Friday, October 17, 2025

लक्षद्वीप का लैगून बीच



 आगाती में वेस्टलैंड जेटी को देखने के बाद लैगून बीच देखने गए। लैगून नाम सुनते ही बचपन में सुनी फ़िल्म 'द ब्लू लैगून' का नाम याद आता है। फ़िल्म मैंने देखी नहीं थी। किस बारे में है, क्यों प्रसिद्ध है मुझे पता नहीं था। बस चर्चा में होने के कारण नाम याद था। अभी खोजा तो पता चला कि 1980 में बनी अमेरिकी फ़िल्म है यह।

फिल्म दक्षिण प्रशांत महासागर के एक उष्णकटिबंधीय द्वीप पर फंसे दो छोटे बच्चों की कहानी कहती है । लेकिन समाज के मार्गदर्शन या प्रतिबंधों के बिना, युवावस्था में पहुँचने पर उनमें भावनात्मक और शारीरिक बदलाव आते हैं , वे समुद्र में नहाते हैं , प्यार में पड़ जाते हैं और अंततः एक बच्चे को जन्म देते हैं।
फ़िल्म की कहानी इस धारणा की पुष्टि करती है कि सारे मानवीय संबंध मूलत: स्त्री -पुरुष के संबंध ही होती हैं। अलग-अलग समाजों में अलग-अलग तरह से परिभाषित होते हैं। लेकिन समाज से अलग होने में अपने मूल रूप में ही बदल जाते हैं। मारखेज के प्रसिद्ध उपन्यास 'एकांत के सौ वर्ष' में कई 'कौटुम्बिक यौन संबंधों' का वर्णन है।
बहरहाल बात लैगून बीच की। बेस्टलैंड जेटी से थोड़ी ही दूर पर है लैगून बीच। छोटा बीच है। कोई कोई भीड़ -भाड़ नहीं। बहुत कम लोग थे बीच पर। कुछ ही दुकानें हैं वहाँ। चाय-नाश्ते की दो दुकानें, स्थानीय सामान बेचने वाली एक दुकान और कुछ नारियल पानी बेचने वाले लोग।
बीच पर I love lagoon beach का बोर्ड लगा था। जिसके पास खड़े होकर लोग फ़ोटो खिंचा रहे थे। कुछ रंग-बिरंगे झंडे पहरा रहे थे। झंडों पर बीच में होने वाली गतिविधियां लिखीं थी, Night डिनर पार्टी, लाइट डिनर, स्नॉर्कलिंग आदि। समुद्र पर आते -जाते स्टीमर दिखाई दे रहे थे। सूरज भाई अपनी दुकान समेटने के लिए तैयार थे लेकिन हमको देखकर रुक गए। अपने बचे हुए सारे रंग हमारे सामने बिखेर दिए।
हमारे ग्रुप के लोग समुद्र किनारे मस्ती में गाने सुनते , गानों डांस करते। फोटो खिंचाते घूमते रहे। हर गाने का अलग मजा। "बड़े अच्छे लगते हैं -ये धरती, ये नदिया, ये रैना और तुम" गाने पर डांस वीडियो को फ़ेवरिट वीडियो के रूप में ग्रुप में पोस्ट किया। 'मेरे सामने वाली खिड़की पर एक चाँद का टुकड़ा रहता है ' गाने पर डांस वाले वीडियो में बीच की सफेद बालू और लैगून का नीला पानी बड़ा खूबसूरत दिख रहा है।
बीच पर स्थानीय लोग भी काफ़ी मात्रा में थे। ज्यादातर आदमी दुकानों के पास बड़ी बेंचों पर बतियाते दिखे। ये लोग आसपास की बस्ती के रहने वाले थे । दो महिलायें रेत में बैठी बतियाती दिखीं। तसल्ली से बैठी बतियाती महिलाओं को देखकर लगा कि ये भी आसपास ही कहीं रहती हैं। शाम के समय बीच पर टहलने के लिए आ गयीं हैं।
फोटोबाजी के दौरान ही वहाँ अनन्य ने अपना धूप वाला चश्मा मुझे दिया और मेरे कई फ़ोटो खींचे। फोटो देखकर कई लोगों ने कहा -' हीरो टाइप लग रहे हैं।'
बीच पर रेत, लैगून का पानी, समुद्र का पानी और आसमान के अलग-अलग रंग मिलकर खूबसूरत लग रहे थे। सफेद रेत, लैगून का रेत के रंग का और फिर हरा पानी, समुद्र का नीला पानी और ऊपर नीला, सफेद, काला आसमान। सब मिलकर ख़ूबसूरत लग रहे थे।
यहाँ पानी के लिए लैगून का पानी और समुद्र का पानी लिखा। बताते चलें कि लैगून समुद्र तट के पास स्थित एक उथला, खारे पानी का जलाशय है, जो चट्टानों, अवरोध द्वीपों या रेत की पट्टियों द्वारा बड़े जल निकाय से अलग होता है। लक्षद्वीप के पानी में स्थित कोरल्स मिलकर ये लैगून बनाते हैं।
काफ़ी देर घूमने के बाद हम लोग वहाँ से आगे के लिए चले। चलने के पहले वहीं रेत पर मोबाइल पर लूडो खेलती चार बच्चियाँ दिखीं। उनके फोटो का क़िस्सा हम पिछली पोस्ट में लिख ही चुके हैं। (https://www.facebook.com/share/p/17bUd8HdnD/)
लैगून बीच देखने के बाद हम लोग ईस्टर्न जेटी देखने गए।
इसके पहले की पोस्ट : https://www.facebook.com/share/p/17bUd8HdnD/
इसके बाद की पोस्ट : https://www.facebook.com/share/p/19w5irWmab/

https://www.facebook.com/share/v/1BF5PXMucP/

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