Saturday, February 15, 2025

एला से नानू ओया

 


एला से नानू ओया के लिए ट्रेन चली थी क़रीब डेढ़ बजे। दोनों स्टेशन के बीच दूरी है 64 किलोमीटर। 14 स्टेशन पड़ते हैं बीच में। हर जगह रुकते हुए गाड़ी आगे बढ़ी। कुछ स्टेशन पर लोग बहुत कम दिखे, कुछ पर बिल्कुल नहीं। कहीं भीड़ भी दिखी।

किसी स्टेशन पर चाय/काफ़ी बेचने वाले नहीं दिखे। न ट्रेन में आए। अलबत्ता नानू ओया पहुँचने के क़रीब एक पकौड़े बेचने वाला आया। पकौड़े ठंडे थे और उसके तेल में अच्छी ख़ुशबू नहीं आ रही थी इसलिए लोगों ने लिए नहीं।
एक आदमी आँख का आपरेशन करवा वापस लौटा था। जिस आँख का आपरेशन हुआ था उसके ऊपर प्लास्टिक की कटोरी टाइप का लेंस उसमें माथे और गाल में लगे टेप से चिपका दिया गया था। लेंस में हवा आने के लिए रोशनदान जैसे सूराख भी बने थे। हम लोग जो खा-पी रहे थे उसकी खेप उस तक भी पहुँची तो उसने विनम्रता पूर्वक उसको ग्रहण करके धन्यवाद मुद्रा में आभार भी जताया।
फ़्रांसीसी परिवार पहले ही उतर चुका था। बालक जो नेपोलियन के बारे में किताब पढ़ रहा था, अपने दल का नायक टाइप था। सबको निर्देश दे रहा था। माँ अंग्रेज़ी नहीं जानती थी शायद। बच्चियों से फ़्रांसीसी में बतिया रही होगी, बच्चियाँ उसको उसी भाषा में जवाब दे रहीं थी। बच्चियाँ अलबत्ता हम लोगों से अंग्रेज़ी में बात कर रही थी। दोनों तरफ़ की अंग्रेज़ी हालाँकि कई बार लड़खड़ा, खड़खड़ा रही थी लेकिन मतलब सम्प्रेषित हो रहा था। याद आयी पाठक जी की कविता :
भाषा तो पुल है मन के दूरस्थ किनारों पर
पुल को दीवार समझ लेना बेमानी है।
क़रीब पौने छह बजे हम लोग नानू ओया पहुँचे। मतलब चार-सवा चार घंटे लगे 14 स्टेशन के बीच की 64 किलोमीटर की दूरी तय करने में। हमारा सामान बस से आया था। बस स्टेशन पर हमारा इंतज़ार कर रही थी।
नानू ओया स्टेशन के बाहर एक बस भोजनालय दिखा। बस के अंदर बैठने -खाने -पीने का इंतज़ाम था। बोनट पर लिखा था - We लव फ़ूड। बाहर बस बाडी पर भी खाने-पीने से सम्बंधित विवरण लिखे थे -the HUNGRY Traveller (भूखा यात्री) , गेट पर लिखा था -Come in we are open (अंदर आ जाओ, दुकान खुली है) I hear en empty stomach calling (हम भूखे पेटों की आवाज़ सुनते हैं)। इसी तरह के संदेशों से बस भोजनालय को आकर्षक बनाया गया था। एकाध लोग अंदर बैठे कुछ खाते भी दिखे। हम लोगों के लिए बस बग़ल में खड़ी इंतज़ार कर रही थे। हम लपक के अपनी बस में बैठे और होटल के लिए चल दिए।
होटल पहुँचने के पहले एक जगह एक झील भी देखनी थी। झील के पास बस रुकी लेकिन हम झील की तरह बढ़ने की बजाय उसके सामने बने भारतीय रेस्तराँ की तरफ़ बढ़े। सबके पेट कुड़बुड़ा रहे थे, सब चयासे थे। तय हुआ पहले पेट की माँग पूरी कर ली जाए तब झील दर्शन करेंगे।
