घूमते समय किसी यात्रा के बारे में लिखना मजेदार और बवालिया दोनों है। मजेदार इस लिहाज़ से कि घूमते जाओ, देखते जाओ, महसूस करते जाओ और उसके बारे में लिखते जाओ। बवालिया इस लिहाज से कि सब कुछ इतनी तेजी से होता है कि उसको फ़ौरन लिखना मुश्किल। अगर फ़ोटो लगानी हो तो अलग बात लेकिन उसके बारे में लिखने के लिए समय चाहिए। कुछ यादें इतनी रोचक होती हैं, खूबसूरत होती हैं कि उनके बारे में आराम से लिखने का ही मन करता है। इसके चलते बहुत कुछ छूट भी जाता है।
बहरहाल, आज हमारे लक्षद्वीप ट्रिप का चौथा दिन है। 11-15 अक्टूबर है ट्रिप। अपन एक दिन पहले आए थे, एक दिन बाद जाएँगे। आज चौथा दिन हो गया ।इस बीच कई जगह घूमने गए। फोटो, वीडियो हुए। तमाम किस्से जुड़े। शुरुआत पहले दिन से।
11 अक्टूबर की सुबह ट्रिप में शामिल दस लोगों में से सात लोग दिल्ली, गोवा होते हुए आए। इनमें चार महिला सदस्य अकेले आईं। उनके बच्चों ने उनको भेजा था घूमने के लिए। इनमें से कुछ तो इसके पहले कभी अकेले घूमने नहीं निकली।
सुबह साढ़े नौ बजे गोवा से फ्लाइट आगाती लैंड हुई। होटल किनारे समुद्र बीच देखकर सब खुश हो गए। सामान अपने-अपने कमरों में रखकर सब बीच पर आ गए। समुद्र किनारे लगे झूले पर झूलते हुए, बीच में नहाते हुए मजे करते रहे। तरह-तरह से फोटो खिंचाते रहे। मस्ती करते रहे।
आजकल मोबाइल फ़ोन में कैमरे इतने अच्छे आने लगे हैं, उनसे फ़ोटो खींचना इतना आसान हो गया है और फ़ोटो इतने खूबसूरत आते हैं कि कोई भी याद हो उसे मोबाइल में सहेज कर रखने का चलन हो गया है।
साढ़े ग्यारह बजे दो साथी अजय सिंह और श्रीमती शैल पुणे से आए। लक्षद्वीप ट्रिप के बारे में लिखी हमारी पोस्ट से उनको इस ट्रिप का पता चला और वो भी साथ आ गए।
लंच के बाद सबका आपस में परिचय हुआ। सबने अपना परिचय देते हुए बताया कि कैसे वो इस ट्रिप में आए। सबके अलग-अलग अनुभव। अपने संघर्षों के बारे में भी बताया। उपलब्धियों के बारे में भी। सबकी अलग कहानी, रोचक कहानी। उनसे पूछकर सबके बारे में अलग से लिखेंगे।
महिला साथियों ने बताया कि वे इसके पहले वे कभी अकेली घूमने नहीं निकले। लेकिन इस ट्रिप के बाद वे अकेले भी घूमने निकलने के बारे में सोचेंगी।
परिचय की शुरुआत करते हुए अनन्य ने अपनी कंपनी के बारे में भी बताया। अपनी हर ट्रिप में कही जाने वाली बात फिर से दोहराई -' सबसे एक ही रिक्वेस्ट है कि कोई किसी को जज नहीं करेगा। कोई ज़्यादा बोलता है, कोई चुप रहता है, कोई ज़्यादा फ़ोटो खींचता है , कोई फ़ोटो से परहेज करता है। सबके अपने-अपने कारण होते हैं। लेकिन इसके चलते किसी के बारे में कोई धारणा न बनायें। सब लोग मस्ती करें। खुश रहें।'
परिचय होते हुए दोपहर के ढाई बज गए थे। शाम को चाय के लिए चार बजे मिलने का तय करके सब अपने-अपने कमरे आराम करने चले गए।
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