Monday, October 13, 2025

सबेरे की चाय समुद्र किनारे

 


आज सबेरे की चाय समुद्र किनारे पी गई। बीच पर कुर्सियाँ पड़ी हैं। चाय थर्मस में रखी है। थर्मस से चाय निकालने की कोशिश नाकाम रही तो बालक को बुलाया। बालक ने बताया ऑन की घुंडी खोली नहीं थी हमने। चाय लेकर कुर्सी पर बैठकर समुद्र की लहरों को देखते हुए चाय पी।

धीरे-धीरे और लोग भी आ गए बीच पर। कल की मस्ती और स्कूबा डाइविंग के अद्भुत अनुभव साझा किए। कुछ लोग सुबह साइकिलिंग करके भी आयें।
नारियल के पेड़ पर पड़ा झूला खाली हिल रहा है।उसको झूलने वाले का इंतजार है।
बगल में दूसरा बीच पास ही है। सड़क पार कर उसको देखने आए। साफ़ सुथरा बीच। एक लड़की डांस कर रही है। उसका साथी उसका वीडियो बना रहा है। दूर थे वरना हम उनका वीडियो बनाते। जब तक पास जाएँ तब तक डांस सत्र खत्म हो गया।
समुद्र किनारे एक सुनहरा केकड़ा पानी में जाने की कोशिश कर रहा है। लहरें उसको बार-बार बाहर फेंक रही हैं। लेकिन वह कोशिश में लगा है। लगता है उसने कविता पढ़ रखी है :
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
हमारे साथ के लोग बीच पर टहल रहे हैं। डांस कर रहे हैं। गाना गा रहे हैं :
मौसम है आशिक़ाना,
ऐ दिल कहीं से उनको ऐसे में ढूँढ लाना।
'नाश्ता शुरू हो गया है' की सूचना आई। हम वापस चल दिए आपने बीच की तरफ़। डांस युगल फिर से शूटिंग करने लगा। हम उनको समुद्र की लहरों के किनारे छोड़कर वापस हो लिए।
नाश्ता हमारा इंतजार कर रहा है ।
इसके पहले की पोस्ट यहाँ है : :https://www.facebook.com/share/v/1a3XrG1St5/
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