Friday, September 26, 2014

दस रूपये का नोट ये ये बड़ा होता था

 कल दफ्तर से लौटते हुए पुलिया पर छोटेलाल से मुलाक़ात हुई।15 साल पहले रिटायर हुए लोहार के पद से। वीएफजे से ही।उमर बताई साठ साल। फिर 15 साल पहले कैसे रिटायर हो गये? हमने पूछा तो बताया- "अरे हम कौन पढ़े लिखे थे।लेबर में भरती हुए थे। भरती के टाइम जो लिखा गयी उसी से रिटायर हो गये।" 

हमें अपने भूतपूर्व सेनाध्यक्ष का किस्सा याद आ गया। एक साल की उमर के चक्कर में कई साल अदालतबाजी की। यहाँ छोटेलाल 15 साल पहले रिटायर होकर पुलिया पर कलकत्ता छाप बीड़ी फूंक रहे हैं। 12 बीडी का बण्डल 5 रूपये का  आता है।"

बीडी काहे पीते हो इस बचकाने सवाल पर बोले-"क्या करें साहेब? गर्म काम करते थे। भट्टी के पास।पीने लगे। आदत पड़ गयी। पहले कई बण्डल प़ीते थे। अब आप जैसे लोगों के टोकने से एक ही पीते हैं।

मप्र के सीधी जिले के मूल निवासी छोटेलाल अपने पुराने दिनों में टहलने लगे-"जब आये थे जबलपुर तो नंगे घुमते थे। एक रूपये की जमीन भी कोई लेता नहीं था यहाँ। उस समय दस रूपये का नोट ये ये बड़ा होता था (हाथ से इशारा करके बताया हथेली से कुछ बड़ा ही)! आज का दस का नोट उस नोट के सामने क्या है?" आज का दस का नोट देख लेता छोटेलाल को पुराने दस के नोट के बारे में बताते हुए तो मारे शर्म के लाल हो जाता।

पन्द्रह साल पहले रिटायर हुए छोटेलाल की पत्नी फैक्ट्री स्कूल में काम करती हैं। जीएम साहब के घर काम करती थी।मैडम ने लगवा दिया स्कूल में। वहीं  काम करती है। एक लड़का एक लडकी है। दोनों की शादी कर दी। मजे में हैं। छह भाई थे छोटेलाल।अब दो बचे हैं।

मेस के पीछे सर्वेंट क्वार्टर में रहने वाले छोटेलाल पास के एटीएम को रोज रात को बंद करने जाते हैं। सुबह खोल देते हैं।5 बजे। हजार रूपये मिलते हैं शटर खोलने बंद करने के। क्या बुरा है? छह हजार पेंशन मिलती है। बीबी भी कमाती है। बहुत है काम भर का।

पुलिया पर अँधेरा होने के चलते फोटो साफ़ नहीं आया। पास के लैम्पपोस्ट के पास लिया। हाथ में संटी टाइप लिए फोटो खिंचाते छोटेलाल को देखकर लग रहा था कि बस 'जन गण मन' शुरू ही होने वाला है। फोटो देखकर बोले खुश हुए छोटेलाल। फिर तय हुआ कि कभी दिन में खिंचायेंगे फोटो।
कल दफ्तर से लौटते हुए पुलिया पर छोटेलाल से मुलाक़ात हुई।15 साल पहले रिटायर हुए लोहार के पद से। वीएफजे से ही।उमर बताई साठ साल। फिर 15 साल पहले कैसे रिटायर हो गये? हमने पूछा तो बताया- "अरे हम कौन पढ़े लिखे थे।लेबर में भरती हुए थे। भरती के टाइम जो लिखा गयी उसी से रिटायर हो गये।"
हमें अपने भूतपूर्व सेनाध्यक्ष का किस्सा याद आ गया। एक साल की उमर के चक्कर में कई साल अदालतबाजी की। यहाँ छोटेलाल 15 साल पहले रिटायर होकर पुलिया पर कलकत्ता छाप बीड़ी फूंक रहे हैं। 12 बीडी का बण्डल 5 रूपये का आता है।"

बीडी काहे पीते हो इस बचकाने सवाल पर बोले-"क्या करें साहेब? गर्म काम करते थे। भट्टी के पास।पीने लगे। आदत पड़ गयी। पहले कई बण्डल प़ीते थे। अब आप जैसे लोगों के टोकने से एक ही पीते हैं।

मप्र के सीधी जिले के मूल निवासी छोटेलाल अपने पुराने दिनों में टहलने लगे-"जब आये थे जबलपुर तो नंगे घुमते थे। एक रूपये की जमीन भी कोई लेता नहीं था यहाँ। उस समय दस रूपये का नोट ये ये बड़ा होता था (हाथ से इशारा करके बताया हथेली से कुछ बड़ा ही)! आज का दस का नोट उस नोट के सामने क्या है?" आज का दस का नोट देख लेता छोटेलाल को पुराने दस के नोट के बारे में बताते हुए तो मारे शर्म के लाल हो जाता।

पन्द्रह साल पहले रिटायर हुए छोटेलाल की पत्नी फैक्ट्री स्कूल में काम करती हैं। जीएम साहब के घर काम करती थी।मैडम ने लगवा दिया स्कूल में। वहीं काम करती है। एक लड़का एक लडकी है। दोनों की शादी कर दी। मजे में हैं। छह भाई थे छोटेलाल।अब दो बचे हैं।

मेस के पीछे सर्वेंट क्वार्टर में रहने वाले छोटेलाल पास के एटीएम को रोज रात को बंद करने जाते हैं। सुबह खोल देते हैं।5 बजे। हजार रूपये मिलते हैं शटर खोलने बंद करने के। क्या बुरा है? छह हजार पेंशन मिलती है। बीबी भी कमाती है। बहुत है काम भर का।

पुलिया पर अँधेरा होने के चलते फोटो साफ़ नहीं आया। पास के लैम्पपोस्ट के पास लिया। हाथ में संटी टाइप लिए फोटो खिंचाते छोटेलाल को देखकर लग रहा था कि बस 'जन गण मन' शुरू ही होने वाला है। फोटो देखकर बोले खुश हुए छोटेलाल। फिर तय हुआ कि कभी दिन में खिंचायेंगे फोटो।

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