शाम को कायकिंग के बाद सब लोग अपने-अपने कमरे चले गए। कुछ लोग घूमने भी निकले होंगे। रात को खाना खाते हुए दिन के अनुभवों पर बात होती रही। खाने के दौरान बगल के रेस्टोरेंट से गाने और डांस की आवाजें आती सुनाई दीं। खाना खाकर हममें से कुछ लोग उधर की तरफ़ गए।
सड़क पार दूसरी जगह कई लोग एक इमारत के अहाते में रंग-बिरंगे कपड़े डांस करते दिए। उनके हाथ में बांस के आकार के डंडे थे। डंडों पर रंग-बिरंगे कागज लिपटे हुए थे। उनको मूसल की तरह ज़मीन पर हल्के-हल्के रखते हुए वे डांस करते हुए कुछ गा रहे थे।
स्थानीय भाषा का कोई लोकगीत होगा। उसका मतलब मुझे समझ में नहीं आया। बाद में जसीम से जानकारी लेने पर पता लगा कि गाने में एक स्थानीय कलपटी द्वीप की युवती बिकुनी को अंग्रेजों द्वारा पकड़कर अपने साथ ले जाने की कोशिश को विफल करने का आख्यान है। अंग्रेज़ बिकुनी को अपने साथ ले जाना चाहते थे लेकिन स्थानीय लोगों ने बिकुनी को एक गुफा में छिपा दिया और अंग्रेज़ लोग उसको अपने साथ नहीं ले जा पाये थे।
हमारे ग्रुप की महिला सदस्यों ने वहाँ पहुँचकर उनके हाथ से मूसल नुमा डंडे लेकर साथ में डांस करना शुरू कर दिया। उन लोक कलाकारों ने भी उनका स्वागत करते हुए लोकप्रिय हिंदी गाने गाने शुरू कर दिए। शुरुआत करते हुए गाया :
'अहसान मेरे दिल पर तुम्हारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों।'
लक्षद्वीप में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा जसरी है। इसे मलयालम की एक बोली माना जाता है, लेकिन यह तमिल जैसी ज़्यादा लगती है । यहाँ हिन्दी फ़िल्म का एक गाना सुनकर एक बार फिर से लगा कि भाषा बवाल राजनीति के फ़साद खड़े करने वालों के चोचले हैं।
हमको नन्दलाल पाठक जी की कविता याद आई :
ये रंग-बिरंगी फ़ूलों जैसी भाषायें,
जिनसे शोभित होता बगिया का आंचल है,
दिल के कालेपन का इलाज करना होगा,
आदमी छली होता है ,भाषा निष्छल है।
भाषा तो है मुस्कानों का ही एक रूप,
अधरों से बहता यह आंखों का पानी है,
भाषा तो पुल है मन के दूरस्थ किनारों पर,
पुल को दीवार समझ लेना नादानी है।
इसके बाद उन लोगों ने एक के बाद एक करके कई हिंदी गाने गाये। उन पर उनके साथ हमारे साथियों ने डांस किया। आख़िर में गाया :
डम डम डिगा डिगा
मौसम भिगा भिगा
बिन पिये मैं तो गिरा, मैं तो गिरा, मैं तो गिरा
हाय अल्लाह!, सूरत आप की सुहानल्लाह।
सबने इस गाने पर मिलकर डांस किया। डांस में हमारे साथ के लोग, उस होटल में रहने वाले और वे कलाकार शामिल थे। उनमें से कुछ लोग डांस करते हुए वीडियो भी बना रहे थे।
' डम डम डिगा डिगा ' के बाद उन लोक कलाकारों ने गाना बंद कर दिया। उनको खाना खाना था।
उन लोक कलाकारों के बारे में जानकारी लेने पर पता चला कि उनको होटल वाले बुलाते हैं। उनके कार्यक्रम का खर्च वहाँ घूमने आए लोगों के पैकेज में शामिल होता है।
कलाकारों का डांस-गाना ख़त्म होने के बाद हम लोग वापस लौटे। हमारे साथ की किरन जी 'डम डम डिगा डिगा' के अनुसार वहीं मौजूद झूले पर गिरकर लेट गयीं। कुछ देर बाद साथ में वापस में आईं।
अपने ठीहे पर लौटकर हम लोग फिर समुद्र किनारे कुर्सियों पर जमें। लोगों ने गाने सुनाये। इसके बाद डांस भी हुए।
हम दस लोगों के ग्रुप में छह महिलायें थीं। महिला प्रधान ग्रुप में उनकी ही मर्जी चलना स्वाभाविक था। लगभग सभी लोग डांस करते रहे। हमको डांस करना आता नहीं है इसलिए अपनी जगह पर खड़े-खड़े, हिलते-डुलते ताली बजाते और बहुत हुआ तो 'हरे राम, हरे कृष्ण' ग्रुप के लोगों की तरह हाथ ऊपर करके मटकते रहे।
ऐसे में मुझे 'सेंट ऑफ़ ए वूमेन' फ़िल्म के दृष्टिहीन कर्नल का किस्सा याद आया जिसको दिखाई नहीं देता है लेकिन वह अपने साथ आए बच्चे से डांस फ्लोर का साइज पूछकर वहाँ मौजूद युवा लड़की के साथ इस तरह डांस करता है कि लड़की भी डांस करने लगती है।
लेकिन यहाँ फ़िल्म नहीं वास्तविकता थी। सब लोग हमारे 'डांस करने में अनाड़ीपन' के मजे लेते हुए हमको हिलाते-दुलाते रहे। हम थोड़ा हिलते लेकिन फिर ठहर जाते और लोगों को डांस करते हुए देखने लगते। कुछ रिकार्ड भी हुए। उनमें से कुछ इस पोस्ट में भी लगाए हैं।
कुछ देर डांस के बाद हमारे साथ की मीनल रस्तोगी जी ने हम लोगों को कुछ स्टेप्स सिखाए जिसके हिसाब से सबको आगे-पीछे होते हुए, पास आते हुए, दूर जाते हुए डांस करना था। इस क्रम में राधे-राधे और गोविंदा-गोविंदा भी बोलते जाना था। डांस के स्टेप्स और पास आना, दूर जाना तो याद करते, भूलते गए लेकिन जहाँ राधे-राधे याद रहा। जहाँ भूलते वहाँ राधे-राधे दोहरा देते। हाल यह हुआ बाद में जब तक रहे, तब तक राधे-राधे हमारे ग्रुप का 'संबोधन शब्द युग्म' हो गया। किसी को कुछ मजे लेने होते वह राधे-राधे कहने लगता।
देर रात तक गाना, डांस और हंसी मजाक के बाद हम लोग अपने-अपने कमरे में सोने गए। यह हमारी ट्रिप का दूसरा दिन था।
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