Tuesday, February 18, 2025

कोलम्बो का गंगा रामया मन्दिर , भगवान बुद्ध के पवित्र बाल


आठ फ़रवरी को दोपहर के लंच के बाद (पोस्ट की कड़ी टिप्पणी में) हम लोग घूमने निकले। शनिवार होने के कारण दफ़्तर और दुकानें ज़्यादातर बंद थे। सड़कों पर भीड़ नहीं थी। हम लोग कोलम्बो दर्शन के लिए निकले।
हमारी सबसे पहली मंज़िल थी कोलम्बो का प्रसिद्द बौद्ध मंदिर गंगा रामया मंदिर । इस बौद्ध विहार में भगवान बुद्ध के बाल के अवशेष रखे हैं।
भगवान बुद्ध के बाल के बारे में कहा जाता है कि भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के बाद दो व्यापारी भाई तपासु और भल्लिका उनसे मिलने आए। वे भगवान बुद्ध के पहले भक्त बने। भगवान बुद्ध से विदा लेते समय उन भक्त व्यापारी भाइयों ने भगवान बुद्ध से कुछ निशानी के तौर पर देने का आग्रह किया। भगवान बुद्ध जी ने अपने सिर के कुछ बाल उनको प्रदान किए। व्यापारी बंधुओं ने वे बाल विभिन्न बौद्ध विहारों में रखने के लिए प्रदान किए। उनमें से एक बांग्लादेश के चिटगाँव स्थित बौद्ध विहार भी था।
मार्च, 2007 में श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महेंद्र राजपक्षे की पहल पर चिटगाँव, बांगलादेश के बौद्ध विहार में रखे बालों में से कुछ बाल लाकर गंगा रामया विहार में रखे गए। कहते हैं कि उस समय यहाँ आसपास के इलाक़े में सूखा पड़ा था। भगवान बुद्ध के पवित्र बाल मंदिर में आते ही भारी वर्षा हुई और महीनों से पड़ा सूखा ख़त्म हो गया।
बौद्ध मंदिर पहुँचकर हम लोगों ने देखा कि मंदिर के बाहर सड़क की दूसरी तरफ़ पूजा के वस्त्र पहने भक्तों की भीड़ सड़क पर लाइन लगाए खड़ी थी। भक्तों की पंक्ति में सबसे आगे और सबसे आखिरी में एक हाथी भी खड़ा था। मंदिर के सामने प्रांगण में पूजा की अलग तरह की पोशाक पहने भक्त गण खड़े थे। पोशाक जालीदार जिरह बख्तर नुमा थी। पुरुष लोग ही शामिल थे भक्तों में।
थोड़ी देर में विभिन्न वाद्य यंत्र बजने लगे और मंदिर के प्रांगण में उपस्थित भक्तगण अपनी जगह पर नृत्य करने लगे। वाद्य यंत्रों की आवाज़ तेज़ी होती गयी और उसी क्रम में भक्तों का नृत्य तेज होता गया। कुछ देर बाद भक्त गण मंदिर से बाहर की तरफ जाने लगे। उनके पीछे एक पुजारी थाल में सोने का मुकुट लेकर जा रहा था। जुलूस के साथ पुलिस भी थी।
पता करने पर लोगों ने बताया कि साल में एक बार एक हफ़्ते प्रति दिन इस तरह के भक्ति जुलूस निकाला जाता है। यह मंदिर के आसपास के इलाक़े को रक्षा के लिए किया जाता है।
मंदिर की इस जुलूस और पूजा प्रक्रिया को देखने के लिए तमाम देशी और अधिकतर विदेशी लोग वहाँ मौजूद थे। थोड़ी देर के नृत्य के बाद भक्त लोग परिक्रमा के लिए मंदिर से बाहर चले गए। हम लोग मंदिर के अंदर प्रवेश कर गए।
