Saturday, June 13, 2015

हंसने वाले को लोग 'डिफॉल्टर' समझते हैं

प्रकाश चन्द्र राठौर
कल शाम को कुछ बूंदा-बांदी हुई। सबेरे मौसम खुशगवार था। हमारे शब्दों में कहें तो आशिकाना। हमसे जब भी कोई पूछता है कि जबलपुर के मौसम कैसा है? हम हमेशा कहते हैं-आशिकाना।

वैसे भी मौसम तो मन के मिजाज के हिसाब से होता है। रमानाथ अवस्थी की कविता के हिसाब से:
कुछ कर गुजरने के लिए
मौसम नहीं मन चाहिए।
सूरज अब्बी निकला नहीं था। सुबह की नींद मार रहा होगा। उठेगा अभी कुनमुनाते हुए। देर होने की बात याद आते हड़बड़ाते हुए आएगा और आसमान पर चमकने लगेगा।

चाय की दूकान पर आज प्रकाश चन्द्र राठौर मिले। टेलरिंग का काम करते थे। आँख से कम दिखने लगा तो सिलाई छोड़ दी। अब एक फर्म में चौकीदारी करते हैं।


चाय की दुकान पर अड्डेबाजी
सिलाई का काम खुद सीखा। शौक से।दुकान का नाम रखा 'एवरग्रीस टेलर्स' । हर तरह के कपड़े सिलते थे।पत्नी को भी सिलाई सिखाई। बोले-हमसे ज्यादा काम किया मिसेज ने। अब भी करती हैं वो। हम पैटर्न काटकर दे देते थे। वो सिलाई करती थी।

पिता जीसीएफ में काम करते थे। आगरा से आये थे नौकरी करने। बड़े हिसाब से रहे। चार बच्चों को पाल पोस कर बड़ा किया।

प्रकाश चन्द्र के दो बच्चे सिलाई का काम करते हैं। दूकान का नाम हटा दिया है लेकिन लोग लोग एवरग्रीस के नाम से ही जानते हैं। एक बच्चा पत्रिका अखबार में काम करता है। बच्चे चौकीदारी करने को मना करते हैं लेकिन वो करते हैं। कुछ न कुछ करते रहना चाहिए।

फोटो खींचने पर हमने हंसने के लिए कहा तो हंसे। बोले-'अच्छी आई है फ़ोटो।' हमने कहा बनवाकर देंगे। बोले-'बत्तीसी घर पर है। लगाते नहीं।' मतलब अगले को एहसास है कि बत्तीसी होती तो फोटो और अच्छी आती।

चाय पीते हुए बात हुई। बोले-आपने कहा हंसने को तो हम हंसे। वैसे हम हंसते बहुत कम हैं। लोग पागल समझते हैं। हंसने वाले को लोग 'डिफॉल्टर' समझते हैं। हम भी कहते हैं कि अगर हमको पागल समझने से तुमको ख़ुशी मिलती है तो समझ लो पागल और खुश हो लो। लोग हमको बेवकूफ समझते हैं हम भी एतराज नहीं कहते। जो हम हैं वो तो हम जानते हैं।


वीएफजे सबसे बाएं और जीआईएफ दाईं तरफ के तीन कर्मचारी
बीड़ी पीने की बात चली। नुकसान की चर्चा भी। हमसे बोले प्रकाश -आज से आप हमको बीड़ी पीते हुए नहीं देखोगे। धीरे-धीरे कम करके बन्द कर देंगे। लेकिन आप के सामने कभी नहीं पिएंगे।

लौटते में पुलिया पर फैक्ट्री के रिटायर्ड कमर्चारी मिले। एक वीएफजे के और 3 जी आई ऍफ़ के। हमने जीआईएफ के रिटायर्ड महाप्रबन्धक एस.के.सक्सेना के बारे में बातें की। सक्सेना जी हमारे भी जीएम रहे शाहजहाँपुर में। मैं और हमारे तमाम साथी मानते हैं कि उनके जैसा सक्षम और व्यवहार कुशल महाप्रबन्धक हमने दूसरा नहीं देखा। मानव सम्बंधों की ऐसी अद्भुत समझ थी उनमें कि हर अधीनस्थ खुद को उनका ख़ास आदमी समझता था। वे सबका ख्याल रखते भी थे।

जीआईएफ के रिटायर्ड कर्मियों ने बताया कि सक्सेना जी बहुत अच्छे जीएम थे। राउंड में आते तो लोगों के साथ चाय भी पी लेते। सबको साथ लेकर चलते थे। कभी उत्तेजित नहीं होते थे।लेकिन अनुशासनहीन लोगों के खिलाफ करवाई करने में हिचकते नहीं थे। कई लोगों को सस्पेंड किया।

1996 में रिटायर हुए सक्सेना जी की इतनी बात हुई तो वहीं से उनको फोन मिलाया। बताया कि लोग आपको कैसे याद करते हैं। लोगों ने बात की। तमाम यादें साझा की। 20 साल पहले रिटायर हुए अधिकारी को लोग याद करें और अच्छे इंसान के रूप में याद करें यह अपने में एक खुशनुमा एहसास है।

आज शनिवार है। कई लोगों का वीक एन्ड शुरू हो गया होगा। उनको वीक एन्ड मुबारक।

आपका दिन मङ्गलमय हो। शुभ हो।

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