लक्षद्वीप में साथियों के परिचय के बाद सब लोग आराम करने चले गए। शाम को चाय के बाद आगाती घूमने निकले। पर्ल बीच रिसॉर्ट जहाँ हम रुके थे एयरपोर्ट से करीब दो किलोमीटर है। इससे साढ़े चार किलोमीटर दूरी पर सबसे दूर लैगून बीच है। इस तरह देखा जाये तो आगाती द्वीप की लंबाई लगभग छह-सात किलोमीटर और चौड़ाई तीन -चार सौ मीटर से लेकर लगभग एक-डेढ़ किलोमीटर होगी । इसी लंबाई चौड़ाई में लक्षद्वीप के क़रीब आठ-दस हज़ार लोग रहते हैं।
कम चौड़ी सड़क पर इक्का-दुक्का वाहन ही आते जाते दिखे। मोटर बाइक पर या पैदल आते-जाते लोग ज़्यादा दिखे। कारें इक्का-दुक्का पर्यटकों के लिए ही चलती दिखीं। स्थानीय लोग कम ही दिखे कार में चलते।
आगाती में वैसे तो कई घाट हैं । लेकिन मुख्य घाट दो ही हैं -वेस्टर्न घाट और ईस्टर्न घाट। इनको यहाँ वेस्टर्न जेटी और ईस्टर्न जेटी कहते हैं।
वेस्टर्न जेटी स्थानीय मछुआरों और मालवाहकों की आवाजाही के लिए ज़्यादा उपयुक्त है। हालाँकि यात्री नौकाएँ कभी-कभी पश्चिमी जेटी का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन यह पर्यटकों के लिए मुख्य प्रवेश बिंदु नहीं है। अगर आप स्थानीय मछली पकड़ने की गतिविधियों और शांत वातावरण की झलक देखना चाहते हैं, तो पश्चिमी जेटी देखने लायक हो सकती है।
लक्षद्वीप घूमने आने वाले लोगों को दूसरे द्वीप पर ले जाने वाले स्टीमर भी यहीं से जाते हैं।
पानी की सतह के ऊपर कांक्रीट का बड़ा प्लेटफार्म बना है। स्टीमर पर चढ़ने के लिए सीढ़ियाँ बनी हैं।बिना रेलिंग के बने प्लेटफार्म के नीचे पानी काफ़ी गहरा है।
हमारे ग्रुप के लोगों ने प्लेटफार्म के किनारे पर पानी की तरफ़ पैर लटका कर फोटो खिंचवाये। जरा सा धक्का लगने पर पानी में गिर सकते थे लोग लेकिन सब पर मस्ती का आलम था। तरह-तरह के पोज में लोग फ़ोटो खिंचा रहे थे। एक की फ़ोटो खिच जाती तो दुसरा भी वहाँ खड़े होकर फ़ोटो खिंचवाता। सबकी फ़ोटो के बाद ग्रुप फोटो खींचते। इस तरह फोटो का सिलसिला चलता रहता। बीच-बीच में गाने-वाने भी चलते रहते। हँसी -मजाक भी। कुछ घंटों के परिचय के बाद ही सब आपस में अनौपचारिक से हो गए थे।
करीब घंटे भर वेस्टर्न जेटी पर रहने के बाद हम वापस लौटे। बाहर आते समय एक जगह तीन खड़ी नावों की तरह की आकृति बनी हुई थी। उसके पास, उसके साथ खड़े होकर हमने फ़ोटो ग्रुप फ़ोटो खिंचवाये।
फोटो खिंचवाते समय किसी ने लेह में पेंगोंग झील के पास बने तीन स्टूलों का जिक्र किया जो थ्री इडियट फ़िल्म में दिखाये गए थे यह कहते हुए कि ये नावें उसी तरह लगते हैं जैसे थ्री इडियट फ़िल्म के तीन स्टूल। अलबत्ता किसी ने हाल ही में गिरफ्तार हुए सोनम बांगचुक का नाम नहीं लिया। सोनम वांगचुक का नाम कुछ दिन चर्चा में रहने के बाद ग़ायब हो गया। उनके परिवार जनों के अलावा शायद ही कोई उनके बारे में चर्चा करता होगा अब। दूसरे तमाम मुद्दे हैं चर्चा में रहने के लिए।
समाज में हो रही घटनाओं की चर्चा का काम मीडिया का है। मीडिया सनातन धर्म के श्लोक (सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्, न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियं।) के अनुसार मधुर और प्रिय बोलने में जुटा हुआ है। वह (अपने मालिकों ) अप्रिय लगने वाले सत्य को बोलने से परहेज करता है।
बाहर आते समय कुछ बच्चे Dive information desk के पास दौड़ते -भागते -खेलते-कूदते दिखाई दिए। हमने शुरू में वहाँ खड़े चार बच्चों के फोटो लिए तो वहां मौजूद और बच्चे भागते हुए कैमरे के सामने आकर खड़े हो गए।बच्चों ने अलग-अलग में पोज में फ़ोटो खिंचाये। कई फोटो के बाद बच्चों को ध्यान आया कि V का साइन बनाया जाता है फ़ोटो खिंचाते हुए। उन्होंने V का निशान बनाया और फ़ोटो खिंचाया। हमने उनको फ़ोटो दिखाया। ख़ुश होकर फोटो देखने के बाद वे भागते हुए खेलने चले गए।
हम भी पास ही स्थित लैगून बीच देखने चल दिए।
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