Tuesday, July 28, 2026

तुम हमारा चालान करोगे, हम तुम्हारी बिजली काटेंगे

 


कुछ ऐसा ही हुआ कल लखनऊ में। बिजली विभाग में कार्यरत एक संविदा कर्मी बिना हेलमेट बाइक चला रहा था। दारोग़ा जी ने पकड़ लिया। छह हज़ार रुपए का चालान ठोंक दिया। बिजली कर्मी दफ्तर पहुंचा। पुलिस थाने की फ़ाइल खंगाली। पुलिस थाने पर बिजली का बिल बकाया था। बिजली बिल बकाये का हवाला देते हुए संविदा कर्मियों ने एक थाने और दो चौकियों की बिजली काट दी। बेचारे पुलिस वाले शाम छह बजे से रात नौ बजे तक अंधेरे में बैठे रहे। थाने में हड़कंप मच गया।

संविदा कर्मी ने अपना फ़ोन बंद कर दिया था। उससे संपर्क नहीं हो पाया। दूसरी टीम को भेजा गया बिजली बहाली के लिए। साढ़े तीन घंटे बाद बिजली बहाल हुई थाने और चौकियों की।
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता ने कहा -' पुलिस ने संविदाकर्मी का चालान काटा है तो पुलिस थाने-चौकी की बिजली काटना ग़लत है।जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट पर कार्रवाई होगी।'
बिना हेलमेट बाइक चलाने पर एक हज़ार रुपए (1000/- + छह महीने तक लाइसेंस निरस्त करना ) जुर्माने का प्रविधान है। दारोग़ा जी ने छह हज़ार का चालान कैसे काटा यह बात अख़बार में नहीं लिखी है। शायद उनको पता न हो कि चालान कितने का कटता है। यह भी हो सकता है कि जितने का चालान वे काटेंगे वही सही है। ( यह जानकारी इंटरनेट के अनुसार है। हो सकता है चालान के रेट बढ़े हों)
उत्तर भारत के शहरों में बिना हेलमेट के बाइक चलाना आम बात है। संविदा कर्मी की मासिक तनख्वाह दस हज़ार से सोलह हज़ार के बीच होती है। ऐसे में छह हजार का जुर्माना ऐसी गलती के लिए , जिसका चलना लगभग आम है, संविदा कर्मी को अखर गया होगा। उसने थाने और चौकियों की बिजली बकाये के नाम पर उड़ा दी।
पिछले दिनों स्वीमिंग से लौटकर आते समय एक बिजली संविदा कर्मी को हमने कार में लिफ्ट दी थी। पोस्ट लिखी थी। Amit ने सलाह दी थी -' बढ़िया किया। लाइनमैन से बनाकर रखना चाहिए। यही काम आते हैं। ऐसा हुआ भी। एक दिन बिजली की समस्या हुई। बिजलीघर गए। बताया तो लाइनमैन फौरन सीढ़ी लेकर घर पहुंच गए थे।

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