Thursday, September 04, 2014

फ़ुरसतिया फ़िर लौटे ब्लॉगर पर

पिछले दिनों अपनी hindini.com/fursatiya की पोस्टें उठा-उठाकर fursatiya.blogspot.in पर डालता रहा। कल  पूरा हुआ काम। इस दौरान सब पुरानी पोस्टें देखी। कैसी-कैसी तो पोस्टें लिख चुके हैं। एक से एक झेलाऊ। ऊबाऊ। लोगों ने न सिर्फ़ झेला बल्कि वाह-वाह भी की। पाठक भी लेखक को झांसे में  रखता है कि वह बहुत अच्छा लिख रहा है। हिन्दी का तमाम कूडा लेखन पाठक की सहज उदारता के चलते है।

हजार के ऊपर की पोस्टें हो गयीं ब्लॉग में। ब्लॉगर में लेबल की सुविधा के चलते विषयवार पोस्टें रखी जा सकती हैं।  पुलिया  पर 87 पोस्टें और  सूरज भाई  पर 44 पोस्टें हैं! पुरानी पोस्टें खोजने पर सूरज भाई पर 50 जल्द ही हो जायेगा।

कुछ पुरानी पोस्टें देखकर मन उदास हो गया। उनकी फोटों ऐसे गायब हो गयी हैं जैसे सरकारी मकान खाली करते समय लोग घर के पेलमेट, नल , टोंटी उखाड के ले जाते हैं। पता नहीं कैसे ’नेट दीमक’ ने सब फोटो कुतर डालीं। जहां फ़ोटुयें थीं वहां खाली जगह दिख रही है। जैसे किसी की आंख निकाल ले कोई और सिर्फ़ कोटर दिखे। लेकिन कोई नहीं। फ़िर से सजाया जायेगा ब्लॉग। कहते भी हैं न -सब कुछ लुट जाने के बाद भी भविष्य बचा रहता है।

पोस्ट संख्या बढाने के लालच में फ़ेसबुक की तमाम पोस्टों को ब्लॉग पर मय कमेंट पोस्ट कर दिया गया है। हिन्दिनी/फ़ुरसतिया की पोस्टों को भी मय टिप्पणी पोस्ट कर दिया गया है। कमेंट को उठाकर डालने की और कोई जुगत समझ नहीं आयी।

पुरानी पोस्टों को खोजने का तरीका तमाम भाई लोग जानते होंगे। हमें जो तरीका बजरिये रविरतलामी पता है वह यह है कि  http://web.archive.org/web/*/http://hindini.com/fursatiya पर जाकर  पुरानी पोस्टें देख लिये। आपको भी अपना ब्लॉग देखना है कि पहले कैसा था, क्या बदलाव किये आपने, कोई पोस्ट खो गयी है तो इस लिंक में जाकर hindini.com/fursatiya की जगह अपने ब्लॉग का पता लिखिये। तमाम पुरानी पोस्टें मिल जायेंगी। मैंने इसी तरह अपनी पोस्टें खोजीं जो अन्यथा कहीं दिख नहीं रहीं थीं। खोये ब्लॉग पर मेरे हाल तो मियां मुशर्रफ़ सरीखे थे जो जिस देश में हुकूमत करते थें वहां अपनी मर्जी से घूम भी नहीं सकते। मैं भी जिस ब्लॉग का लेखक था वहां प्रवेश तक करने से मरहूम था।

जैसे ही मैंने अपने ब्लॉग के ब्लॉगर पर लौटने की सूचना दी तो कोरियन भतीजे सतीश चन्द्र सत्यार्थी ने fursatiya.com डोमेन खरीद कर हमको टिका दिया। बोले :
आपके लिए एक छोटा सा गिफ्ट है fursatiya.com डोमेन यह नाम आपका ट्रेड मार्क हो गया है और डोमेन उपलब्ध था इसलिए सोचा कि आपके लिए बुक कर लिया जाये. फ़िलहाल डोमेन को ऑटोमेटिक आपके ब्लागस्पाट वाले ब्लॉग पर फॉरवर्ड कर दिया है. मतलब कोई fursatiya.com टाइप करेगा तो आपके ब्लॉग तक पहुँच जायेगा..

तो  अब भतीजे दोस्त ने जबरियन हमको फ़ुरसतिया. कॉम पर ठेल दिया- आओ चचा बाजार में। देखते हैं आगे क्या होता है। तो आप टाइप करके देखिये fursatiya.com और बताइये कि पहुंचते हैं कि नहीं अपन के ब्लॉग पर।

इस बीच फ़ेसबुक पर ज्यादा व्यस्त रहे। बहुत समय खोटी किया। आगे भी ऐसा नहीं कि करेंगे नहीं लेकिन ब्लॉग नियमित लिखेंगे।

इस बीच पुरानी पोस्टों को भी धो, पोंछकर चमकाने का काम करते रहेंगे। ब्लॉग पर क्रीम पाउडर लगाकर इसे आकर्षक बनाने की कसरत भी करेंगे।

इत्ता बताते हुये अपना हाथ साफ़ कर लिया आज थोड़ा लिखने में।अब बकिया फ़िर। आप मजे करो। न कुछ समझ में आये तो टिपियाओ!


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5 comments:

  1. लिखने के लिए ऊर्जा पाठक से ही मिलती हैं ..आपने पुरानी पोस्ट प्राप्ति के लिए बढ़िया जानकारी दी इसके लिए धन्यवाद ..
    .ब्लोगर पर आपका हार्दिक स्वागत है ..

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  2. कल 07/सितंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  3. झाँसा बना रहे क्या बुरा है :)
    सुंदर पोस्ट ।

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  4. fursatiya.com के माध्यम से यहाँ तक आये हैं, कृप्या प्रसन्न हो लिजिये. :)

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  5. बहुत बढ़िया। जो लोग हमको अब अपने ब्लोग के बदले वेबसाइट बनाने को बोलेगा, उनको आपका ये वाला पोस्ट पढ़वा देंगे :) हम तो रेगुलर ग्राहक की तरह एक बार जो ब्लौगर पर आये, तो यहीं के होके रह गये। न कभी कहीं और जाने का सोचे, न कभी कोई दूसरा पता खोजे। हाँ फेसबुक पर एक पेज जरूर बना लिये कि तनी मनी लिखने के लिये ब्लोग उतना अच्छा नहीं लगता। कभी कभी चढ़ता है ना बुखार जैसा...एक ही दिन में गाना भी पसंद आयेगा, फिल्म भी देख लेंगे, किताब भी पढ़ लेंगे वाला टाईप का दिन। उस दिन फिर जरा जरा चिप्पी फेसबुक पेज पर चिपकाते रहते हैं।

    और ब्लौगर का जतरा देख के लग रहा है कि चिट्ठाचर्चा के दिन भी जल्दी बहुरेंगे। :) :) हम इन्तेजार में बैठे हैं पौपकौर्न का ठोंगा लिये हुये :)

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