Friday, August 28, 2015

आम आदमी की जिन्दगी का एक दिन





आज सुबह ठीक 5 बजे उठ गए। कट्टा कानपुरी का रात रिकार्ड वीडियो फेसबुक पर सटाया।उसके दो ठो शेर फिर से:
मेरी महबूबा मेरी बीबी बने न बने कोई बात नहीं
मैं उसके बच्चों को ट्यूशन पढाना चाहता हूँ।
मेरे अब्बा की तमन्ना थी मैं फर्राटे से अंग्रेजी बोलूं
मैं पोस्टमैन का पूरा एस्से सुनाना चाहता हूँ।
लोग सुबह-सुबह सरपट भागते हुए से मॉर्निंग वाक कर रहे थे। एक आदमी लुंगी पहने टहल रहा था।उसकी लुंगी के दो हिस्से आपस में हर मुद्दे पर मतभेद रखने वाले जीवनसाथी की तरह हर कदम पर अलग-अलग फ़ड़फ़ड़ा रहे थे। कमर पर बंधी गांठ ही विवाह बन्धन की तरह उनको एक साथ रखे थी वरना क्या पता वे अलग हो लेते।
बहुत दिन से Rohini को देखा नहीं था।उसका घूमने का समय और रुट तय है।छह बजे तक वह लौट जाती है।हम साढ़े पांच बजे निकले थे।यह समय उसके लौटने का होता है। हम गेट नम्बर छह जहां तक होकर वह वापस लौटती है गए।वहां से लौटते हुए काफी दूर तक नहीं दिखी तो मुझे लगा कि लौट गयी होगी या फिर आज निकली नहीं होगी वाक के लिए।

लेकिन फैक्ट्री के गेट नम्बर 3 के आगे स्कूल के पहले तेजी से वाक करते हुए दिखी रोहिनी। दो महीने करीब के बाद मुलाकात हुई। बोली -मैं जब भी वाक पर निकलती तो मेस के सामने से गुजरते हुए देखती कि शायद अंकल निकल रहें हों सुबह की साइकिलिंग पर।

इस बीच रोहिनी की नौकरी वहीं लग गयी है जहां से वह पीएचडी कर रही है। सोमवार से जाना होगा शायद। पीएचडी का काम भी चल रहा है आगे। 6-7 किलोमीटर दूर है कालेज। जाने का साधन के बारे में मैंने सुझाव दिया साइकिल से जाया करो। जब तक अपनी खरीदना तब तक मेरी ले लेना।

रोहिनी टहलने के समय के प्रति बहुत नियमित है।एन सीसी के दिनों से आदत है।आर्मी में जाना चाहती थी।पर जब जाने का मौका मिला उस समय तक ग्रेजुएशन पूरा करने के मन के चलते नहीं जा पायी।

व्हीकल गेट से शोभापुर रेलवे क्रासिंग तक हम लोग साथ-साथ बात करते गए। वह तेज टहलते हुए और मैं धीमे साइकिल चलाते हुए।रास्ते में सब सुबह टहलने वालों से नमस्ते/गुडमॉर्निंग भी होती जा रही थी। हनुमान मन्दिर के पास जो सरदार जी मिले थे वे लौटते हुए दिखे। एक दिन वे उल्टे ब्रिक्स वाक करते हुए दिखे थे।

रोहिनी ने बताया कि उसकी मम्मी भी हमारे बारे में जानती हैं।यह भी कि मेरा जन्मदिन 16 सितम्बर को पड़ता है। उसकी बिटिया का जन्मदिन भी 16 सितम्बर को पड़ता है। बिटिया की खूब सारी फोटो एक दो दिन पहले लगाई थीं उसने। बिटिया को भी स्टाइलिश फोटो खिंचवाने का शौक है।हर मम्मी की तरह रोहिनी को भी अपनी बिटिया बहुत शरारती लगती है।

16 सितम्बर को मैं 52 साल का हो जाऊंगा।रोहिनी की बिटिया 2 साल की।हमने कहा दोनों मिलकर जन्मदिन मनाएंगे। कुल जमा 54 साल मिलकर धमाल करेंगे।

कई बार की मुलाकात के बावजूद रोहिनी की फोटो नहीं ली थी मैंने अब तक। आज पूछकर ली। तीन फोटो में वही सबसे अच्छी लगी मुझे जिसमें वह हंसते हुए दिख रही है। सलामत रहे यह हंसी सदैव।

रोहिनी शोभापुर रेलवे फाटक के बाद अपने घर की तरफ चली गयी। ओवरब्रिज के नीचे लोग सुबह का खाना बना रहे थे। तीन चूल्हे जो दिख रहे यहां वो सब कुण्डम से आये लोगों के हैं। एक आदमी पतीली और भगौना मांज रहा था। हमने पूछा -घर में भी कभी मांजते हो बर्तन। बोला -नहीं। घर में वह काम करने में आदमी की मर्दानगी को बट्टा लगता है जो काम वह बाहर रोज करता है।एक आम हिंदुस्तानी मर्द अपनी मर्दानगी की रक्षा इसी तरह करता है कि घर में रहते हुए वो वे काम न करे जो आम तौर पर औरताना माने जाते हैं।

