Sunday, February 23, 2025

हारन होय तभी तो बजायें


 झांसी से कानपुर की बस निर्धारित समय से एक घंटे की देरी के बाद स्टार्ट हुई । सड़क पर खड़ी बसों के कारण आगे नहीं बढ़ पाई। कंडक्टर ने कहा , ‘ आगे बढ़ाओ यार, हिनई खड़े-खड़े हिलाय रहे बस।’

‘अरे आगे की बसें बढ़ें आगे तभई तो बढ़ायें आगे बस’- ड्राइवर जवाब दिया।
‘अरे तो हारन तो बजाव ‘- कंडक्टर ने कहा।
‘अरे हारन होय तब तौ बजायें’- ड्राइवर उवाच।
अब बस चल दी है। सड़क पर आ गई। हॉर्न भले न बज रहा हो , पूरी बस बज रही है।
‘अरे , ड्राइवर साहब आपका एक्सेलेटर ग़ायब हो गया क्या ?’- एक सवारी बोली।
‘कुछ देर बाद उसी सवारी ने पूछा’- भईया आज़ पहुँच जायेगी ।
किसी ने कोई जवाब नहीं दिया।
बस सबसे निरपेक्ष चुपचाप सड़क पर सिंहनी की तरह चली जा रही है। हम बस में सवार हैं।
कंडक्टर ने टिकट काट दिया है। 400 रुपये लिए। टिकट काट के दे दिया। 24 रुपये उधार कर दिए। उतरने के पहले लेने हैं। आप ध्यान दिलाते रहना।

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