Thursday, October 09, 2025

करवा चौथ की ख़रीदारी

 


कल शाम को बाजार गए। करवा चौथ की पूजा का सामान लेने। कल है करवा चौथ। पति के लंबी उम्र की कामना के लिए महिलायें यह व्रत रहती हैं। दिन भर बिना अन्न-जल के व्रत रहना कष्ट कर होता है। अधिकतर महिलाओं की तबीयत खराब हो जाती है। लेकिन वे व्रत रहती हैं। अपने जीवन साथी के जीवन के लिए कष्ट सहती हैं।

इतिहास में इस बात का जिक्र होता है कि बाबर ने अपने बेटे हुमायूँ के बीमार पड़ने उसके ठीक होने की दुआ माँगी थी। हुमायू ठीक हो गया, बाबर बीमार हो गया। बाद में बाबर का इंतक़ाल भी हो गया।
स्त्रियाँ अपने जीवनसाथी के जीवन को लंबा करने के लिए ख़ुद का जीवन ख़तरे में डालती हैं। हर साल लाखों महिलाएं करवा चौथ का और तमाम दूसरे व्रत रहती हैं जिनमें वे अपने घरवालों के जीवन के लिए दुआयें करती हैं। यह आम बात है इसलिए इतिहास में दर्ज नहीं होती। इतिहास में खास बातें दर्ज होती हैं।
घर के पास ही चर्च रोड पर पूजा के सामान की कई दुकानें हैं। पहले बाजार घर से दूर होते थे। अब बाजार आपके घर के पास आ गया है। घर से निकलते ही बाजार शुरू हो जाता है। बल्कि घर में ही घुसा हुआ है बाजार। मोबाइल में आर्डर करो, पैसा खर्च करो, सामान हाजिर।
पूजा के लिए करवा और मिट्टी के सामान लगाए कई दुकानें थीं। सबसे पहले वाली के सामने एक बुजुर्ग महिला छुटकी चाक पर मिट्टी के सकोरे बना रही थी। प्रसन्न मुख हाथ से चाक घुमाते हुए सकोरे बना रही थी। उसके पीछे एक महिला खटिया पर लेटे बच्चे के ऊपर पंखा घुमाते हुए सुला रही थी। यह पंखा डुलाती हुई महिलाएँ तो पहले भी कई बार देखी थीं लेकिन चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाते महिला पहली बार दिखी।
दुकान पर कई तरह के मिट्टी के बर्तन थे। हमें लगा कि सब इसी दुकान पर बनाए गए होंगे। लेकिन दुकान पर सामान बेचते बच्चे ने बताया कि वो सब सामान थोक में बाजार से लाया है। यहाँ बस कुछ सकोरे ही बनाए हैं। यह जानकर याद आया कि बाजार का भी एक बड़ा बाज़ार होता है।
मिट्टी के बर्तन लेने के बाद बाक़ी पूजा के सामान के लिए सड़क पार करके दूसरी दुकान गए। सामान लेने के बाद बालिका ने पैसे कैलकुलेटर पर जोड़े। भुगतान के स्कैनर के लिए देर तक मोबाइल इधर-उधर खोज। मिला नहीं तो तेजी से और हड़बड़ी में खोज। मोबाइल उसके पास ही एक कागज के नीचे बरामद हुआ। भुगतान किया। लौट लिए।
वापस लौटते समय देखा एक आठ-दस साल का बच्चा एक ठेलिया पर मिट्टी के बर्तन और कुछ पूजा का सामान बेच रहा था। उसकी ठेलिया पर कोई खरीदार नहीं दिखा। बच्चा आशा में इधर-उधर देखता खड़ा था। क्या पता कोई ग्राहक उसके पास भी आए और सामान ख़रीदे।
घर आकर सामान की जांच हुई। सामान तो सब थे लेकिन एकाध सामान क्वालिटी चेक में फेल हो गए- 'ये क्यों लाए, वो लाना चाहिए था।' लेकिन आख़िर में कह-सुनकर सब सामान पास करा लिए गए।
सामान के साथ में हम चलनी भी लाए थे। पूजा के बाद अपने जीवन साथी को इसके माध्यम से देखती हैं महिलायें। सवाल हुआ -' तुम तो कल बाहर जा रहे हो। इसका क्या उपयोग होगा?' हमने कहा -'मोबाइल में देख लेना।' मतलब अभी तक जीवनसाथी के बीच में चलनी थी, अब मोबाइल भी आ गया।
लेकिन लगा चलनी तो एक दिन की बात। उसके तो आरपार दिखता है। लेकिन मोबाइल तो लोगों के बीच पक्की दीवार की तरह जमा हुआ है। बगल में रहते हुए भी दूर किए है। बड़ा बदमाश है। ऐसा बदमाश जो बहुत अजीज लगता है और जिसके बिना लगता है गुजारा नहीं होगा।
मोबाइल से जीवनसाथी को देखने से याद आया कि आजकल में ही हमारे पहले कविता संग्रह का ई बुक संस्करण प्रकाशित होगा। प्रकाशित हो जाये तब उसका भी 'मोबाइल विमोचन 'करेंगे। कविता संग्रह का नाम है -'अंधेरे का बड़प्पन।'
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