Tuesday, August 11, 2015

तुम्हारी याद आई औ मन गुदगुदा गया

तुम्हारी याद आई औ मन गुदगुदा गया
एक मिनट , जरा कोई फोन आ गया।

धनिया की जगह फिर से टमाटर ले आये
दुकान पर तेरा चेहरा फिर याद आ गया।

पूरा दिन बीता पर तुम्हें याद नहीं किया,
मना है याद करने को, ये याद आ गया।

प्रेम गली खुदी है,सीवर के पाइप पड़ रहे
इसीलिये उचक के मैं फेसबुक पे आ गया।

तेरी तस्वीर पे इत्ती जोर से लाइक लिया
अंगूठा मेरा स्क्रीन के पार* आ गया ।

पढ़ के मेरा मेसेज लगता है मुस्कराई हो,
यहां लॉन पूरा रौशन, गुलजार हो गया।

-कट्टा कानपुरी
*शेर संसोधन हरमेश सिंह की सलाह पर।

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