मचने पर जिले के डीएम सस्पेंड हो जाते हैं। बहाल हो जाते हैं।
सबसे अलग मॉल में 'सबसे स्मार्ट' लोग खोजे जाते हैं। खेल चलता रहता है। क्योंकि मॉल में भूखे लोग नहीं जाते हैं।
अरे आज सोमवार हो गया। आप मजे कीजिये। हम अब दफ्तर जाते हैं।

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