Sunday, February 09, 2025

श्रीलंका में स्वागत है


 पुस्तक मेले से लौटते हुए रात हो गयी। श्रीलंका के लिए फ़्लाइट सबेरे पाँच बजे थी। खा-पीकर साढ़े दस क़रीब सो गए। बारह बजे का अलार्म लगाकर। जागते हुए सोते रहे। अलार्म बजने के पहले बारह बजते देखा। अलार्म बजने पर उठकर तैयार हुए। निकल लिए दिल्ली एयरपोर्ट के लिए। टर्मिनल तीन से फ़्लाइट थी।

एयरपोर्ट पहुँचकर बाक़ी साथियों का इंतज़ार किया। कुल मिलाकर ग्यारह लोग साथ थे श्रीलंका के लिए दिल्ली से। बाक़ी अलग-अलग जगहों से आने थे।
इमिग्रेशन, सुरक्षा जाँच आदि से निकलकर अंदर पहुँचे तब तक चार बज गए थे। टिकट पर जो गेट लिखा था वहाँ पहुँचने पर पता चला कि गेट बदल गया है। दूसरे गेट पर पहुँचे। कुछ लोगों ने एयरपोर्ट की गाड़ी सूविधा का उपयोग किया। अपन पैदल गए और गाड़ी से जाने वाले लोगों के फ़ोटो खींचे ताकि याद रहे।
सही गेट पर पहुँचकर समय का उपयोग आपसी परिचय और फोटोबाज़ी में हुआ। ठीक पाँच बजे जहाज़ के दरवज्जे बंद हो गए। पाँच बजकर दस मिनट पर फ़्लाइट उड़ गयी श्रीलंका के लिए।
जहाज़ के उड़ाते ही सो गए। क़रीब साढ़े तीन घंटे की उड़ान थी। क़रीब घंटे भर बाद नाश्ता आया। सुबह छह बजे वह सब कुछ जो अमूमन हम लोग खाने में खाते हैं। सुबह चाय सबसे पहले पीते हैं लेकिन यहाँ खाने-पीने के बाद हुई। चलता है।
खिड़की से सुबह के समय का उगता हुआ एकदम लाल-लाल सूरज पूरे आसमान को लाल बना रहा था। दूसरी तरफ़ थोड़ा कम उजाला था।
सबेरे क़रीब साढ़े आठ बजे जहाज़ के पहिए एयरपोर्ट के रन वे पर पड़े। उतरकर बाहर आए। बस से टर्मिनल पहुँचकर इम्मिग्रेशन पर पासपोर्ट पर ठप्पा लगवाया। यह हमारी कुल मिलाकार चौथी विदेश यात्रा है। पहले दो बार अमेरिका और एक बार नेपाल जा चुके थे। इस बार श्रीलंका।
एयरपोर्ट पर दूसरी फ़्लाइट से आने वाली एक और साथी का इंतज़ार किया। इस बीच एयरटेल का श्रीलंका का पैकेज चालू कराने में भी मेहनत की। वहाँ मौजूद एयरटेल वाले ने कहा -'ये समस्या एयरटेल इंडिया वाले ही सुलजाएँगे।' हमको फिर पता चला कि समस्या जहां की होती है, वहीं के लोग निपटा सकते हैं। ख़ैर, कुछ देर में इधर-उधर करने पर फ़ोन चालू हो गया। इस बीच हवाई अड्डे की मुफ़्त वाई-फ़ाई सेवा का उपयोग करते हुए कुशल समाचार का आदान-प्रदान कर चुके थे।
बोर्ड पर अंग्रेज़ी में 'श्रीलंका में आपका स्वागत है' लिखी पट्टी चमकती रही। जिनका इंतज़ार कर रहे थे उनके आने के बाद बाहर निकले। सामान और खुद को बस में रखा और होटल के लिए निकल लिए।
श्रीलंका को पहले सीलोन के नाम से जाना जाता था। फिर इसका नाम लंका हुआ। इसके बाद नाम में इज्जत के हिसाब से श्री जोड़ दिया गया। हो गया श्रीलंका। 4 फ़रवरी, 1948 को आज़ाद हुआ श्रीलंका। कुल मिलाकर क़रीब ढाई करोड़ की आबादी वाले एक द्वीपीय देश में नौ प्रांत और पच्चीस ज़िले वाले देश श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो है। यह इस देश का सबसे बड़ा शहर भी है।
सड़क पर भीड़ बिल्कुल नहीं। शांत शहर। गाड़ियाँ आराम-आराम से चलती हुयी। कोई हड़बड़ी नहीं। सड़क एकदम साफ़। कहीं कोई कूड़ा-कचरा नहीं।
एयरपोर्ट से निकलकर एक रेस्तराँ में चाय पी गयी। नुक्कड़ पर बना यह रेस्तराँ भी साफ़-सुथरा।
चाय पीकर क़रीब घंटे भर की दूरी वाले अपने होटल पहुँचे। सब लोग अपने-अपने कमरों पर क़ब्ज़ा करने और सामान जमाने में लग गए। हम अपना चश्मा खोजने लगे। लगा जहां चाय पी थी वहीं छोड़ आए होंगे। वहाँ फ़ोन किया तो उसने बताया नहीं है। फिर गए बस देखने। नहीं मिला। इसके बाद फिर बस सहायक हसन के साथ गए। उसने खोजा। पहले तो नहीं मिला लेकिन कुछ देर बाद उसने चश्मा उस सीट की पाकेट से बरामद करके दिया जिस सीट पर हम बैठे थे।
एक बार फिर लगा क़ि चीजें खोती नहीं हैं, बल्कि हम भूल जाते हैं हमने उनको रखा कहाँ हैं।
होटल के कमरे में आकर आरामफ़रमा हुए। घंटे भर बाद हमको शहर देखने के लिए निकलना था।

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