Monday, August 03, 2015

अफ़लातून से मुलाकात

आज कई वर्ष बाद Aflatoon जी से मिलना हुआ। हम जब बीएचयू गए थे 1985-86 में इंजीनियरिंग के बाद हायर स्टडी के लिए तो वहीं परिचय और मेलजोल और फिर मित्रता हुई। बाद में ब्लॉगिंग के दिनों में फिर मिले इलाहाबाद में हुए ऐतिहासिक ब्लॉगर सम्मेलन में जिसका आयोजन वर्धा विश्वविद्यालय के सौजन्य और सिद्धार्थ की अनथक मेहनत के चलते हुआ था।

बनारस में अफ़लातून जी स्टेटिस्टिक्स के छात्र थे। गांधीजी के सचिव रहे महादेव जी देसाई के पुत्र नारायण देसाई जी के सुपुत्र अफ़लातून जी को राजनीति का पारिवारिक संस्कार मिला। गांधी जी के मूल्यों पर चलने वाले नारायण देसाई जी गांधी कथा सुनाते थे। हाल ही में लम्बी बीमारी के बाद स्वस्थ हो गए थे लेकिन फिर वे नहीं रहे।


अफ़लातून जी समाजवादी जनपरिषद से बीएचयू से चुनाव लड़ते थे। उपाध्यक्ष पद का। बीएचयू आई.टी. में पढ़ने लिखने वाले छात्रों में काफी लोकप्रिय थे लेकिन जीतने के लिए दीगर संकायों के लोगों के वोट जिस तरह से पड़ते थे उसके चलते हमारे सामने तो कभी चुनाव नहीं जीत पाये अफ़लातून जी। बाद में तो फिर खैर छात्रसंघ के चुनाव पर ही रोक लग गयी।

आज मुलाक़ात होने पर तमाम यादें फिर ताजा हुई। अफ़लातून जी ने मेरे बारे में कुछ बातें बताई कि उनके चुनाव में कैसे सहयोग करते थे हम। हमें कुछ याद नहीं लेकिन हमने उनकी बात मान ली।

हमें यह जरूर याद आया कि हम अफ़लातून जी के आह्वान पर कुछ मुसहर बच्चों को उनकी बस्ती में पढ़ाने जाते थे।एक दिन साइकिल से अपने मित्र योगेन्द्र पाठक के साथ उन बच्चों को सारनाथ भी ले गए थे।बच्चों को पढ़ाने का काम ऐसा है जिसे मैं फिर से करना चाहता हूँ। देखिये।


अफ़लातून जी के जरिये ही समाजवादी चिंतक किशन पटनायक का लिखा हुआ पढ़ने को मिला। उनका एक लेख है- 'विकल्पहीन नहीं है दुनिया'। इस लेख में किशन पटनायक जी ने दुनिया की परस्पर निर्भरता बताते हुए समझाया है कि दुनिया के बाकी देश सर्वशक्तिमान माने जाने वाले अमेरिका का बहिष्कार कर दें तो अमेरिका की सारी हेकड़ी निकल जायेगी।

सुबह से दोपहर बाद 3 बजे तक के हमारे निवास पर प्रवास में तमाम यादें साझा हुईं। चलते समय खबर आई की अफ़लातून जी की बिटिया, Pyoli Swatija जो कि सुप्रीम कोर्ट में वकील है, को किसी विरोध प्रदर्शन में पुलिस ने रोक लिया है। बिटिया को फोन करके बधाई देते हुए अफ़लातून जी ने खबर साझा की और चले गए। खबर साझा न करते तो बिटिया से हड़काये जाते।

अफलातून जी को सबसे अधिक उत्सुकता 'पुलिया' देखने की थी। उनको दिखाने ले गए पुलिया। 'सर्वहारा पुलिया' पर उनके साथी विक्रमा मौर्या जी के साथ फोटो भी लिया।

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