Thursday, January 15, 2015

अरी मोरी ठण्डी महरानी

अरी मोरी ठण्डी महरानी
काहे इत्ती जोर झल्लानी।


पारा गिरा दिया नीचे को
जमकर बर्फ गिराई रानी।

शहर बनाया स्विट्जरलैंड
सूरज भाई की मेहरबानी।

दिल्ली तापती 'चुनाव अंगीठी'
हचक के देखो है गर्मानी।

अच्छे दिन कम्बल में दुबके
ठंडक में याद आई नानी।

'चेटन' ने क्या 'रागा' फैलाया
'अकाल मांगटी' उससे पानी।

सूरज की किरणों का फेसियल
सुंदरता से भी सुंदर तुम रानी।

अरी मोरी ठण्डी महरानी
हो तुम क्यूट,स्वीट,मनभानी।
-कट्टा कानपुरी

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