मंगलवार को हमारा स्वीमिंग पूल बंद रहता है। पिछले मंगल को पास के ही स्वीमिंग पूल गए थे। आज दूसरे स्वीमिंग पूल गए। स्प्लैस स्विमिंग अकादमी। फ़ोटो में इंडोर पूल लग रहा था। लेकिन गए तो देखा ओपन पूल है। ऊपर कपड़े का कवर था। लेकिन आसमान दिख रहा था।
पूल छुटका सा था। ढाई फीट गहराई से शुरू करके साढ़े चार फीट पर खत्म। हम जिस पूल में नियमित जाते हैं वहाँ गहराई साढ़े चार फीट से शुरू होती है। साइज में भी छोटा। सात मीटर चौड़ा बारह मीटर लंबा। जबकि हमारे पूल की चौड़ाई पच्चीस मीटर है।
आठ-दस लोग ही थे पूल में। हम सबसे गहरे इलाके में जाकर तैरने लगे। कोच बालक अभिषेक सबको व्यक्तिगत तौर पर सिखा रहा था।
कुछ देर तैरने के बाद हमने उससे पूछा तो उसने हाथ और पैर के मूवमेंट ठीक किए। बताया कि ब्रेस्ट स्ट्रोक में हाथ पानी के अंदर ही रखिए। पैर के मूवमेंट करके और करा के बताये। यह सब हमको पता था। लेकिन करते समय गड़बड़ा जाते थे। आज अभिषेक ने कराया। हमने किया भी। लगा कि हमारे कोच हमको दूर से ट्रेनिंग देते हैं। सलाह फेंक के मारते हैं। यहाँ व्यक्तिगत तौर पर सीख मिल रही है।
अभिषेक के सिखाये तरीके से तैरने में लगा कि यही सही तरीका है। तैराकी के एक वीडियो में बताया गया था -‘ तैरते समय पानी हाथ और पैरों को महसूस होना चाहिए।’ आज हुआ ऐसा।
हमें यह भी लगा कि तैराकी की शुरुआत किसी छोटे पूल से करनी चाहिए। जहाँ आपकी कमियों को व्यक्तिगत तौर पर बताने और दूर करने वाला कोच मौजूद हो।
देखते-देखते एक घंटा हो गया। बाहर निकलने का संकेत हो गया। घंटे भर के यहाँ दो सौ रुपये होते हैं। हमने सोचा कि एक घंटा और तैरना सीख लिया जाये। पूल वाले ने कहा ठीक है। पैसे अगले घंटे के डेढ़ सौ रुपये और तय हुए। हम वापस पूल में उतर गए। तैरते रहे, सीखते रहे।
दो घंटे बाद निकले पूल से। इसके बाद पूल बंद हो जाता है। पूल मैनेजर भी वहाँ आ गई। उन्होंने मेरे स्टेप्स देखे थे। सलाह दी कि आप हाथ और पैर एक साथ चलाते हैं। हाथ के बाद पैर चलाइए। हमने इस बात को , जो हमें वीडियो देखने के चलते पता थी, नोट कर ली। महिला मैंनेजर ने भुगतान लेते समय केवल सौ रुपये और लिए। मतलब दो घंटे के तीन सौ रुपए।
जिस मैनेजर से दूसरे घंटे के ढेढ़ सौ रुपए तय हुए थे वह जा चुका था। पचास रुपये बचे।
चलते समय पूल चलाने के खर्च की जानकारी देते हुए महिला मैनेजर ने बताया कि पूल का बिजली का बिल ही तीस हज़ार रुपया महीना आता है। डेढ़ से दो लाख लग जाता है इसे चलाने में हर महीना।
हम खर्च के बारे में क्या कहते? अपने तीन सौ रुपए में मिले अनुभव को समेट के घर चले आए।

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