शोले फ़िल्म का डायलॉग -‘ अरे ओ सांभा, कितने आदमी थे?’
सबसे ज़्यादा दोहराये जाने वाले संवादों में से एक है। बदलते समय और जरूरत के अनुसार इसे लोग अपने हिसाब से बदल लेते हैं। जिस हिसाब से जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त होती है उसमे कोई गब्बर पूछता होगा -‘ कितने सांसद/विधायक थे (बिकने के लिए)’
यह डायलॉग कल एक नए रूप में दिखा। सड़क किनारे इडली बेचने वाले के बोर्ड में लिखा था -‘ अरे ओ सांभर, कितनी इडली थी।’
इस तरह के डायलॉगबाजी आज आम है। हर जगह लोगों की/सामान की/नोटों की गिनती हो रही है। उसी में चोरी भी चल रही है। लेकिन हम चोरी के बारे में कुछ न कहेंगे। उसकी जांच चल रही है। न जाने कब तक चलेगी। असलियत जाँच को भी नहीं पता।

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