अभी शाहजहांपुर से एक मित्र से संदेश वार्ता हुई। टेलर हैं वहाँ । उसने बताया -‘ अभी ख़्वाब में देखा आपको। हम और आप साथ में चाय पी रहे हैं मन्दिर के पास की चाय की दुकान में।’
हमने कहा-‘ चाय वाला अभी पेमेंट माँगेगा तुमसे। बिना पैसे दिए निकल लिए हम लोग।’
उसने कहा -‘ लिया ही नहीं उसने आपसे पैसा। वो आपको जानता है।’
हमने सोचा ये तो लफड़ा हुआ। एक को सपना आया। दो लोगों ने चाय पी। दूसरे को सपना आया नहीं। उसने चाय भी नहीं पी । उससे पैसे भी नहीं लिए। पता नहीं इसका हिसाब कैसे होगा ?’
इसके बाद फ़ोन पर बातचीत भी हुई। दोस्त ने यह भी बताया -‘ चाय बनाने में देर हो रही थी चाय वाले से तो आपने कहा -‘ हटो हम बनाते हैं चाय।’
मतलब हम लखनऊ में और शाहजहांपुर में हमने सपने में ये सब कर डाला। चाय वाले को चाय बनाना सिखा रहे हैं। यह तो ऐसे ही जैसे कोई चाय वाला गणितज्ञों को (a+b) स्क्वायर में एक्स्ट्रा टू एबी निकाल कर दिखा दे। गणितज्ञ बेचारे -‘ सही पकड़े हैं साहब ‘ कहकर भौंचक्के रह जाएँ।
हमारे बारे में देखे दूसरे के द्वारा देखे गए इस सपने का क्या मतलब हो सकता है? चाय वाले दुकानदार ने भी यह सपना देखा होगा ? क्या हमारी उस पर देनदारी बनती है?

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