श्रीलंका के स्वतंत्रता स्मारक (पोस्ट लिंक टिप्पणी में) के बाद हम लोग कोलम्बो का लोटस देखने गए। श्रीलंका के इस सबसे ऊँचे टावर की गिनती दुनिया के सबसे ऊँचे टावरों में होती है। कमल के आकार की इस इमारत से पूरे शहर का नजारा दिखता है। इमारत में मनोरंजन और खाने-पीने की भी तमाम सुविधाएँ हैं। शुरुआत में इसके निर्माण में क़रीब 113 मिलियन डालर लगने का अनुमान था। (लगभग दस अरब रुपए)।निर्माण पूरा होने पर इसमें कुछ घपले की भी खबरें चलीं जो कि बाद में सही साबित नहीं हुईं। हर घपले की जाँच की लगभग यही नियति होती है।
टावर की बनावट और बिजली व्यवस्था इस तरह है ऐसा लगता है कि टावर के ऊपर कमल का फूल रखा हुआ है। दूर से ही कमल का चमकता दिख रहा था। जिस दिन हम उसे देखने गए थे उसी दिन दिल्ली चुनाव के नतीजे आए थे। भाजपा की जीत हुई थी। टावर के ऊपर कमल का फूल भाजपा की जीत की तरह चमक रहा था।
जब हम वहाँ गए थे तब तक हमको पता नहीं था कि इसे ऊपर से भी जाकर देखने की व्यवस्था है। वहाँ पहुँचने पर पर देखा कि लोग टिकट लेकर टावर के ऊपर जा रहे हैं। हमने तय किया कि हम भी जाएँगे।
टावर को देखने की फ़ीस 20 डालर थी। 20 डालर मतलब लगभग 1738 रुपए। श्रीलंका के हिसाब से 6000 रुपए। टावर देखने की फ़ीस और रात के कारण ग्रुप के लगभग सभी सदस्य होटल जाने के लिए मचल गए। केवल हमारे साथ के कुमावत दम्पति और मैंने टावर देखने का तय किया यह सोचकर कि न जाने कब फिर आना हो।
29 मंज़िला टावर को देखने की क़ीमत 20 डालर भुगतान करने पर याद आया कि हमने न्यूयार्क की 102 मंज़िला एंपायर स्टेट बिल्डिंग देखने के 65 डालर (4500 रुपए) भुगतान किए थे
टावर के बारे में विवरण देखने पर पता चला कि इसकी आधारशिला 20 जनवरी,2012 को रखी गयी। 15 सितम्बर,2019 में निर्माण कार्य पूरा हुआ। इमारत को 16 सितम्बर, 2022 को लोगों के लिए खोला गया। इमारत के बनने में हुए घपले का भी उल्लेख मिलता है जो कि साबित नहीं किया जा सका। आमतौर हर घपले की यही नियति यही होती है।
कोलम्बो की बेइरा झील के किनारे बने इस टावर के ऊपर जाने के लिए लगी लिफ़्ट के लाइन लगी थी। जितने लोग ऊपर से वापस आते लगभग उतने ही लोगों को ऊपर भेजा जाता। इस दौरान वहाँ टावर से सम्बंधित कई जानकारियाँ फ़्लैश हो रही थीं जैसे यह लिफ़्ट एशिया की सबसे तेज लिफ़्ट है जो 243 मीटर की ऊँचाई 48 सेकेंड में तय करती है, इमारत के बाहरी कमल के फूल वाले हिस्से को चमकाने के लिए 21,280 पिक्सल एलिमेंट लगे हैं।
टावर पर जाने के लिए लिफ़्ट का इंतज़ार करते हुए मोबाइल की बैटरी पर निगाह थी। ख़तरे के स्तर तक पहुँच चुकी बैटरी देखकर लग रहा था कि कहीं मोबाइल स्विच आफ न हो जाए। ऐसा हो जाता तो होटल के लिए सवारी करना मुश्किल हो जाता। मोबाइल की बैटरी भी हमारे काम के लिए साँसो की तरह ज़रूरी हो गयी है। हमने मोबाइल बंद कर दिया। सोचा कि लौटते समय ही देखेंगे।
अपना नम्बर आने पर हम लोग लिफ़्ट से ऊपर गए। टावर के ऊपर के गलियारे से पूरी शहर का नजारा दिख रहा था। अंधेरे में सभी ऊँची इमारतें चमक रहीं थी। नीचे बेइरा झील का काला पानी दिख रहा था। उसमें भी एलईडी लगा देते तो वह भी चमकती।
टावर के ऊपर पहुँचे लोग टावर के साथ फ़ोटो खींच रहे थे। तरह-तरह के पोज में। हमने अपने मोबाइल को बंद ही रखा। कुमावत जी के मोबाइल से फ़ोटो खींचे। फ़ोटो खींचते समय आदतन न्यूयार्क के एंपायर स्टेट बिल्डिंग से करते रहे। वहाँ की इमारतें ज़्यादा चमकदार, ज़्यादा ऊँची थीं।
नीचे सड़क पर जाती गाड़ियाँ चमकती चींटियों सरीखी दिख रहीं थीं जो फुर्ती से अपनी सवारियों को लादे इधर से उधर जा रहीं थीं।
हमने भी कुछ फ़ोटो लिए, कुछ सेल्फ़ी भी। ऊपर तेज हवा चल रही थी। सेल्फ़ी वीडियो बनाते हुए हमारे बाल उड़ रहे थे। हमारे बग़ल में सेल्फ़ी बनाती एक लड़की की ज़ुल्फ़ें भी उड़ते हुए हमारी तरफ़ आती लग रही थीं। हमें लगा कि कहीं गाना बचता,' उड़े जब-जब ज़ुल्फ़ें तेरी'। लेकिन ऐसा कुछ न हुआ। हमने अपनी और मोबाइल दोनों की बैटरी का ख़्याल रखते हुए वाह कहकर वीडियो बनाना छोड़ दिया।
कुछ देर तक टावर से शहर को देखने, निहारने, फ़ोटो खींचने, वीडियो बनाने के बाद हम नीचे उतर आए। वापस लौटने का रास्ता शापिंग कामप्लेक्स और फ़ूड प्लाज़ा से होते हुए था। तमाम लोग वहाँ बचे हुए पैसे खर्चा कर रहे थे। हम सीधे बाहर आ गए।
बाहर आकर बची हुई बैटरी वाले मोबाइल का उपयोग करके हमने आटो किया। उबर का किराया क़रीब 500 रुपए बता रहा था। वहाँ खड़े आटो वाले ने कहा 1000 रुपए लेंगे, छोड़ देंगे। हमने उबर से आटो ख़रीदा। थोड़ी देर में वह आ भी गया। हम उसमें बैठकर वापस होटल आ गए।
यह श्रीलंका का हमारा पहला दिन था। अच्छा बीता।
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