लक्षद्वीप में आने के तीसरे दिन बनाना बोट राइड पर गए हम लोग। बनना मतलब केले के आकार की रबर की बनी बड़ी नावें। हवा भरी होगी अंदर। नाव पर बैठकर पकड़ने के लिए रस्सी लगी थी। उसको पकड़कर बैठना होगा था ताकि संतुलन बना रहे।
बनाना बोट समुद्र किनारे रेत पर रखीं थीं। उनको ठेल-ठाल कर पानी में उतारा गया। लोग नाव पर सवारी करने के लिए तैयार होने के पहले रेत पर, पानी पर मजे करते रहे। तरह-तरह के पोज में फोटो खिंचाते रहे। महिला साथियों ने गोल घेरे में उबंटू आकार में बैठकर भी एक फ़ोटो खिंचाया।
बनाना वोट राइड के पहले नाश्ते के समय लोगों ने अपने सुबह के किस्से भी सुनाये। सुमन गुप्ता जी और किरन शुक्ला जी ने किसी स्थानीय व्यक्ति की साइकिल लेकर साइकिलिंग भी की थी। सुमन गुप्ता जी उतरते समय गिर गईं। घुटनों में चोट लगी। ख़ुद मरहम-पट्टी कर ली।
उस दिन अहोई अष्टमी थी। कुछ महिलायें व्रत भी थीं। सुबह उठकर उन्होंने पूजा की। बिना नमक का नाश्ता बनवाया गया था उनके लिए।
बनाना बोट राइड के पहले राउंड में पाँच लोग गए। बनाना वोट को मोटर वोट से बांधा गया। मोटर वोट से लंबी रस्सी से बंधी नाव मोटर वोट के पीछे-पीछे चलती रही। पानी में दूर तक गई। सब लोग लाइफ़ जैकेट पहने थे। मोटर वोट और बनाना वोट पर भी एक आदमी था जो सबकी सुरक्षा का इंतजाम देख रहा था।
काफ़ी देर पानी में घूमने के बाद मोटर वोट और उसके पीछे नाव वापस लौटी। किनारे आकर नाव में में सवार लड़के ने तेज आती नाव को एक तरफ़ जल्दी से झुका दिया। नाव में सवार सभी लोग पानी में गिर गए। पानी बहुत कम गहरा था किनारे इसलिए किसी को कोई खतरा नहीं था। सब आराम से कुछ देर पानी में बैठे रहे, मजे करते रहे। फिर किनारे आ गए।
पहली राइड के बाद दूसरे चक्कर में हम लोग बैठे नाव में। नाव में बंधी रस्सी कस कर पकड़ ली। नाव को मोटर वोट से बाँधकर आगे बढ़े हम लोग। धीरे-धीरे हम आगे बढ़े। मोटर वोट की तेज गति के साथ हम लोग हल्ला भी मचाने लगे। देखते-देखते हम किनारे से दूर गहरे पानी में आ गए।
अचानक क्या हुआ यह तो नहीं पता चला लेकिन नाव टेढ़ी होकर पलट गई। हम सभी लोग गहरे पानी में गिर गए। पानी में गिरे तो पहले तो डूब गए लेकिन लाइफ़ जैकेट पहने होने के कारण फौरन ही ऊपर भी आ गए। मुँह में ढेर सारा नमकीन पानी चला गया। ऊपर आकर पानी की लहरों के साथ ऊपर नीचे होने लगे।
इस बीच साथ बनाना वोट में सवार लड़का और मोटर वोट पर चला रहे लोग फौरन कूद कर पानी में आये। उनमें से एक ने हमारा और हमारे पास पानी में गिरी सुमन गुप्ता जी का हाथ पकड़ लिया। लाइफ़ जैकेट के कारण हम पानी की सतह पर थे। सतह कई मीटर नीचे थी। पास में स्टीमर और बचाने वाले लोग थे। अनन्य भी बगल में तैरते हुए कह रहा था -'चिंता की कोई बात नहीं। अभी सब लोग मोटर वोट पर चलेंगे।'
मोटर वोट पर सीढ़ियाँ लगाई गयीं। हम लोग एक-एक करके मोटर वोट पर पर चढ़े। पानी में स्थिर हो जाने के बाद सुमन गुप्ता जी का एक बयान यह भी था -' मेरे मुँह में पानी चला गया। मेरा तो व्रत खंडित हो गया।' सुबह घुटने में लगी चोट पर समुद्र का नमकीन पानी अलग से अपने जलवे दिखा रहा था।
मोटर वोट पर चढ़कर हम किनारे आए। किनारे आते हुए सोच रहे थे कि हमको तैरना तो आता नहीं। लाइफ़ जैकेट न पहने होते तो क्या होता? अभी भी यही सोच रहे हैं। तय किया है कि जितनी जल्दी हो सके तैरना सीखना है। दुनिया के जितने हिस्से में ज़मीन है, उससे ज्यादा हिस्से में पानी है। तैरना सीखना जरूरी है।
कुछ देर बार हम फिर से बनाना राइड के लिए चले। पहले बार की पानी में गिरने की याद हावी थी। हम बच गए थे लेकिन पानी में गिरने की याद ज़्यादा मुखर थी। इस बीच मौसम भी ख़राब हो गया था। हवायें तेज हो गयीं थीं। लहरें ज्यादा उछलने-कूदने लगीं थीं। शायद समुद्र को पसंद नहीं आ रहा कि एक बार हमको उसने वापस भेज दिया इसके बाद हम दुबारा उसके पास आयें वोट राइड के लिए। समुद्र का इलाका, समुद्र की मर्जी। उसने हमारा समुद्र वीजा कैंसल सा कर दिया। हम वापस आ गए।
किनारे आकर आहिस्ते से उतरे। दुबारा बनाना राइड कैंसल होने के अफ़सोस से ज़्यादा सुकून था कि मौसम और ज़्यादा ख़राब होने से पहले हम वापस आ गए।
एक बार की बनाना वोट राइड के 500 सौ रुपये पड़ते हैं। हम लोग दो बार गए इस राइड पर लेकिन दोनों बार राइड पूरी नहीं इसलिए पैसे नहीं पड़े। मुफ्त में दो राइड करने का अनुभव मजेदार रहा।
नोट : बनाना वोट राइड के बहाने पानी में गिरने का हमारा यह पहला अनुभव था। जिस तरह हम पानी में गिरे थे उसको याद करते हुए बीस साल पहले लिखी पोस्ट याद गई -मेढक ने पानी में कूदा,छ्पाऽऽऽक। पोस्ट का लिंक टिप्पणी में दिया गया है।
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