Wednesday, May 04, 2016

जबलपुर से कानपुर

"जबलपुर में हमारे दफ्तर के साथी। बाएं से रीता, मैडम तंगमनी और रामचन्द्र बैगा।"कानपुर आये तीन दिन पहले। जबलपुर से विदा होने की बात लिखी तो कुछ दोस्तों ने यह निष्कर्ष निकाला कि हम रिटायर हो गए। तदनुसार टिपियाये भी। बता दें कि वरिष्ठ नागरिक की उम्र तक पहुंचने में अभी आठ साल बाकी हैं अपन के।
जानकारी के लिए यह भी कि अब हम पैराशूट फैक्ट्री में तैनात हुए हैं। तोप, कट्टा, ट्रक, बख्तरबंद वाहन बनाने के बाद अब हम कपड़ा और पैराशूट बनाएंगे।
जबलपुर में फैक्ट्री मेस से एकदम पास थी। यहाँ जितनी देर में यहाँ घर से निकलकर ताला लगाकर बाहर निकलकर गेट बन्दकरके गाड़ी स्टार्ट करते हैं उतनी देर में वहां फैक्ट्री में जमा हो जाते थे। यहां घर से दुकान 11500 मीटर दूर है।

"स्टोर्स अनुभाग के अपने साथियों के साथ"पहले दिन निकले दफ्तर के लिए तो बहुत दिन बाद कानपुर में गाड़ी चला रहे थे। घर से निकलने से पहले ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी के कागज संभाल कर रखे। अच्छे बच्चे की तरह सीट बेल्ट बाँधने के बाद ही स्टार्ट किये गाड़ी। गाड़ी भी भली गाड़ियों की तरह एक ही बार में स्टार्ट हो गयी। 17 साल पुरानी गाड़ी चाबी लगते ही चलने लगे इससे बढ़िया बात और क्या हो सकती है पहले दिन।
निकलने पर स्माल आर्म्स फैक्ट्री और फिर आर्डनेंस फैक्ट्री रस्ते में पड़ी। दोनों फैक्ट्रियों की बहन फैक्ट्री फील्ड गन फैक्ट्री सामने दिखी। हमने तीनों को नमस्ते किया। गाड़ी में बैठे-बैठे वाई-फाई प्रणाम।
आर्डनेंस फैक्ट्री पहली फैक्ट्री थी जहाँ से हमने नौकरी शुरू की थी। कभी वहां उपमहाप्रबन्धक रहे डीडी मिश्र जी हमको साथ लेकर ज्वाइन कराने आये थे। शायद साईकल से आये थे पहले दिन। 30 मार्च , 1988 को।
ये 30 तारीख का हमारी नौकरी में कुछ ख़ास दखल रहा है। ज्वाइन किये 30 मार्च को। पहला प्रमोशन 30 अप्रैल, 1992 को हुआ। तीसरा प्रमोशन 30 अप्रैल, 2001 को हुआ। जबलपुर से कानपुर आना 30 अप्रैल को हुआ। उस दिन विदाई समारोह में यह बताते हुए हमने कहा कि अगर नौकरी पूरी कर पाये तो आखिरी विदाई भाषण भी 30 अप्रैल को होगा। सन रहेगा -2024 :)
विजय नगर चौराहे पर ही सड़क पर गाड़ियों की भीड़ का अंदाज हुआ। हर तरफ से गाड़ी वाला जल्दी से आगे निकल जाना चाहता है। जरा सा रुके नहीं कि पीछे वाला हल्ला मचाने लगेगा। आसमान सर पर उठाकर लगता है आगे वाले पर पटक देगा। इसके अलावा किसी भी कोने से कोई भी ऑटो वाला कहीं से भी प्रकट होकर आपके दायें या फिर बाएं से ( कानपुर के ऑटो अभी ऊपर से होकर आगे नहीँ जा पाते :) ) आगे खड़ा हो जाएगा।
विजय नगर पर चौराहे पर एक ट्रॉफिक पुलिस वाला गाड़ियों को नियंत्रित कर रहा था। लेकिन लग ऐसा रहा था कि गाड़ियां उसको नियंत्रित कर रही हैं। जिधर ज्यादा भोंपू बजने लगते, उसका ध्यान उधर की गाड़ी निकालने पर लग जाता।