महिला अकेली आई है घर से बाहर काम करने। आदमी घर में रहता है। काम नहीँ करता। एक बेटी एक बेटा है घर में।बेटा भी काम करता है।बिटिया शादी लायक है। किसी बात के जबाब में महिला बोली-घर में खाने को रोजी रोटी का जुगाड़ होता तो यहां घूरे में काहे को पड़े होते।

आदमी को 250 रूपये और औरत को दो सौ रुपये मिलते हैं दिहाड़ी। आदमी औरत की दिहाड़ी में 20% भेदभाव ।
जनधन योजना या फिर 1 रूपये वाली बीमा योजना के बारे में कुछ नहीं पता इनको। ये सारी योजनाएं अख़बारों,टीवी, रेडियो और सोशल मिडिया पर पायी जाती हैं। उनमें से किसी तक इनकी पहुंच नहीं है।यह हाल स्मार्ट सिटी बनने जा रहे जबलपुर के बीचोबीच रहते लोगों के हैं। फिर दूर दराज के गावों तक कितनी पहुंचती होंगी योजनाएं इसका अंदाज लगाया जा सकता है।

मैंने कहा कि इसके बारे में बताएंगे अगले हफ्ते। कोशिश करेंगे कि ओवरब्रिज के नीचे रहते लोगों को इसके बारे में बता सकें।

मेरे बात करते करते एक आदमी उस महिला के पास खड़ा होकर बीड़ी पीते बात करने लगा।मैंने फौरन सोचा कि क्या यह महिला भी बीड़ी पीती है। और भी कई बातें। यह सोचते ही मुझे लगा कि मेरा नजरिया स्त्री के प्रति एक आम पुरुष के नजरिये से अलग कहां है। औरत घर से बाहर कमाने को निकली है। पति और बच्चे घर में छोड़कर। हर संघर्ष करते हुए भी पुरुष सोचता है कि स्त्री  सुलभ माने जाने वाले गुणो को भी धारण किये रहे।

आगे दीपा मिली। हैण्डपम्प पर नहाने जा रही थी।उसके पापा ने बताया -" पहले घर का काम करती थी। पढ़ती रहती थी। सब खेलती रहती है।न घर का काम न पढ़ाई। हमने कह दिया-जाओ हैण्ड पम्प से नहा कर आओ।"
लौटकर दीपा से मिलने की सोचकर हम आगे चले गए। चाय की दुकान पर अख़बार में छपी एक आतंकी सज्जाद के पकड़े जाने की सुचना पर लोग प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। कुछ इस तरह:

1.साले को निपटा देना चाहिए था।।पकड़कर क्या सेल को बिरियानी खिलाएंगे।
2. अभी साले कसाब को दो साल खिलाया पिलाया।अब इस साले पर करोंडो बरबाद करेंगे।
3. यहां साले को पंखा तलक नसीब नहीं। उसको साले को ऐसी में रखेंगें।
4. मार देना चाहिए। साले से कहते भाग और मार देते गोली। कहते भाग रहा था साला।
उपरोक्त प्रतिक्रियाओं में हर वाक्य की शुरुआत या फिर अंत माँ-बहन की गालियों के सम्पुट से हो रहा था।हम लिख नहीँ रहे लेकिन आप यथास्थान उनको लगाकर पढ़ सकते हैं।

लौटते हुए देखा कि दीपा नहाकर लौट रही थी। सर पर बाल्टी और हाथ में कपड़े। उसके लिए लाया बिस्कुट का पैकेट दिया उसको और बताया कि अंकल उसके लिए बस्ता लाने वाले हैं। उसका बस्ता फट भी गया है।
पापा कि शिकायत पर पुछा तो बोली- हम खेलते रहते हैं इसलिए पापा ने आज हैण्ड पम्प पर भेजा नहाने। सर खुजाती दीपा से पूछा-रोज सर क्यों नहीं धोती तो बोली पापा मना करते हैं। हमने उसके पापा को कहा रोज धोने के लिए टोकते क्यों हो तो बोला-अब नहीं टोंकेगे।शैम्पू ला देंगे आज ।

दीपा से हमने कहा-तुमको किताबें ला देंगे ।पढ़ा करना। शाम को कभी आएंगे मिलने। फिर कहा-पर तुम तो कारखाने में रहती हो। इस पर वह बोली-आप आओगे तो हम आ जाया करेंगे घर।इसके फौरन बाद अपने पापा की तरफ देखकर बोली-पापा आप भी आ जाया करो जल्दी। पापा कुछ बोला नहीं लेकिन मुझे अभी भी दीपा की बात याद आ रही है।

चलते हुए पिता बेटी की फोटो ली। बच्ची पिता की बगल में सिमटी हुई है। पिता के साथ बेटी के चेहरे पर आश्वस्ति और पिता के चेहरे पर अनगढ़ वात्सल्य भाव को ब्यान करने के लिए शब्द नहीं मेरे पास।
सुबह हो गयीं। आप मजे से रहें।।जिनके प्रति आपके मन में कोई भी अच्छे भाव हैं प्रदर्शित कर लें।संकोच न करें। आपका दिन मंगलमय हो। शुभ हो।

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