Sunday, June 24, 2018

मुश्ताक अहमद युसुफ़ी नहीं रहे

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मुस्ताक अहमद युसुफ़ी
आज फ़ेसबुक पर एक पोस्ट से पता चला कि मुश्ताक अहमद युसुफ़ी साहब नहीं रहे। 20 जून को उनका इंतकाल हुआ। हिन्दी व्यंग्य की दुनिया में इसकी खबर पता नहीं चली।
94 साल की उमर में मुश्ताक साहब का इंतकाल हुआ। मैंने पाकिस्तान के अखबार देखे। मुश्ताक साहब को पाकिस्तान में गालिब के पाये का गद्य लेखक माना गया है।
मुश्ताक साहब के कई वीडियो देखे सुबह से। एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया -’अहमद युसुफ़ी के युग में जीते हुये कैसा लगता है?’
उन्होंने जबाब दिया। अच्छा लगता है। लेकिन हर एक को अपने खुद के युग में जीना चाहिये।
एक सवाल के जबाब में उन्होंने जबाब दिया -’अपने से कमजोर पर तंज नहीं कसना चाहिये। मजा तो अपने से मजबूत पर तंज कसने का है।’
मुश्ताक साहब के बारे में खबरों का और उनके इंटरव्यू के लिंक नीचे दिये हैं। इन वीडियो में उनको उनकेे कुछ कलाम पढते हुये भी सुन -देख सकते हैं।
मुश्ताक साहब ने अपने एक बयान में कहा था- ’पश्चिमी समाज में लोग किसी इमारत को तब तक तवज्जो नहीं देते जब तक वह उजाड़ न होने लगे। इसी तर्ज पर अपने यहां लेखक को उसके मरने के चालीस दिन बाद से तवज्जो मिलती है।’
हास्य व्यंग्य के बेहतरीन लेखक मुश्ताक अहमद के निधन पर श्रद्धांजलि ।
मुश्ताक साहब के लेखन के कुछ अंश यहां पेश हैं:
1. हर ऐसी मुहिम पर शक करो, फ़जीहत भरी जानो जिसके लिये नये कपड़े पहनने पड़ें।
2. मूंगफ़ली और आवारगी में खराबी ये है कि आदमी एक बार शुरू कर दें तो समझ नहीं खत्म कैसे करें?
3. जब कोई किसी पुराने दोस्त को याद करता है तो दरअस्ल अपने को याद करता है।
4. बुढापे की शादी और बैंक की चौकीदारी में जरा फ़र्क नहीं। सोते में भी एक आंख खुली रखनी पड़ती है और चुटिया पे हाथ रखकर सोना पड़ता है।
5. मर्द भी इश्क-आशिकी सिर्फ़ एक बार ही करता दूसरी मर्तबा अय्यासी और उसके बाद निरी बदमाशी।
6. जवानी दीवानी की तेजी बीबी से मारी जाती है। बीबी की तेजी औलाद से मारते हैं औलाद की तेजी साइंस से और साइंस की तेजी मजहबी शिक्षा से। अरे साहब तेजी का मारना खेल नहीं है, मरते-मरते मरती है।
7. इससे अधिक दुर्भाग्य क्या होगा कि आदमी एक गलत पेशा अपनाये और उसमें कामयाब होता चला जाये।
8. दुनिया में पीठ पीछे की बुराई से हजम होने वाली कोई चीज नहीं।
9. एक पांव लंगड़ाना दोनों पांव लंगड़ाने से बेहतर है।
10. मुगल बादशाह जिस दुश्मन को अपने हाथ से मारना नहीं चाहते थे उसे हज पर रवाना कर देते या झंडा, नक्कारा और खिलअत (शाही पोशाक) देकर दक्खिन या बंगाल जीतने के लिये भेज देते।
11. इतिहास पढने से तीन लाभ हैं। एक तो यह कि पूर्वजों के विस्तृत हालात की जानकारी होने के बाद आज की हरामजदगियों पर गुस्सा नहीं आता। दूसरे याददास्त तेज जाती है। तीसरे , लाहौल विला कूवत, तीसरा फ़ायदा दिमाग से उतर गया। कराची भी अजीब शहर है हां तीसरा भी याद गया। तीसरा फ़ायदा यह कि खाने, पीने, उठने, बैठने , भाइयों के साथ मुगलिया बरताव की सभ्यता से परिचय होता है।
12. ऐसा लगता है मनुष्य में अपने आप पर हंसने का साहस नहीं रहा। दूसरों पर हंसने में उसे डर लगता है।
13. व्यंग्यकार को जो कुछ कहना होता है वो हंसी-हंसी में इस तरह कह जाता है कि सुनने वाले को भी बहुत बाद में खबर होती है।मैंने कभी किसी ठुके हुए मौलवी और व्यंग्यकार को लिखने-बोलने के कारण जेल में जाते नहीं देखा।
14. बिच्छू का काटा रोता और सांप का काटा सोता है। इंशाजी (इब्ने इंशा)का काटा सोते में मुस्कराता भी है। जिस व्यंग्यकार का लिखा इस कसौटी पर न उतरे उसे यूनिवर्सिटी के कोर्स में सम्मिलित कर देना चाहिए।