ट्रैफिक वाले ने एक तरफ का ट्रैफिक रोका। लेकिन तब तक ट्रक न्यूटन के जड़त्व के नियम का सम्मान करते हुए बीच सड़क तक आ गया था। सिपाही ने उससे पीछे जाने का इशारा किया। ड्राइवर जब तक पीछे जाने का मन बनाता तबतक उसके पीछे भी गाड़ियां खड़ी हो गयीं। सड़क संसद की तरह जाम सी हो गयी। वाहन जनप्रतिनिधि की तरह हल्ला मचाने लगे। जरा सी जगह जो बची हुई थी उसी में तमाम वाहन टेढ़े-मेढ़े होकर आगे निकल लिए।
"जबलपुर रेलवे स्टेशन पर विदा करने आये साथी अजय राय, बिरेन्द्र सिंह, शरद नीखरा, सरफराज  नवाज, एस के गुंड, श्रीमती गुंड ( बिटिया के साथ ) और आस्था श्रीवास्तव।"सिपाही ने कुछ देर बाद ट्रक को निकाल दिया। सड़क फिर से चलने लगी।
जरीब चौकी पर एक बुढ़िया एक बच्ची के साथ सड़क पर कर रही थी। सड़क सिपाही अपनी जगह पर खड़े-खड़े उसको सड़क पार करा रहा था। बीच-बीच में एक-दो कदम आगे भी बढ़कर उसके लिए दूर से जगह बना रहा था। सिपाही का पेट काफी आगे निकला हुआ था। नौकरी करते हुए पेट अंदर करने का समय ही नहीं मिलता होगा भाई साहब को।
हमने जब सिपाही जी को बुढ़िया को सड़क पार करते देखा तो चौराहे पर गाड़ी रोक दी इस तरह कि दूसरी किसी गाड़ी के निकलने की संभावना काम हो जाए। बुजुर्ग महिला तसल्ली से पार कर गयी सड़क। सिपाही ने हमको इशारा किया आगे बढ़ने का। हम बढ़ गए।
फजलगंज चौराहे पर फिर गाड़ियों की भीड़ मिली। हमें लगा कि हमारे लिए रुकने का संकेत हुआ है। हम रुक गए। लेकिन सिपाही ने संकेत दिया कि निकलो आगे। जिस तरफ सिपाही संकेत दे रहा था उससे लगा वह चौराहे पर खड़े होकर हमारी गाड़ी खींचकर आगे निकाल रहा है। उसके खींचने भर से हमारी गाडी आगे निकल गयी। बेकार ही पेट्रोल बर्बाद किया।
यह तो हुआ कानपुर में पहले दिन का किस्सा। बीच के कई किस्से मिस हो गए। असल में यहाँ जिस जगह हमारी फैक्ट्री है वहां बीएसएनल का नेटवर्क कंचनमृग की तरह है। जितना आता है उससे ज्यादा नहीँ आता है। कई जगह फोन भी नहीं हो पाता। सुबह से शाम तक फैक्ट्री में रहने के दौरान यही हाल रहते हैं। लंच में भी फैक्ट्री में ही रह जाते हैं। इसलिए नेट/फोन कनेक्टिविटी के मामले में थोड़ा गरीब हो गए हैं फिलहाल।
कल मेरे बच्चे के जन्मदिन के मौके पर आपकी शुभकामनाएं , आशीर्वाद का शुक्रिया। कोशिश करूँगा कि सबको अलग से आभार व्यक्त कर सकूं। जब तक न मिले आभार मिला हुआ समझना।

https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10208000040212299
अनूप शुक्ल
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Satish Saxena
Satish Saxena भाग नहीं पाओगे अन्य अफसरों की तरह, नहीं तो कहता कि 11500 मीटर रनिंग का आनंद ही कुछ और है , सप्ताह में तीन बार करिये , प्यार से जमा की हुई तोंद समाप्त हो जाएगी अनूप भाई !
अतः साइकिल खरीदने का सुझाव दे रहा हूँ , 21 गियर वाली , आराम आराम से 50 मिनट में पंहुच जाया करोगे , मदद यह भी वही करेगी जो रनिंग में होती !
फिटनेस पर ध्यान देने का अनुरोध है , कट्टा फट्टा से ध्यान थोड़ा सा हटाइये !
