Monday, June 29, 2026

गर्मी के मौसम में बिजली की जरूरत

 


आज सबेरे अखबार में खबर पढ़ी -' भड़के लोगों ने (बिजली विभाग के) जेई को 13 किमी तक दौड़ाया।'

गर्मी के मौसम में बिजली की जरूरत और सप्लाई में काफ़ी अंतर हो जाता है। जहाँ बिजली नहीं आती वे अपने गर्मी बिजली विभाग के नजदीकी दफ़्तर, अधिकारी पर उतारते हैं। गर्मी में बिजली विभाग के डिस्ट्रीब्यूशन आफिस में काम करना सबसे चुनौतीपूर्ण कामों में से एक है। पता नहीं कब पब्लिक दौड़ा ले।
लोगों का आक्रोश सहज प्रतिक्रिया है। लेकिन उनको यह भी समझना चाहिए कि जेई कोई बिजली अपने पास तो जमा करके रखता नहीं। सप्लाई जो आयेगी वही मिलेगी। दौड़ाने से बिजली आने लगे तो बिजली विभाग शायद पावर प्लांट बनाने की जगह धावक भर्ती करने लगे। भर्ती तो अब होती नहीं। ठेके पर रखे जायेंगे धावक।
13 किमी दौड़ाने के बाद रुक जाने का कारण शायद 13 अंक से जुड़ी अपशकुनी धारणा भी होगी। 13 अंक को अपशकुन न माना जाता तो क्या पता ज़्यादा दौड़भाग होती।
अख़बार में एक खबर यह भी थी -'भाजपाइयों ने सुनी मोदी के मन की बात।' खबर के शीर्षक से अंदाज़ नहीं लगता कि अब 'मन की बात' केवल भाजपा के लोग ही सुनते हैं या भाजपा के लोगों के लिए 'मन की बात' सुनना अनिवार्य है। क्या पता किसी मुलाक़ात में पूछ लिया जाये -'मन की बात' के 139 वे में अंक में क्या सुना?
दौड़ाए गए जेई की उन लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत कर देनी चाहिए -'साहब देखिए ये लोग आपके 'मन की बात' सुनने की बजाय हमको दौड़ा रहे थे। इन्होंने न सुना न सुनने दिया। हो सकता है शिकायत होने पर भीड़ के ख़िलाफ़ एक्शन हो जाता।
राम मंदिर के चंदा चोरी से जुड़े आरोपियों के ठिकानों से संपत्ति के दस्तावेज जब्त करने की खबर मुख्य खबर है अख़बार की। एक मित्र ने खबर पढ़कर कहा -" चंदे में पैसे की हेरा-फ़ेरी हुई है। पैसा हाथ का मैल है। बेचारे आरोपी लोगों के हाथ के मैल की सफ़ाई कर रहे थे। उनके ख़िलाफ़ कारवाई करना स्वच्छता अभियान के ख़िलाफ़ कार्यवाही करना है।"
हमने उनसे कहा -" तुम भी अजीब बात करते हो यार। तुम तो उन लोगों की तरह बात कर रहे हो जो कह रहे हैं कि जिसने चंदा नहीं दिया उसको चोरी पर सवाल उठाने का हक नहीं।"
मित्र ने हमको विधर्मी, नास्तिक और देशविरोधी बताकर हड़काया। हम हड़क गए। चाय के पैसे भी हमको देने पड़े। इसके अलावा कुछ कर भी नहीं सकते थे हम।
फ्रांस में गर्मी से 1000 लोगों के मरने की ख़बर भी है अख़बार में। पिछले चार-पाँच दिनों में इतने लोग गर्मी के कारण नहीं रहे। यह हाल 40 डिग्री तापमान पर है। भारत में तो गर्मी में कहीं -कहीं तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। फ्रांस के लोग अगर इस तापमान में रहें तो उनके क्या हाल होंगे, कहना मुश्किल है। आफ़त में पड़ जाएँगे वे।
दुनिया भर में गर्मी बढ़ती जा रही है। कारण सबको पता है। हल भी पता है। लेकिन उस पर अमल की किसी को चिंता नहीं है। बड़े लोगों को लड़ाई से ही फुर्सत नहीं। दुनिया के सामर्थ्यवान लोग दुनिया की बर्बादी की कहानी लिखने में लगे हुए हैं। कभी-कभी तो लगता है कि दुनिया के बागडोर लोगों ने अपने यहाँ के छँटे हुए लोगों को सौंप दी है। ये लोग अपने यहाँ के पूजीपतियों के इशारे पर दुनिया की ऐसी-तैसी करने में जुटे हैं।
हम भी फ़िलहाल कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। अफ़सोस।

No comments:

Post a Comment