15. समाज जब अल्लाह की धरती पर इतरा-इतरा कर चलने लगते हैं तो धरती मुस्कराहट से फट जाती है और सभ्यताएं इसमें समा जाती हैं।
16. मुस्कान से परे वो विपरीतता और व्यंग्य जो सोच-सच्चाई और बुद्धिमत्ता से खाली है, मुंह फाड़ने , फक्कड़पन और ठिठोल से अधिक की सत्ता नहीं रखता।
17. धन, स्त्री और भाषा का संसार एक रस और एक दृष्टि का संसार है, मगर तितली की सैकड़ों आँखे होती हैं और वो उन सबकी सामूहिक मदद से देखती हैं। व्यंग्यकार भी अपने पूरे अस्तित्व से सब कुछ देखता, सुनता, सहता और सराहता चला जाता है। फिर वातावरण में अपने सारे रंग बिखेरकर किसी नए क्षितिज, किसी और रंगीन दिशा की खोज में खो जाता है।
18. जैसे-जैसे साम्राज्य पर अहंकार और हवस बढ़ती जाती है डिक्टेटर अपने निजी विरोधियों को ईश्वर का विरोधी और अपने चाकर-टोले को बुरा बताने वालों को देशद्रोही बताता है। जो उसके कदमों में नहीं लोटते, उन पर ईश्वर की धरती का अन्न, उसकी छांव और चांदनी हराम कर देता है। लेखकों, कवियों को शाही बिरयानी खिलाकर ये बताता है कि लिखने वाले के क्या कर्तव्य हैं और नमकहरामी किसे कहते हैं।
19. कभी-कभी कोई समाज भी अपने ऊपर अतीत ओढ़ लेता है।गौर से देखा जाए तो एशियाई ड्रामे का असल विलेन अतीत है। जो समाज जितना दबा, कुचला और कायर हो उसे अपना अतीत उतना ही उज्ज्वल और दुहराये जाने लायक लगता है।हर परीक्षा और कठिनाई की घड़ी में वो अपने अतीत की और उन्मुख होता है और अतीत भी वो नहीं, जो वस्तुत: था, बल्कि वो जो उसने अपनी इच्छा और पसंद के अनुसार तुरन्त गढ़ कर बनाया है।
20. लीडर भ्रष्ट, विद्वान लोग स्वार्थी, जनता भयभीत-आतंकित और हर आदेश का पालन करने वाली। जब संस्थान खोखले और लोग चापलूस हो जायें तो जनतंत्र धीरे-धीरे डिक्टेटरशिप को रास्ता देता जाता है। फिर कोई डिक्टेटर देश को कुपित आंखों से देखने लगता है। तीसरी दुनिया के किसी भी देश के हालात पर दृष्टिपात कीजिए। डिक्टेटर स्वयं नहीं आता, लाया और बुलाया जाता है और जब आ जाता है तो प्रलय उसके साथ-साथ आती है।
21. कभी-कभी कोई समाज भी अपने ऊपर अतीत को ओढ़ लेता है। गौर से देखा जाये तो एशियाई ड्रामे का अस्ल-विलेन अतीत है। जो समाज जितना दबा, कुचला और कायर हो उसे अपना अतीत उतना ही अधिक उज्ज्वल और दुहराये जाने लायक दिखाई पड़ता है। हर परीक्षा और कठिनाई की घड़ी में वो अपने अतीत की ओर उन्मुख होता है और अतीत भी वो नहीं, जो वस्तुतः था, बल्कि वो जो उसने अपनी इच्छा और पसंद के अनुसार तुरंत गढ़ कर बनाया है।
संबंधित कड़ियां
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1. https://epaper.dawn.com/DetailNews.php… मुश्ताक साहब के बारे में समाचार
3. https://www.youtube.com/watch?v=g7eFB0oJUeE
https://www.youtube.com/watch?v=d_Hdc6k_DX8 मुश्ताक साहब का व्यंग्य पाठ -1
4. https://www.youtube.com/watch?v=TxNe5tVA5eU मुश्ताक साहब का व्यंग्य पाठ -2
5. https://www.youtube.com/watch?v=RcT6SPaPOUY मुश्ताक साहब का व्यंग्य पाठ -3
6.https://www.youtube.com/watch?v=YoJqFbK2dYo मुश्ताक साहब का व्यंग्य पाठ -4
7. https://www.youtube.com/watch?v=5BCRS86SoPY मुश्ताक साहब का व्यंग्य पाठ -5
8. https://www.youtube.com/watch?v=B_2PtMjsUZM मुश्ताक साहब का व्यंग्य पाठ -6
9. http://www.hindisamay.com/…/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%… मुश्ताक साहब का उपन्यास - खोया पानी

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