Monday, February 17, 2025

माउंट लावीनिया बीच -प्रेम की दो सौ साल पुरानी दास्तान


 कोलम्बो के माउंट लावीनिया बीच के नामकरण की कहानी रोचक है। सीलोन के दूसरे गवर्नर Sir Thomas Maitland ने "Galkissa" (Mount Lavinia) में कुछ ज़मीन ख़रीदी और 1806 में अपना खुद का आवास बनवाया। Maitland यहाँ के स्थानीय मेस्टिको ( पुर्तगाल और श्रीलंका मूल की) नर्तकी Lovina Aponsuwa से प्रेम करने लगा। उनका प्रेम का क़िस्सा उनको वापस इंग्लैंड बुलाए जाने (1811 ) तक चला। गर्वनर निवास जिसे Maitland ने Mount Lavinia House का नाम दिया था, अब माउंट लावीनिया होटल में बदल गया है और उस घर के आसपास का इलाक़ा लावीनिया के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

2023 में Maitland और लावीनिया के प्रेम कहानी पर आधारित गीत "Loveena" लिखा गया। इस गीत को श्रीलंका के रक्षा सचिव कमल गुनारत्ने ने लिखा है (Kamal Gunaratne)।
मैटलैंड और लावीनिया के प्रेम का वर्णन करते गीत का लिंक टिप्पणी में दिया है। यूट्यूब में लोगों की टिप्पणियों के हिंदी अनुवाद देखकर उनके बीच के प्रेम की सघनता का अन्दाज़ लगाया जा सकता है।
पाँच साल चला प्रेम प्रसंग आगे के दो सौ सालों के बाद तक क़िस्सों, कहानियों , गीतों के रूप में चल रहा है। आज के दिनों में ये जो किस्से वायरल होने की बात कहती है उसकी बहुत परम्परा है।किस्से-कहानियाँ इसी तरह , बिना टिकट सफ़र करते रहते हैं। उनके माध्यम बदलते रहते हैं।
बीच पर एक पिता अपनी दो बच्चियों को घुमाने लाए थे। बच्चियाँ आपस में कूदने वाला कोई खेल खेल रहीं थीं। उनके पिता अपने बच्चों को खेलता देख रहे थे। कूद देर बाद बच्चियाँ रेत में पक़ड़म-पकड़ाई जैसा कोई खेल खेलने लगीं। इस बीच एक ट्रेन फिर निकली वहाँ से।
ट्रेन के गुजरने वाली जगह पर कोई रेलवे क्रासिंग नहीं थी। ट्रेन आने पर लोग अपने-आप रुक जा रहे थे। ट्रेन के निकल जाने पर आवागमन फिर चालू हो जा रहा था।
समुद्र किनारे के बुजुर्ग अपने साथ आई महिलाओं के फ़ोटो ले रहे थे। फ़ोटो सेट करने के लिए वे पहले लगातार पीछे आते गए। फिर उनको लगा कि दूरी ज़्यादा हो गयी तो फिर आगे बढ़े। काफ़ी देर बाद एक जगह खड़े होकर फ़ोटो खींचे उन्होंने।
वहीं बीच की रेत पर एक कौवा टहलता हुआ लोगों को समुद्र में नहाते देख रहा था। थोड़ी देर बाद कांव-कांव भी करने लगा। शायद मुझे लोगों के वीडियो बनाते देख उसने भी बिना कहे यह फ़रमाइश की क़ि उसका भी वीडियो बनाया ज़ाया। समुद्र पर जिस तरह टहलते हुए कौवा कांव-कांव कर रहा था उससे मुझे समीक्षा तैलंग Samiksha Telangकी किताब का शीर्षक याद आया -कबूतर का कैट वाक। यहाँ कौवा कैट वाक रहा था। उसकी कांव-कांव सुनकर मुझे लगा कि शायद वह अपनी वाली लावीनिया को पुकार रहा हो। किसी को अपनी लावीनिया को पुकारने के लिए कहीं का गर्वनर होना ज़रूरी थोड़ी है।
थोड़ी देर और बैठकर हम लोग वापस चल दिए। रेल की पटरी के पास एक चाय की दुकान पर चाय पीने का तय किया। दुकान की तरफ़ जाते हुए देखा कि एक बच्ची वहाँ की रेत पर झाड़ू लगाते हुए रेत की अल्पना जैसी बना रही थी। हमने उसका वीडियो बनाना शुरू किया तब तक उसने झाड़ू रख दी और दुकान के अंदर चली चली गयी।
चाय की दुकान पर एक बुजुर्ग महिला प्याज़ काट रही थी। हमने चाय माँगी तो उसने बताया -'बिना दूध की मिलेगी चाय। चीनी पड़ी हुई।' हमारे मित्र Sunil Chaturvedi वैसे तो डायबिटिक होने के बावजूद मिठाई-सिठाई खाते रहते हैं लेकिन चाय बिना चीनी के ही पीते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए बिना चीनी की चाय बना दे। महिला ने माना कर दिया यह कहते हुए कि पानी नहीं है।
इस बीच हम झोपड़ी (दुकान) के अंदर पहुँच गए। एक बोतल में रखे पानी की तरफ़ इशारा करके यह है तो पानी। महिला ने टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में बताया -'पानी ठीक नहीं है।' ठीक नहीं मतलब पीने का पानी नहीं है बोतल में।कारण और कोई भी सकता है लेकिन हम उसकी ईमानदारी के क़ायल हुए कि उसने ख़राब पानी की चाय नहीं बनाई।
महिला से दो-चार वाक्य का ही संवाद हुआ। वह पढ़ी-लिखी नहीं लगती थी। किसी पुराने उपन्यासों की ज़िम्मेदार माँ सरीखी वह महिला काम भर की अंग्रेज़ी और इशारों से अपनी बात कहती हुए अपनी दुकान चला रही थी। बाज़ार हर भाषा का सबसे तेज दुभाषिया होता है। लोग अपनी बात कहना और समझना सीख जाते हैं।
चाय पीकर हम लोग पैसे देकर वापस चल दिए। दो चाय के श्रीलंका की करेंसी में सौ रुपए हुए। हिंदुस्तानी रुपए में क़रीब तीस रुपए। मतलब एक चाय पंद्रह रुपए में।
दो सौ साल से भी पुराने दो प्रेमियों के नाम पर बसे समुद्र बीच पर चाय की इतनी क़ीमत बाजिब ही है।
रेल की पटरी पार करके हम लोगों ने आटो किया और होटल वापस चले आए।
पिछली पोस्ट में जो छाया वाली फ़ोटो का ज़िक्र किया था वह लगाने से रह गया था। वह इस फ़ोटो में लगा रहे हैं। पिछली पोस्ट का लिंक टिप्पणी में।

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