Saturday, June 20, 2015

अंकल, झूला झूल ले?

आज बच्चियां मेस में झूले झूल रहीं थी। हम निकले तो हमसे पूछने लगीं -अंकल, झूला झूल ले? हमने कहा-झूल तो तुम पहले से रहे हो। अब क्या पूंछना? कोई मना करता है क्या? इस पर वे हंसने लगीं। बताया कि एक दिन एक अंकल मना कर रहे थे।

हमने उनकी झूला झूलते हुए फोटो लीं। 3 में से 2 डिलीट करवा दी बच्चों ने। जो फाइनल की उसे लगा रहे। पहले जो लिखा उनके बारे में वह भी दिखाया/पढ़ाया।

बच्चों ने क्रम वार अपनी क्लास बताई। 5,6,7,8,9,10 मतलब हर क्लास से एक। बच्चा सबसे छोटा था कक्षा 5 में। एक बच्ची ने मेस के कमरों को देखकर पूछा-अंकल क्या यहां स्कूल खुलेगा? हमने कहा-नहीं, यहां हम लोग रहते हैं।

पुलिया पर कुछ लोग बैठे थे। निकले तो बतियाने लगे। इनमें से एक ओझा जी पुलिस से रिटायर्ड हैं। बताये कि उनको 2001 में उनकी रिटायर होने की उम्र के 9 साल पहले रिटायर कर दिया गया था। फिर बाद में केस लड़े और पूरा 9 साल का पैसा प्रमोशन सहित मिला। 9 लाख। उससे वो अपनी एकलौती बेटी की शादी कर दिये। बोले-अच्छा ही हुआ जो हुआ वरना हम बेटी के लिए दहेज कहां से जोड़ पाते। बलिया जिला के हैं ओझा जी तो बात का खात्मा 'बलिया जिला घर बा त कउन बात के डर बा 'के शाश्वत सम्वाद से हुआ।

फिर से परसाई जी का डायलॉग याद आया-'हमारे देश की आधी ताकत लड़कियों की शादी में जा रही है।' ओझा जी को जो पैसा मिला वह दूल्हा खरीदने में खर्च हो गया।

बात करते हुए सामने से मिश्र जी मास्टर साहब आते दिखे। बात करते हुए बताया कि वे आज आएंगे शाम मुझसे मिलने। कविताएँ सुनाएंगे। इस बीच रोहिनी भी आ गयीं गेट नम्बर 1 से वाक करके। मिश्र जी से नमस्ते की तो बोले-इस बिटिया की तस्वीर हमारे कम्प्यूटर में फिट है। बहुत तेज टहलती है। रोहिनी का कल नेट का इम्तहान है। भोपाल में। इटारसी में ट्रैफिक सिग्नल कण्ट्रोल रूम जल जाने से तमाम गाड़ियां निरस्त हैं। इम्तहान के लिए जाएँ कि न जाएँ यह दुविधा है। अगर गयी तो परीक्षा के लिए रोहनी को शुभकामनायें।


व्हीकल मोड़ तक गए आज। पंकज की चाय की दुकान पर चाय पी। एक लड़का अपने दोस्तों से बतिया रहा था। कह रहा था- 'साले,तुम लोग जब चाय पीते हो तो हमारे दिल पर कैसी गुजरती है तुम नहीं जानते। हम डायबिटीज के चलते चाय पी नहीं पाते। तुम मजे करते हो।'

अख़बार में एक खबर के अनुसार एक आदिवासी ने अपनी पत्नी, बेटी और एक बेटे के साथ सिचाई विभाग के डैम में कूदकर जान दे दी। परिवार का कोई सदस्य भाग न सके इसलिए उसने सभी को अपने साथ रस्सी से बाँध लिया था। हालांकि बड़ा बेटा खुद को किसी तरह बचाकर भाग निकला।

पता चला कि अधेड़ ने यह आत्मघाती कदम अविवाहित बेटी के गर्भवती होने और प्रेमी द्वारा शादी से इनकार करने पर उठाया। लड़की के गर्भवती होने की बात पता चलने पर दोनों के परिजनों ने उनकी शादी कराने की तैयारी की लेकिन लड़के ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि उसके लड़की के साथ कोई सम्बन्ध नहीं हैं। इसके बाद यह आत्मघात हुआ।

कायर प्रेमियों की कड़ी में एक नाम और जुड़ा। समाज की मान्यताओं के चलते 4 जिंदगियां हलाक हुईं।
काश कोई समझा पाता उस पिता को कि जिंदगी से अमूल्य कोई चीज नहीं होती। लेकिन कौन समझाता? चरित्र के मामले में हमारा तो पूरा का पूरा समाज स्त्री विरोधी है। मर्यादा पुरुषोत्तम तक ने पत्नी को त्याग दिया। 'कूद पड़ी जहां हजारों पद्मिनियां अंगारों पर' गाते हुए हम सती प्रथा को महिमामण्डित करते हैं। कभी-कभी लगता है कि अगर ये पद्मिनियां आग में कूद कर मरने की बजाय साथ में लड़ी होतीं तो शायद अपना इतिहास कुछ और होता।

जीवन से अमूल्य और कुछ नहीं होता।

एक तरफ बिहार पूरे देश में नकल के चलते बदनाम है। दूसरी तरफ बिहार के ही आनन्द हैं जिनके ग्रुप सुपर 30 के बच्चे हर साल आईआईटी में सेलेक्ट होते हैं। सुपर 30 की ही तरह बिहार के मधुबनी के नवीन मिश्र जो कि दिल्ली आईआईटी से साफ्टवेयर इंजीनियर हैं ने नौकरी छोड़कर रेवाड़ी में 'विकल्प' संस्था में बच्चों की पढ़ाना शुरू किया। 2014 में 45 में 1 बच्चा सेलेक्ट हुआ। लेकिन नवीन ने हौसला नहीं छोड़ा और नौकरी छोड़कर पूरी तरह समर्पित हुए और इस बार 18 में से 15 बच्चे आईआईटी जेईई एडवांस में सफल हुए। नवीन के हौसले को सलाम।

काश कोई 'सुपर 30' कोई 'विकल्प' जैसी संस्था सामजिक जीवन में लिए भी लोगों को तैयार करती।

आठ बजने वाले हैं। आप मजे कीजिये। हम चलते हैं दफ्तर।

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