लैगून बीच काफ़ी देर तक घूमने और मस्ती करने के बाद हम ईस्टर्न जेटी देखने गए। आगाती का ईस्टर्न जेटी इस द्वीप का बाहर की दुनिया से समुद्र के रास्ते से संपर्क का जरिया है। लक्षद्वीप में सब सामान बाहर से आता है। पेट्रोल, डीजल से लेकर खाने-पीने और जीवन से जुड़ा तमाम सामान।
लक्षद्वीप की राजधानी कावरती में भी एक ईस्टर्न जेटी है। वह भी बाहर से सामान लाने-ले जाने के लिए प्रयोग होती है।
लोगों ने बताया कि आगाती में कोई कार सर्विसिंग सेंटर नहीं है। कोई कार खराब हो जाये तो समुद्र के रास्ते बाहर जायेगी। बीस-पचीस हज़ार रुपए एक तरफ़ का किराया। मतलब एक बार की मरम्मत के लिए पचास हज़ार रुपए किराए के खर्च हो जायेंगे। मकान बनने का सामान, ईंट , गारा , सरिया, सीमेंट सब बाहर से आता है।
ईस्टर्न जेटी पहुँचने तक अँधेरा हो चुका था। बिजली जल चुकी थी। बिजली भी यहाँ डीजल के जनरेटर से ही आती है। घाट पर खड़े जहाज़ों से सामान क्रेन से उतर रहा था। क्रेन से उतारकर ट्रैक्टर में लदकर बाहर जा रहा था। भीड़-भाड़ बिल्कुल नहीं थी। मोटरसाइकिल से ही कुछ लोग आ-जा रहे थे।
एक दिन पहले भी हम यह घाट घूम चुके थे। तब कई लोग नीचे कावड़ी (कौड़ी) बीनते दिखे थे। रात को वह इलाका वीरान था। जसीम ने बाद में बताया था कि उसकी बहन और भाई भी कावड़ी बीन रहे थे। वह जगह जहाँ लोग कावड़ी बीन रहे थे चट्टानों के बीच थे लेकिन दूर से वह ऐसी लग रही थी मानों कीचड़, मिट्टी हो। लोग मिट्टी से कावड़ी बीन रहे हों। दूरी के हिसाब से लोग और चीजें अलग दिखती हैं।
अंधेरे में खड़े जहाज का फ़ोटो लेने देखने पर ऐसा लगा जैसे पेंटिंग्स में दिखता है।
कुछ देर तक ईस्ट जेटी में घूमने के बाद हम वापस लौट आए। खाना खाते हुए दिन भर के अनुभव के बारे में चर्चा करने के बाद सब सोने चले गए। यह लक्षद्वीप में हमारा पहला दिन था।
अगले दिन हम लोगों को स्कूबा डायविंग का अनुभव लेना था ।
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