Wednesday, February 26, 2025

भविष्य की लोकतांत्रिक पार्टी का चुनावी एजेंडा

 आजकल पूरी दुनिया में सरकारें अपनी जनता की भलाई करने के लिए बवाल काटे हैं। लोकतंत्र की बहाली के लिए दुनिया भर की सरकारों के मुखिया मनमानी करते हुए तानाशाह हुए जा रहे हैं। लोकतंत्र के लिए कुछ भी करने को हलकान हुए जा रहे हैं। लोकतंत्र की बहाली और जनता के भले के लिए अपनी पार्टी की सरकार होना ज़रूरी है। लोकतंत्र का यह आवश्यक नाटक है। लोकतंत्र में सरकार बनाने के लिए चुनाव होते हैं। चुनाव में पार्टियाँ अपना एजेंडा बनाती हैं , पालन भले न करें।

आज जिस तरीक़े से लोकतांत्रिक देशों में चुनाव हो रहे हैं उनको देखते हुए आने वाले किसी समय में किसी देश में होने वाले किसी चुनाव के दौरान किसी लोकतांत्रिक पार्टी का सम्भावित एजेंडा यहाँ पेश है।
1. सरकार के किसी भी कदम का विरोध करने पर उसका घर बुलडोजर से गिरा दिया जाएगा।
2. बेघर विरोधियों के घर गिराने के लिए उनको ‘ बुलडोजर गृह योजना’ के अंतर्गत घर एलाट किए जायेंगे ताकि सरकार विरोधी कदम पर उनके घर गिराये जा सकें।
3. घर गिराने का खर्च सरकार विरोधियों से वसूल किया जाएगा। निर्धन सरकार विरोधियों को ‘गृह विध्वंस योजना’ से विशेष अनुदान दिया जाएगा ताकि वे अपने घर गिराये जाने का खर्च जमा कर सकें।
4. 'बुलडोज़र विध्वंस योजना' को आकर्षक एवं सुगंध मय बनाने के लिए इसका नाम 'पुष्पहार अर्पण' योजना रखा जाएगा।
5. सरकार का विरोध करने वालों को अपने विरोध की सार्वजनिक घोषणा करनी होगी। विरोधी लागों के वोट की गिनती नहीं की जायेगी। वे स्वतः निरस्त माने जायेंगे।
6. जिन लोगों ने सरकार के विरोध की सार्वजनिक घोषणा किए बिना सरकार के ख़िलाफ़ मतदान किया होगा उनके ख़िलाफ़ पारदर्शिता कानून के उल्लंघन का मुकदमा चलाया जाएगा जिसमें निष्कर्ष कुछ भी निकले सजा ज़रूर दी जाएगी और उनको सरकार समर्थक पार्टी में जबरियन शामिल कर लिया जाएगा।
7. बुद्धि , तर्क की बात करने वालों को चिन्हित किया जाएगा। उनकी किसी भी गतिविधि को सरकार विरोधी मानने के लिए सरकार सर्वथा स्वतंत्र होगी।
8. सरकार का समर्थन करने की किसी को भी खुली छूट होगी। सरकार के समर्थन में जो जितना जोर से जयकारा लगाएगा उसको उतना बड़ा देशप्रेमी समझा जाएगा। सरकार समर्थक जयकारा लगाने पर गला फटने की स्थिति में कोई मुआवज़ा नहीं दिया जाएगा।
9. सरकार की बेवक़ूफ़ी की बातों का समर्थन करने पर हर तरह की आजादी होगी। सरकार के किसी भी क़दम को सार्वजनिक रूप से बेवक़ूफ़ी भरा बताना व्यवस्था विरोध माना जाएगा।
10. सरकार से कोई बात ज़्यादा ही बेवकूफ़ी की हो जाए तो उसे सरकार के मुखिया से व्यक्तिगत मुलाक़ात करके 'अलग तरह की समझदारी' कहते हुए तारीफ़ करके सूचित कर सकते हैं।
11. लोकतंत्र की रक्षा करते हुए देश के गौरव को ऊँचा उठाते हुए अगर जाने-अनजाने जनता की भलाई का कोई सरकार से हो जाए तो उसके लिए सरकार ज़िम्मेदार नहीं होगी।
उपरोक्त योजना फ़िलहाल तो पूर्णतया काल्पनिक है। लेकिन यह अगर कहीं असलियत में साकार होती है तो उसके लिए हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं होगी। इसका पूरा दोष इसको अमल करने वाले पर होगा।

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