पेट की आग ने सौंदर्य बोध की हत्या कर दी। हमेशा की तरह ।
होटल में चाय,पकौड़े, समोसे का आर्डर हुआ। समोसे बहुत स्वादिष्ट थे। चाय भी। सबने शाम का नाश्ता, चाय पानी करते हुए सामने की झील देखी। समोसे भारतीय रुपयों में पचास रुपए का एक था। चाय भी इसी के अल्ले-पल्ले। तसल्ली से नाश्ता करते हुए जब बस में बैठे तब तक काम भर की शाम हो चुकी थी। हम झील को दूर से ही देखकर होटल की तरफ़ चल दिए।
रास्ते में एक जगह हमारे गाइड चानक ने एक बिल्डिंग के तरफ़ इशारा करते हल्ला मचाते हुए बताया -'पोस्ट आफिस, पोस्ट आफ़िस।' हमने फ़ौरन चलती बस से अपने कैमरे से पोस्ट आफिस को अपने कैमरा का शिकार बनाया और मोबाइल में डाल लिया।
होटल पहुँचने पर अपने-अपने कमरे की तरफ़ बढ़े। हमको जो कमरा मिला था उसको खोलने पर देखा तो बिस्तर पर तौलिया दो हंसो के जोड़ों की तरह रखी हुई थीं। दूसरे कमरों में भी इसी तरह अलग-अलग आकृतियों में तौलिया लगी हुई थीं।
होटल में कुल जमा चार लोगों का स्टाफ़ दिखा । एक अकेला लड़का सबके कमरों तक सामान पहुँचा रहा था। एक अकेली महिला कमरा अलाट करने और खाना सर्व करने का काम कर रही थी। अंदर खाना बनाने का काम दो लोग करते दिखे। खाना बनाने की रसोई थोड़ा ऊँचाई पर थी। उसके खिड़की से डोंगे नीचे सप्लाई हो रहे थे। ऐसे जैसे ऊपर से खाना थ्रो किया जा रहा हो, नीचे कैच किया जा रहा हो।
खाना खाने का बाद सबका मन चाय पीने का हुआ। हमारे दल के एक बुजुर्ग ने वहाँ बुकिंग और सर्विंग करने वाली महिला को आदेशात्मक अनुरोध देते हुए कहा -'हमको चाय पीनी है, आप ही बना के लाइए।'
महिला ने मुस्कराते हुए आदेश स्वीकार किया और थोड़ी देर में चाय बना के ले आई। सबने चाय पीते हुए उस महिला की तारीफ़ की। कई बार तारीफ़ की। महिला को चाय का आदेश जैसा भी लगा हो लेकिन तारीफ़ सुनकर वह बहुत खुश हो गयी। उस महिला का कोई महिला मीडिया होता तो उसका बढ़-चढ़ कर डंका बजता -'भारत से आए लोगों ने शानदार तारीफ़ की। वे होटल की व्यवस्था देखकर दंग रह गए।'
यह बात अलग कि इस ख़बर की आड़ में यह छिप जाता कि होटल की सीढ़ियों से एक बुजुर्ग मुँह के बल गिरते-गिरते बचे। नेट कनेक्शन की ऐसी व्यवस्था रखी गयी थी कि मजाल कोई डाटा इधर से उधर हो जाए।
बहरहाल सुबह जब उठे तो वैलेण्टाइन डे था। सबने आपस में सबको हैप्पी वैलेण्टाइन डे कहा। नाश्ता करने के बाद होटल के बाहर की धूप में जमकर फोटोबाज़ी की। धूप अभी श्रीलंका में भी मुफ़्त है।
चलते हुए होटल स्टाफ़ के साथ भी फ़ोटो हुए। महिला मैनेजर ने अनुरोध किया कि होटल के बारे में अच्छी रेटिंग दें हम लोग। हम लोग 'हौ।' कहते हुए बस में बैठकर आगे की लिए चल दिये ।
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