Friday, September 12, 2014

सोलह बरस की बाली उमर को सलाम


आज दोपहर को पुलिया पर चरवाहा जी मिले। बकरियां दूर चर रहीं थीं। सामने की ’बुर्जुआ पुलिया’ के पास ट्रैक्टर में रोड़ी, पत्थर, मौरम लदे थे। हमें लगा कि शायद कुछ काम-धाम होना है पुलिया पर। चरवाहे भाई ने बताया कि यहां सड़क पर ’उछलने वाला’ बना रहे हैं। हमने सोचा कि ये उछलने वाला या उचकने वाला क्या बन रहा है सड़क पर! पता चला ’स्पीड ब्रेकर’ बन रहा है।

साथ वाले भाईजी के मोबाइल में गाना बज रहा था- "सोलह बरस की बाली उमर को सलाम"

अब वहां कोई सोलह बरस का तो मौजूद नहीं था। समझ लिया जाये कि गाना खास पाठक के लिये बज रहा था- "सोलह बरस की बाली उमर को सलाम" 


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