Sunday, September 20, 2015

दिल्ली से कलकत्ता, पहुंच गए अलबत्ता




1.हवाई अड्डे पर टर्मिनल 1 पर उतरे। मतलब आगमन पर। हमने समझा कि प्रस्थान भी कहीँ अगलै-बगल कहीं से होगा। पता चला की आठ दस किलोमीटर की दूरी पर था। हम व्यंग्य की चिंता और गद्दी
2. बस वाले ने 25 रूपये धरा लिए किराये के। यह भी बताया कि अगर हवाई अड्डे से टोकन बनवा लिए होते तो यात्रा मुफ़्त होती। अज्ञानता का फाइन पड़ गया 25 रूपये।
3. सुरक्षा जांच के लिए सीआईएसएफ वाले से बतियाये तो पता चला कि लखनऊ का रहने वाला है। अलीगंज । मन किया और बतियाएँ पर तब तक सुरक्षा जाँच वाला-चलो आगे। हम समर्पण मुद्रा में दोनो हाथ हवाई जहाज के डैनों की तरह फैलाकर खड़े हो गए।
4. एक किताब की दुकान पर अंग्रेजी किताबें बिक रहीं थी।मन किया कोई अंग्रेजी किताब पलटते हुए फोटो खिंचवा ले। फेसबुक पर अपलोड करेंगे। इम्प्रेशन पड़ेगा। पर फिर नहीँ किये। बस इस आइडिया पर शर्मा कर रह गए।
5. जिस गेट से घुसना था वहीं एक चार्जिंग बोर्ड के पास जाकर बैठ गए। किनारे की कुर्सियां पर लोग बैठे थे। हम खड़े-खड़े चार्ज करते रहे। कुछ देर बाद एक कुर्सी खाली हुई। हमें फील गुड हुआ। हम बैठकर चार्जिंग करने लगे।
6. इस बीच नेट गोल हो गया। ध्यान आया यहां वाई-फाई होगा। कनेक्ट भी हो गया। फील गुड बढ़ गया। फ्री का वाई-फाई और चार्जिंग प्वाइंट ।सैमसंग स्मार्टफोन धारक को इससे अधिक क्या चाहिए।
7. पीछे बैठी एक बालिका फोन पर किसी को बता रही थी । उसकी शादी की बात चल रही थी। लड़का शयद अमेरिका में हैं। अंगेरजी एक्सेंट ठीक करने को बोला गया है लड़की को। हमें लगा कि पीके पिक्चर की तरह कोई एक्सेंट डाउनलोडर भी होता उससे गिरा लेती बालिका उच्चारण।
8. जहाज का समय हो गया तो पता चला कि दूसरे गेट से जाना होगा। वहां से पहुंचे जहाज के पास पहुंचे तो याद आया कि अपना फोल्डर कुर्सी पर ही भूल गए थे। लौटकर लाने की बात कही तो जहाज क्रू बोला-देख लीजिये देर हो गयी है। हम यह सोचे कि कहीं फोल्डर छोड़कर चले गए तो क्या पता कोई खोजी पत्रकार शाम के किसी चैनल में प्राइम टाइम बहस समाचार न बना डाले। अपने 'रिक्स' पर भागते हुए हुये गए और ले आये फोल्डर। जहाज पर अभी भी लोग अंदर आ रहे थे।
9. जहाज उड़ा और देखते-देखते 10 किमी पहुंच गया। अचानक बाहर मौसम खराब होने की घोषणा हुई। जहाज इस तरह हिलने लगा मनो कोई घरैतिन सूप हिलाकर नाज पछोर रही हो। उस समय बाहर का तापमान - 38 मतलब बर्फ ताप से 38 डिग्री नीचे। कनाडा का जाड़े का सामान्य तापमान।
10. कुछ देर में जहाज का हिलना बन्द हो गया। खाना बंटने लगा। खाना मिलते ही सब लोग भुक्खड़ की तरह उस पर टूट पडे। ऐसा लगा कि जहाज में खाने के लिए आये हैं सब।
11. सलाद,चावल,दाल पनीर और सेवई थी खाने में। साथ में पाव और मक्खन। प्लास्टिक की चम्मच जरा जोर लगते ही लालू -मुलायम गठबंधन की तरह टूट गयी।फिर हममे चम्मच से मक्खन लगाकर खाया।
12. चाय पीते हुए याद आया कि एयरपोर्ट पर चाय सत्तर रूपये की थी। यहां मुफ़्त में। सोचते ही चाय का स्वाद बढ़ गया। चाय खत्म हुई तब जहाज बनारस पार कर रहा था।
13. बाहर रौशनी टिमटिमा रही थी। देखते-देखते वह भी ग़ायब हो गयी। अब एयरपोर्ट आते हुए रौशनी भी आ गयी। अवसरवादी है रौशनी भी।
14. जहाज कलकत्ता एयरपोर्ट पर झटके से उतर गया। बाहर का तापमान 28 डिग्री है। -38से 28 डिग्री मतलब 66 डिग्री का तापमान अंतर और 10 किमी की ऊंचाई नाप आये।
15. जहाज रुकते ही सब यात्री जनगण मुद्रा में खड़े होकर गैलरी में जाम लगा दिए। कुछ देर बाद सरकते हुए और फिर सरपट लोग बाहर हुए।
16. हम ड्राइवर को फोन किये। जो नम्बर बताया गया उसमें बैठ गए। चलने ही वाले थे कि पता चला कि वह गाड़ी दूसरे के लिए आई थी। गाड़ियों का वज्र गुणन गया। वो तो कहो चले नहीं वरना मामला 'लंच बॉक्स' सरीखा लफ़ड़े वाला हो सकता था।
17. कलकत्ता में पानी दिन भर बरसा था। ठण्डा और धुला-धुला शहर । ड्राइवर उड़िया है। कटक के पास का। बता रहा था कि कई चेयरमैन की गाड़ी हांक चुका है।
18.जहां गाड़ी रुकी थी वहीं चाय-कॉफी और नास्ते की दुकान थी। दुकान का नाम 'बिरियानी भाई'।चाय के दाम 10 रूपये। दिल्ली में जितने में एक चाय पी उतने में यहां 7 पी लेते।
19. हमरे मित्रगण होटल गए हैं ठहरने। हम।अपने आई बी आ गए। होटल का किराया 5000 होगा। आई.बी. का 100 रूपये करीब। यहां घर जैसा एहसास होता है। होटल में कोई भी चीज माँगने से पहले सोचना पड़ता है। यहां ऐसा कोई लफ़ड़ा नहीं।
20. अब चाय पीते हुये स्टेटस लिख रहे। साथ में गाना सुन रहे हैं--पहिने कुरता पर पतलून, आधा फागुन आधा जून। आप भी मजे करो।

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