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Mazhar Masood
Mazhar Masood हमको तो ये लग रहा है आप का साइकल नामा के बदले हमको अब कारनामा झेलना हो गा , हम को वो ज़यदा दिलचस्प लगता है कानपूर के नाम परिचित है एक अपनापन लगता है
आपके घर वापसी का स्वागत है अच्छा लग रहा है मगर अब क्या इतना समय आप कीबोर्ड को दे पाएंगे ये देखना है
Vivek Mohan Pathak
Vivek Mohan Pathak साइकिल को झाड़ पोछ कर ,हफ्ते में एक दिन जरूर से स्टार्ट कर लीजियेगा,,, वरना कार से उसके सौतिया डाह से आपको ही निपटना पड़ेगा। :)
Kumkum Tripathi
Kumkum Tripathi कमाल है! ज्वाइनिंग व रिटायरमेंट के महीनों व सालों का योग एक बराबर है और promotions के महीनों व सालों का एक समान!
पूजा कनुप्रिया
पूजा कनुप्रिया अरे वाह घर वापसी हो गयी अब तो दद्दा , देखो जितना जबलपुर में मिलते थे न उतना अब कानपुर में भी मिलेंगे ज्यादा आसानी हो गयी अब तो
Om Prakash Shukla
Om Prakash Shukla उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश अब फिर से उत्तर प्रदेश किसी और राज्य की धरती को पावन करना चाहिए था। सुकुल परिवार की जय हो।
Jyoti Tripathi
Jyoti Tripathi कानपुर तो आये हो पर पुलिया संग तो लाये होना,रामफल ,दीपा संगी साथी सब को बिसार तो न आये होना। जबलपुर की सुबह निराली कानपुर में न जाए खाली,चाहे तो बढ़ा दो चाय की प्याली भले आँख दिखाये घरवाली। लिख डालो सब के मनवाली,वॉल तुम्हारी न जाये कभी खाली। प्यार मिला जो इतना है तुमको,हर पाठक की बात निराली।
Rajeev Chaturvedi
Rajeev Chaturvedi कानपुर की पुलियाओं की क़िस्मत जाग गई । उनका भी हाल लिखेगा कोई । गृह नगर में स्थानांतरण पर बधाई और शुभकामनायें । जबलपुर और जबलपुर के लोग आपको याद रखेंगे । आते रहियेगा ।
Ayudhya Misra
Ayudhya Misra interesting to read, reminded me of Feb 1977, when i joined OFC from AFK and stayed till June 1983. From the reading it looks you are staying in Panki or beyond ? Now we will be enjoying your articles about kanpur.
Surendra Mohan Sharma
Surendra Mohan Sharma और हाँ ,कानपुर में किसी को गुटखा छोड़ने का आग्रह न करियेगा । कानपुर गुटखा का जनक है और वहां की संस्कृति ।खामखां कोई लफड़ा न हो जाये ।
Ashok Kungwani
Ashok Kungwani आइला आप जबलपुर से कट लिये , बडी़ इच्छा रही कभी जबलपुर आकर मुख-सम्मुख भेंटियाते-बतियाते , कानपुर अब तो ज्यादा ही दूर निकल लिये आप । चलिये आपको नई ज्वानिंग की बधाई हो ।
Neeraj Mishra
Neeraj Mishra Aapse jabalpur milne to nahi aa paye, but kanpur milne jaroor aayenge.. Date confirm karenge inbox mein sir... Bahut bahut badhayiyan..
Vishal Singh
Vishal Singh Respected Sir Kanpur me apka swagat hai ab yaha bhi pulia ki dunia sajegi. Best of Luck Welcome to Kanpur
Jyoti Shukla
Jyoti Shukla Factory ki chhoti bahan... ÷)
Retire hoge apr 2024 mei. Aries sunsign wale ho! Ab sunsigns per bhi likh dalo ek post.
Santosh Singh
Santosh Singh कानपुर में स्वागत सर.. आपका और मेरा आने जाने का रास्ता एक हैं.. विजयनगर तिराहा... डेली मैं भी जाम में फ़ंसता हूँ पर इस चौराहे का ऐसा जीवन्त विवरण पहली बार पढ़ा..