सामने ही सोने का भगवान बुद्ध का मंदिर था। उसके अंदर ही भगवान बुद्ध के सर के बाल रखे थे । शायद किसी बक्से में सुरक्षित। भव्य भगवान की सोने की मूर्ति शीशे के कवर के अंदर रखी थी। लेकिन वहाँ पास तक जाने की किसी को कोई मनाही नही थी। फ़ोटो लेने में भी कोई रोक नहीं थी।
मंदिर के पीछे भगवान बुद्ध की अनेक प्रतिमाएँ एक के बाद एक सिलसिलेवार लगीं थीं। बुद्ध प्रतिमाओं के अलावा अन्य प्रतिमाएँ भी थीं। एक संग्रहालय में बौद्ध धर्म से जुड़ी अनेक चीजें रखीं थीं कुर्सी,मेज़, तस्तरियाँ, मूर्तियाँ और बौद्ध धर्म से जुड़ी किताबें। लोग उनके दर्शन करने आ रहे थे। वहीं पर पर पीपल का पेड़ भी था।
मंदिर के माध्यम से अनेक कल्याण कारी कार्यक्रम होते हैं। मंदिर के बाहर एक बड़ा सा कलश रखा था जिसके बाहर लिखा था -your generous support will bring happiness to children with special needs and uplift their lives (आपका उदारता पूर्वक किया सहयोग विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों की सहायता और उनके भविष्य के उन्नयन में काम आएगा) हमने झांक के देखा तो कलश के नीचे पेंदे में कई रुपए पड़े थे। हमने भी कुछ योगदान दिया।
कुछ देर और मंदिर के प्रांगण में रहने के बाद हम लोगों ने वहाँ सामूहिक फ़ोटो खिंचवाया और बाहर आ गए।
गंगा रमैया मंदिर से कुछ दूरी पर ही स्थित सीमा मलाका मंदिर गए। गंगा रमैया मंदिर के प्रांगण में ही स्थित इस मंदिर में लोग ध्यान आदि करते हैं। यह मंदिर बीरा नहर के किनारे बना है। यह मंदिर 19 सदी में बनवाया गया था। मंदिर का मूल ढाँचा 1970 में पानी में डूब गया था। 1976 में इस मंदिर का पुनर्निर्माण श्रीलंका के आर्किटेक्ट Geoffrey Bawa ने लिया। मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग श्रीलंका के मुस्लिम व्यापारी S. H. Moosajee और उनकी पत्नी ने अपने पुत्र Ameer S. Moosajee की याद में किया था।
सीमा मलाका मंदिर के प्रांगण में कुछ देर बिताने के बाद हम लोग अंदर भी गए। अंदर कुछ लोग पूजा-ध्यान कर रहे थे। श्लोक जैसा कुछ बज रहा था। हम लोग कुछ देर वहाँ रहने के बाद बाहर आ गए। बाहर प्रांगण में मंदिर के किनारे कई बौद्ध मूर्तियों लगीं हुईं थीं।
कुछ देर मंदिर में रहने के बाद हम लोग बाहर आ गए। सूरज डूब रहा था। हम लोगों को सड़क पार करते देखकर आटो, टैक्सी रुक गए। तभी चले जब हम लोग सड़क पार कर गए। यह हमारे लिए विलक्षण अनुभव था। बाद में ऐसा होते कई बार देखा हमने।
सड़क किनारे एक इमारत में कई आफिसों के बोर्ड लगे थे। उनमें से एक पर cargills Food Hall भी लिखा था। हम काफ़ी देर तक सोचते रहे कि अपने यहाँ के कारगिल युद्ध से इस इमारत का क्या लेना-देना? बात में पता चला शहर में कई जगह cargills लिखा देखा तब पता चला कि यह भोजनालयों की एक शृंखला है।
गंगा रमैया मंदिर प्रांगण के बाद हम लोगों की अगली मंज़िल श्रीलंका स्वतंत्रता स्मारक थी। हम लोग बस में बैठकर उधर की तरफ़ चल दिए।

#श्रीलंका,#shrilanka-14

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