Tuesday, May 03, 2016

दीपा से मुलाकात

दीपा अपने रिजल्ट कार्ड, घड़ी और प्यारी मुस्कान के साथ
30 अप्रैल को वाहन निर्माणी, जबलपुर से विदा हुए। विदाई समारोह हुए। सेक्सन में और साथी अधिकारियों के साथ। तारीफ़-वारीफ हुई। अनगिनत खुशनुमा एहसासों के साथ विदा हुए। उन यादों के बारे में अलग से लिखा जाएगा। अभी तो उनमें डूब, उतरा रहे हैं। छप्प-छैया कर रहे हैं।

फैक्ट्री से विदा होने के बाद दीपा से मिलने गए। उससे वादा किया था कि दीपा को।
फर्स्ट क्लास पास हुई है दीपा
उसको साथ लेकर घड़ी खरीदवाने जाएंगे। पर देर सुबह से ही काफी हो चुकी थी इसलिए कैंटीन से 3 घड़ियां अपने हिसाब से चुनकर ले लीं। यह सोचकर कि जो पसन्द आएगी दे देंगे

दीपा के ठिकाने पर पहुंचे तो वह थी नहीं वहां। कहीं खेलने निकल गयी होगी या स्कूल से आई नहीँ पता नहीं था। पास की दुकान का एक आदमी उसको खोजकर लाया। वह स्कूल से लौटकर घर नहीं आई थी। खेल में मगन थी। रिजल्ट कार्ड हाथ में था। देखा तो फर्स्ट क्लास पास हुई है बच्ची। बी ग्रेड मिला है।

जो तीन घड़ियां दिखाई उसको उनमें सबसे कम दाम वाली पसंद की उसने। फूल पत्ती बनी हुई हैं उसमें शायद। बच्चों के लिहाज से ठीक टाइप।

दीपा की पसंद की हुई घड़ी उसको पहनाई। उसको प्यार किया और फिर आने का वादा करके चले आये।



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