वैसे आपसे मुलाकात की ख्वाहिश अब पूरी होगी
Suresh Kant
Suresh Kant शुभकामनाएँ कानपुर के लिए| नब्बे के दशक में मैं भी रिज़र्व बैंक में काम करते हुए छह साल कानपुर रहा था| ओईएफ फैक्ट्री रिज़र्व बैंक अधिकारी आवास के पास ही थी| उसमें रिज़र्व बैंक से ही गया एक मित्र महेंद्र सिंह वाशिष्ठ आईएएस (अलाइड) होकर गया था| अच्छा लिखता था| उसका कुछ पता चल सके, तो कृपया बताएँ|
Surendra Mohan Sharma
Surendra Mohan Sharma सप्ताह में कम से कम एक दिन सायकल से फेक्टरी जाइए और अपने साथियों को भी इस के लिए प्रेरित करिये । हो सकता है कानपुर के प्रदूषण को कम करने में आप मील का पत्थर सिद्ध हों ।
Virendra Bhatnagar
Virendra Bhatnagar अब तो आपसे मिलने की इच्छा शीघ्र पूरी होने की सम्भावना दिखाई देती है क्योंकि एक तो आप लखनऊ के पास आ गए दूसरे पैराशूट फैक्ट्री में १७ साल (1968 to 1974 & 1981 to 1992) हम भी नौकरी किये हैं। अंतिम बार फैक्ट्री में २४ साल पहले गए थे, तबसे कितना चेंज आया देखने की उत्सुकता है।
हरदेव सिँह
हरदेव सिँह एक दिन हम भी खो जायेंगे,,
सितारों में कहीं,,,
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Pushpa Tiwari
Pushpa Tiwari घर होता ही इसलिए है कि घर वालों के पास एक जगह तो ऐसी है कि कितना भी घूमो फिरो लौटना है घर की बाँहों में । बधाई हो
Vijender Masijeevi
Vijender Masijeevi हम मान रहे हैं कि जीएम होगए हैं आप। कन्‍फर्म कीलिए, फिर कुछ ठसक से एस्‍टेट में पहुँचा जाएगा। बालक को स्‍नेह दीजिएगा।
Surendra Pratap Singh
Surendra Pratap Singh चलिए समाधान समय रहते हो गया और आप सकुशल कानपुर की सेवा में आ गये। नवीन पारी के शुभारंभ की ढेरों शुभकामनाए।
Suresh Sahani
Suresh Sahani लेखक रिटायर नहीं होता।बकौल ग़ालिब--
गो हाथ में जुम्बिश नहीं ,आँखों में तो दम है
रहने दो अभी सागरो-मीना मेरे आगे।।
Rekha Srivastava
Rekha Srivastava बस अब रोज पुलिया के बजाय जाम के बीच की कहानियाँ चलेगी । कानपुर आपकी कर्मभूमि है सो हर हाल में प्रिय रहगी ।
Upendra Singh
Upendra Singh सड़क संसद की तरह जाम सी हो गयी। वाहन जनप्रतिनिधि की तरह हल्ला मचाने लगे।

जबरदस्त क्या कहने छायावादी और प्रयोगवादी दोनो फेल हो गए इस विम्ब के आगे। मैं भी नतमस्तक हूँ प्रणाम स्वीकार करें।
Raj Kumar
Raj Kumar शहर बदलने के बाद भी "पुलिया पर ज़िन्दगी" चालू रहेगी या बंद हो जायेगी।
या फिर नया धारावाहिक "कट्टा कानपुरी" शुरू करेंगे, जे भी बताते चलिए।
अनूप शुक्ल जी
D.d. Mishra
D.d. Mishra Wellcome .atleast may see you some time at least when you visit kidwai nagar
हृदय नारा़यण शुक्ल
हृदय नारा़यण शुक्ल कानपुर मे भी पुलिया गुलजार रहेगी ।यहाँ तो किसिम किसिम लोग किसिम किसिम की बातें, घातें और प्रतिघातें सब मिलेगा ।भाई कट्टा कानपुरी दनादन फायर झोंक देगे।शुरूआत हो गयी है आज से हीःकानपूर मे ढूंढना नही होगा सब आसपास ही है ।याद कीजिए जब कभी कानपुर आए रेखाचित्र जरूर खींचे ।मेरे तो रास्ते मे ही हैं।मेरे संघर्ष के दिनो का साक्षी कानपुर मुझे लुभाता हुआ मेरे आधार को पुख्ता किया ।वही ं से शुरू और यहाँ तक।भाई बधाई।
Anamika Vajpai
Anamika Vajpai कानपुर में आपका स्वागत है।
( कानपुर के ऑटो अभी ऊपर से होकर आगे नहीँ जा पाते 😂 )
अग़ली बार कानपुर आऊँगी तो यह बात याद रहेगी, और गुस्से की बजाय हँसी आएगी।
साव सर
साव सर जबलपुर के आपके इस सुंदर आलेख ने मुझे उन दिनों की याद दिला दी, जब मैं वर्ष 1995 में नवयुग काॅलेज में बीएड करता था और काँचघर चौक से अपनी स्पोर्ट्स साईकिल पर जाता था । वहां बीएड के साथ एक और याद जुड़ी है .. जब मैनें 22 घण्टे लगातार वेदप्रकाश शर्मा की तीन थ्रिलर नाॅवेल पढ़ी थी !
