Sunday, June 21, 2015

योग किसके लिए

अनूप शुक्ल की फ़ोटो.आज योग दिवस के मौके पर गन कैरिज फैक्ट्री स्थित पाट बाबा मन्दिर के हाल में योग शिविर का आयोजन हुआ। मन्दिर में आयोजन मतलब गैर हिन्दू गैर इरादतन ही छंट गए। ऐसे आयोजनों में धार्मिक प्रतीक खर पतवार की तरह होते हैं।



योग का 33 मिनट का प्रोटोकाल पॅकेज है। देखकर किया जा सकता है। मकरासन में पेट के बल जमीन पर लेटते समय लगा कि इसका नाम 'बॉस आसान' होना चाहिए। बॉस के सामने पड़ते ही इस आसन को करने से मनचाही सुविधा का फल मिल सकता है।

भ्रामरी प्राणायाम में कान, आँख, नाक और मुंह को बन्द करके अपनी आवाज अपने ही अंदर महसूस करना बताया गया। जब कभी अभिव्यक्ति पर पूरी पाबंदी हो तो लोग कह सकते हैं अभिव्यक्ति भ्रामरी प्राणायाम कर रही है।

हमारे डॉ काशी नाथ पाण्डेय जी ने योग सत्र का सञ्चालन किया। योग करना सिखाया। हम फुल पैन्ट पहनकर गये थे। जब एक पैर के पंजे को दूसरे पैर के घुटने पर रखकर वृक्षासन कर रहे थे तो पैन्ट टेरीलिन की होने के कारण पंजा बार-बार सरक जा रहा था। इससे लगा कि या तो पैन्ट सूती या हाफपैंट होने पर ही वृक्षासन सधेगा। कम खर्चे की बात कहकर हाफपैन्टिया बनना ही सुविधाजनक साबित करेंगे लोग। क्या पता आगे चलकर कोई लेखक अपने किसी पात्र की सुंदरता का वर्णन करते हुए लिखे- उसकी टाँगे इतनी चिकनी हैं कि उससे वृक्षासन तक नहीं सधता।

नमस्ते के बारे में पता चला कि सिंधुघाटी सभ्यता से चला आ रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता खत्म हो गयी लेकिन नमस्ते चूँकि विनम्रता और सबसे जुड़ाव का प्रतीक है सो अभी तक बचा है। किसी भी बात पर ऐँठने वालों को यह समझना होगा कि लम्बे समय तक बचे रहने के लिए विनम्र रहना और सबसे जुड़ाव बहुत जरुरी है।
योग सत्र के बाद चाय नास्ता हुआ। चाय बहूत अच्छी थी। हम दो बार पिए। योग करके अच्छा लगा। बहुत से आसान सधे नहीं लेकिन आज के अखबार में सब आसान की फोटो बनी है इसलिए देखकर किये जा सकते हैं।
आज योग का जिस तरह धड़ल्ले से हल्ला मचा उससे 'स्वच्छ भारत अभियान' के हल्ले की याद आ गयी। 6 महीने में स्वच्छ भारत अभियान साफ़ हो गया। योग दिवस के बहाने शुरू हुए अभियान का क्या बनेगा यह आने वाला समय बताएगा।

क्या पता आने वाले समय में हर संस्था में हिंदी अधिकारी की तर्ज पर योग अधिकारी की तैनाती होने लगे। फिर जिस तरह हिंदी की हिन्दी हुई क्या पता योग का भी कुछ वैसा ही संयोग बने।

संस्थाओं में योग को मान्यता मिलने क्या सीन बनेंगे इसकी कल्पनायें अलग से लेकिन कोई कर्मचारी सोता पाया गया तो कहेगा-साहब हम तो शवासन कर रहे थे। कोई हल्ला मचाते हुए पकड़ा गया तो बोलेगा-साहब, अपन के इधर कपाल भाति ऐसेइच होती है।गर्दन हिलाकर काम से मना करने वाला गर्दन चालन क्रिया करने की बात से बच जायेगा।

लौटते हुए सोच रहा था कि योग किसके लिए है। जिन लोगों के खाने-पीने के जुगाड़ हैं उनके लिये तो योग स्वस्थ रहने के लिए अच्छा उपाय है। लेकिन जिनके लिए रोटी बड़ा सवाल है। तन और मन मिलाये रखने की जद्दोजहद में ही जिनका जीवन खप जाता है वो किस समय योग करेंगे? हिकमत अली जो अपनी ढोलक बेंचने के लिए सुबह निकलता है और सड़क पर दौड़ते लोगों को देखते हुए पूछता है कि ये लोग भाग क्यों रहे हैं वह कहीं लोगों को कपाल भाती करते देखकर पूंछेगा- ये लोग पेट फुला-पचका क्यों रहे हैं?

जब सुबह जा रहे थे तब तीन महिलाएं हाथ में कुल्हाड़ी लिए जंगल की तरफ लकड़ी काटने जा रहीं थीं। पाट बाबा के मंदिर के गेट पर पहुंचकर उन्होंने कुल्हाड़ी सड़क पर रखी और करीब 200 मीटर की दूरी से सड़क को छूकर पाट बाबा को प्रणाम किया और काम पर निकल गयीं। योग भले ही अंतरराष्ट्रीय हो जाए लेकिन दुनिया की बहुत बड़ी आबादी के लिए योग करके स्वस्थ रहने से कहीँ ज्यादा अहम है जिन्दा रहने के लिए रोटी का इंतजाम करना। अखबारों भले ही रोज 'सर्वे भवन्ति सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया' के विज्ञापनों से पटे रहें लेकिन ये लोग योग शिविर को दूर से ही नमस्ते करके ऐसे ही काम पर जाते रहेंगे जैसे सुबह पाट बाबा को प्रणाम करके वे महिलाएं चलीं गयीं। चिंता की बात यही है कि पूरी दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ने की आशंकाएं बढ़ रहीं हैं।

जीसीएफ मोड़ के पास सोनी महोबिया मिले। 13 साल से पेड़ के नीचे दूकान लगाते हैं। 10 बजे तक खुद लगाते हैं उसके बाद वो एक दूकान पर काम करने चले जाते हैं। फिर पिता सम्भालते हैं दूकान। पता बताते हैं कि दुकान का सब जानते हैं-नीम के पेड़ के नीचे की दूकान। पेड़ के तने पर की गांठें उसके बुजर्ग होने की कहानी कह रहे थे।

आज इतवार है। मजे कीजिये। जो होगा देखा जाएगा।

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