Wednesday, September 23, 2015

चल मेरे घोड़े टिक टिक टिक

उड़ान का समय होने पर जहाज रन वे पर बड़ी तेज भागा। ऐसा जैसे कोई ट्रेन छूटी जा रही हो उसकी। भागते-भागते अचानक मुंडी ऊपर करके उछलकर आसमान के समुद्र में कूद गया और फिर आहिस्ते-आहिस्ते तैरने लगा हवा में।

नीचे की इमारतें चौकोर डब्बों में बदलती हुई छोटी होती गयीं। छोटी और छोटी। कुछ और ऊपर जाने में सब इमारतें गड्ड-मड्ड होकर एक में मिल गयीं। और ऊपर जाने पर जहां इमारतें और खाली जमीन थी वहां भूरे चकत्ते दिखने लगे।मानों धरती को वहां स्किन डिजीज हुई हो जहां जमीन पर मकान हैं या जमीन हरी नहीं है।

बादलों के ऊपर आ गया है जहाज। बादल जहाज के नीचे टहलते हुए इधर-उधर घूम रहे हैं। झुण्ड के झुण्ड बादल देखकर क्या पता ये भी किसी स्कूल जाते होंगे सुबह-सुबह।

एक जगह बादलों का एक समूह दिखा।कोई बादल नीला, कोई सफेद, कोई कम सफेद तो कोई एकदम भक्क सफेद।

बादल के साथ बदलियाँ भी टहल रहीं होंगी पकक्का। पर सबकी ड्रेस एक जैसी है तो पता नहीं चल रहा कौन बादल है कौन बदली। लगता है बादल समाज में बादल और बदली के संग-संग घूमने पर कोई रोक-टोंक नहीं है। कोई मुर्गा नहीं बनाता बादलों को बदली का हाथ पकड़ घूमने पर। कोई राखी नहीं बन्धवाता बदली से बादल के जब वह बादल की पीठ पर सवार घूमते हुए कहती है---चल मेरे घोड़े टिक टिक टिक।


एक जगह कुछ बादल और बदलियाँ खूब भक्क सफेद के साथ चमकते हुए भी दिखे। उनकी चमक देखकर ऐसा लग रहा था मानों सूरज की किरणों ने सुबह-सुबह आते ही उनके गुदगुदी कर दी हो। गुदगुदी से बचने के लिए खिलखिलाते हुए बादल इधर-उधर भाग रहे हैं। खिलखिलाते हुए लोट-पोट हो रहे हैं। किरणें भी उनका पीछा करती हुई गुदगुदाते हुए मुस्करा रही हैं।

जहाज कप्तान ने बताया कि बाहर का तापमान शून्य से 11 डिग्री नीचे है। अन्दर का तापमान 20 डिग्री। दोनों को मिला दिया जाए तो औसत तापमान हो जाए 5 डिग्री करीब।

नीचे अब बादल एकदम सफेद गद्दे की तरह लग रहे हैं।मन कर रहा कि बाहर निकलकर लेट जाएँ उनके ऊपर और सूरज भाई से कहें आओ चाय पिलाते हैं बादलों की बेंच पर बैठकर तुमको।

इस बीच एयरहोस्टेस नास्ता में सैंडविच दे गयी है। पानी साथ में। हमने सर झुकाकर करना शुरू कर दिया। बगल वाले से पूछने का चलन ही कहां है जहाज में। और हां, हमने उड़न बालाओं को इस बार न तो घूरकर देखा और न ही दुबारा पानी माँगा उनसे। बल्कि एक बार के नाश्ते और पानी के लिए दो बार थॅंक्यू बोला। smile इमोटिकॉन
बाहर बादल का फोटो लिया कैमरे से। जितना हमको दिख रहा उतना कैमरे को नहीं दिख रहा। मन किया खिड़की को सरकाकर कैमरा बाहर करके फोटो खींच लें। फिर यह सोचकर कि सारे बादल फिर अंदर घुस आएंगे अपना इरादा स्थगित कर दिया।


अल्लेव जहां बादलों के अंदर आने की बात कही तो ढेर सारी यादें धड़धड़ाते हुए जेहन में घुस गयीं। जितने भी लोग याद आये उनके साथ यह भी याद आया कि वो इस समय क्या कर रहा होगा। पत्नी स्कूल में बच्चों को पढ़ा रही होगी, बड़ा बच्चा नास्ता करते हुए आफिस जाने की सोच रहा होगा छोटा मेस नास्ता करके दोस्तों के साथ बतियाते हुए क्लास जा रहा होगा। ड्राइवर एयरपोर्ट पहुंचने वाला होगा।

फेसबुक पर लिख रहे तो फेसबुक के बारे में याद आया। दिल्ली से चलने से लेकर अब तक कई दोस्त खूब सारे स्टेट्स लगा चुके होने। मेरे स्टेट्स पर कुछ और लाइक्स और टिप्पणी आ चुकी होंगी। समाचार का एंकर चिल्लाता हुआ कई बार पढ़ु खबर फिर से पढ़ रहा होगा।

इस बीच जहाज टेढ़ा सा हुआ। वह अपने को जबलपुर उतरने के लिए तैयार कर रहा है। नीचे खूब हरियाली दिखी। धुंध के बादल हरियाली के ऊपर होते हुए जहाज की तरफ लपके जैसे स्टेशन पर ऑटो वाले लपकते हैं यात्री देखकर। जहाज आगे बढ़ गया और एयरपोर्ट की सड़क को चूमते हुए धीमा होते हुए उसके ऊपर ही ठहरकर सुस्ताने लगा।

जबलपुर आ गया। अब हम निकलते हैं बाहर। आप मजे करो। मुस्कराओ कि आपका दिन मंगलमय हो।

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