Kamlesh Pandey
Kamlesh Pandey चलो अब ज़रा करीब आ गए.. आपको यहाँ ढेरों पुलिया मिले इस शुभकामना के साथ (पैराशूट तो हमारे किसी काम का है नहीं)
Prem Shanker Tripathi
Prem Shanker Tripathi कोलकाता के प्रसिद्ध गीतकार रुद्र दत्त शुक्ल 'शेखर' के गीत की पंक्ति है,
मित्र इतनी सूचना कर दो प्रसारित,
लौटकर फिर कानपुर मैं आ रहा हँ ।
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Vimlesh Chandra
Vimlesh Chandra जबलपुर में अभी तक पूरी सड़क पर अपना कब्ज़ा मानकर या समझ कर चलते थे अब कानपूर में पता लगेगा की अपनी सड़क और सरकारी सड़क कौन सी होती है।
Rashmi Sharma
Rashmi Sharma Anand manayen, mauj karen, aakhir aapka home town hai. Best wishes to you all.
Sambuddha Chatterjee
Sambuddha Chatterjee Very nicely narrated sir. Pictures were seemingly floating on my eyes as actuals!
Om Varma
Om Varma "नए लोग होंगे , नई बात होगी!"
आशा करता हूँ कि आप कानपुर के कोने कोने को जबलपुर की पुलिया की तरह गौरवान्वित करेंगे। मुझे कहीं से यह बताया गया था कि टॉप मैनेजर्स की अपने गृहनगर में पोस्टिंग नहीं की जाती। कानपुर तो आपका गृहनगर है। आपके प्रकरण में ऐसी कोई
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Gitanjali Srivastava
Gitanjali Srivastava congratulations sir for joining OPF and coming back to Kanpur.
Sunil Poddar
Sunil Poddar All the best for your new assignment
Ajay Shukla
Ajay Shukla Ghar vapis pahuchne ki bahut bahut badhai sir, Jabalpur ki puliya ke sath sath ham logo ko bhi yad rakhiyega.
Ramakant Katiyar
Ramakant Katiyar sir .... kanpur wapsi ke liye bahut bahut badhai . Jabal pur ki puliya bahut yaad aayegi.
मातृस्थान कानपुर
मातृस्थान कानपुर kampu ma kampuha ka swagat.
shukul ka kampu nava nahi hai.
hiya ki sab puliya aur kuliya majhaye pare hai.
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Kajal Kumar
Kajal Kumar चलि‍ए अच्‍छी बात है कि‍ अगली ट्रांस्‍फ़र पर आप साफ़-साफ लि‍क्‍खेंगे कि‍ बदली बदली बदली .. वैसे कानपुर का एक कि‍स्‍सा मुझे भी याद है कि‍ एक सज्‍जन ने बताया कि‍ उनका घर , काम की जगह से बहुत ही दूर था और उन्‍हें रोज़ बहुत दि‍क्‍कत होती थी, उसी वजह से उनक...See more
सुनीता सनाढ्य पाण्डेय
सुनीता सनाढ्य पाण्डेय जबलपुर और कानपुर में फर्क महसूस हो गया...
खैर...घर पहुंचने की बधाई आपको एक बार फिर...:)
Somesh Saxena
Somesh Saxena सायकल जबलपुर में ही छोड़ आये कि ले आये हैं साथ? जल्दी ही कानपूर में कोई पुलिया ढूंढी जाए। :)
Rekha Srivastava
Rekha Srivastava कट्टा अब सही जगह पहुँचा है । करिये दनादन फायर ।
Vivek Ranjan Shrivastava
Vivek Ranjan Shrivastava मेरे लिए तो आप मोबाईल में ही सदा उपस्थित है ही जरा हाथ बढ़ाया ऊँगली टच की और आप फोटो सहित अपडेटेड
संतोष त्रिवेदी
संतोष त्रिवेदी मुबारक हो कनपुरिया महौल
Anand Awasthi
Anand Awasthi Sir घर वापसी की बधाईया,चलिये अब वह किस्से पढने को मिलेगे ,जिसका हम अहसास कर सकेगे
Imran Baig
Imran Baig जबलपुर और कानपुर के ट्रैफिक और ट्रैफिक सेन्स में ज़्यादा फ़र्क़ नहीं है ।
Mahfooz Ali
Mahfooz Ali चलिए! अब फिर से मिलना हो सकेगा...
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