Saturday, October 11, 2025

'अंधेरे का बड़प्पन' कविता संग्रह का प्रकाशन

 


कल हमारे कविता संग्रह का प्रकाशन हुआ। कविता सग्रह का नाम है -'अंधेरे का बड़प्पन।' यह नाम Alok Puranik जी ने तय किया है जो कि 'कट्टा कानपुरी' के इस शेर से लिया गया है :

जरा सा जुगनू भी चमकता है अँधेरे में
यह अँधेरे का बड़प्पन नहीं तो और क्या है।
यह कविता संग्रह हमारी किताब है।
'अंधेरे का बड़प्पन' में मेरी शुरुआती कविताओं से लेकर हाल तक की कवितायें शामिल हैं। 'कट्टा कानपुरी' के कलाम भी शामिल हैं। आसानी से समझ में आने वाली इन कविताओं की ख़ासियत यह है कि इनको पढ़कर हर किसी को लग सकता है -"अरे इसमें क्या खास बात है। इससे अच्छा तो हम भी लिख सकते हैं।"
'अंधेरे का बड़प्पन' का कवर पेज हमारी भतीजी Swati Awasthi ने बनाया है। स्वाति शौकिया तौर पेंटिंग करती हैं और आजकल बच्चों को ड्राइंग और पेंटिंग का काम सिखाती हैं। किताब पर नाम लिखने का काम किया है हमारे बेटे Anany ने। 'अंधेरे का बड़प्पन' के ई बुक संस्करण का मोबाइल विमोचन हमारी जीवन संगिनी Suman ने कल करवा चौथ के दिन चांद देखने के बाद किया।
हमारे ब्लॉगिंग और फेसबुक से जुड़े साथियों को समर्पित इस कविता संग्रह की क़ीमत 50 रुपए रखी गई है। ख़रीदने का लिंक टिप्पणी में दिया गया है।
कविता संग्रह का प्रिंट संस्करण भी जल्द ही आएगा। उसके आने की सूचना भी जल्द ही मिलेगी।
आपकी बधाई और शुभकामनाओं के लिए अग्रिम आभार।

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