Wednesday, February 12, 2025

श्रीलंका में डेंचर टूटा


 श्रीलंका हम लोग आए थे आठ फ़रवरी को। दिन शनिवार। एयरपोर्ट से होटल पहुँचकर थोड़ी देर आराम किया। ढाई बजे तय हुआ बाहर निकलने का। निकलते-निकलते समय तीन के क़रीब हो गया।

तय हुआ सबसे पहले खाना खाया जाए। पहले पेट पूजा, बाद काम दूजा। शाकाहारी भोजनालय की तरफ़ बढ़े। रास्ते में सड़क लगभग ख़ाली ही थी। कोलम्बो श्रीलंका की आर्थिक राजधानी है, सबसे बड़ा शहर भी। श्रीलंका का मुंबई समझिए। आबादी क़रीब 56 लाख। फिर भी सड़कें बिना भीड़ की। अधिकतर दुकाने भी बंद। पता चला कि शनिवार और इतवार बाज़ार बंद रहता है।
दुकानों से याद आया कि शहर में जो दुकाने खुली दिखीं वे उनमें से अधिकतर साफ़ सुथरी। रास्ते में एक सब्ज़ी की दुकान दिखी। सभी सब्ज़ियों में दाम प्लेकार्ड की तरह लगे थे।सड़क पर ऐसी कोई सब्ज़ी की दुकान हमने अपने यहाँ नहीं देखी।
भोजनालय में भी बहुत भीड़ नहीं थी। खाने के लिए बैठे। स्टील की खाने की थाली पर केले के पत्ते । थाली के ही आकार के। अनन्य ने अपने आसमानी कैमरे से सबके फ़ोटो लिए। स्टिक कैमरे की तरफ़ सबको देखने को कहा। सबने ऊपर देखा।फ़ोटो क्लिक हुआ। सब फ़ोटो देखने के बाद खाने का इंतज़ार करने लगे।
थोड़ी देर में खाना भी आ गया। थोड़ी देर स्वाद लेकर खाया गया। इसके बाद मुँह से कड़ाक की आवाज़ आयी। लगा मुँह में कोई खाने की चीज़ दांत के नीचे आकर टूटी है। लेकिन अगले ही पल पता चला कोई चीज़ नहीं, दांत ही टूटा है। दांत मतलब डेंचर। बत्तीसी के ऊपर का हिस्सा दो भागों का हिंदुस्तान-पाकिस्तान हो चुका है।
डेंचर के दो टुकड़े हो जाने के बाद कहाँ का खाना और कहाँ का स्वाद। बत्तीसी के ऊपरी हिस्से को सहेज के जेब में रखा और तरल पदार्थ ग्रहण करके लंच खतम। बाक़ी लोग खाते रहे। अपन बाहर आ गए।
बाहर आकर पता करने लगे कि कोई जनरल स्टोर खुला मिले जहां से क्विकफ़िक्स जैसी कोई चीज़ मिल जाए जिससे दांत जुड़ जाएँ। पहले भी टूट चुका था डेंचर लेकिन इसी तरह क्विक फ़िक्स से जुड़ गया। टनाटन काम चल रहा था। हालाँकि दूसरे डेंचर बनवा भी चुके थे और साथ में लाए भी थे लेकिन इस वाले की आदत पड़ी थी सो इसी का उपयोग कर रहे थे। नए डेंचर अभी एडजस्ट नहीं हुए थे। उनको लगाने पर मसूढ़े में दर्द होता था। बस सहायक हसन को अपन क्विक फ़िक्स समझा नहीं पाए। भाषा की ऊँची दीवार हम दोनों जब लांघ पाए तब यह पता चला कि दुकाने तो सोमवार को खुलेंगी।
तय किया कि होटल जाकर नए वाले डेंचर ले आए जाएँ। बस से जाने की बजाय तय सोचा टैक्सी से चले जाएँ। उबर से टैक्सी बुक की, किराया बताया पाँच सौ कुछ रुपए। दो-तीन किलोमीटर के इतने रुपए ठीक नहीं लगे। कैंसल कर दी टैक्सी। फिर सब लोग बस से गए होटल। कमरे में रखा नया डेंचर लगाया। निकल पड़े शहर घूमने।

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