Sunday, October 12, 2025

लक्षद्वीप में टहलाई



 शाम की चाय पीने के बाद बाज़ार के लिए निकले। फ़ोन चार्ज करने के लिए केबल ख़रीदने। पैदल निकले। होटल स्टॉफ ने कहा भी -'स्कूटी लेते जाइए।' लेकिन अपन पैदल ही निकल लिए।

थोड़ी दूर जाने के बाद याद आया कि जिस जिस फ़ोन का केबल लेना है वह तो कमरे में ही छूट गया। दूसरे होटल का नाम भी नहीं याद किया। वापस लौटने में भटक गए तो जायेंगे कहाँ? लौट लिए। फ़ोन लेने और होटल का नाम नोट करने के लिए।
रास्ते में मोटरसाइकिल से होटल स्टॉफ़ जसीम आते दिखे। उसने बताया कि Anany सर का फ़ोन आया था। हम आपके साथ चलेंगे बाज़ार। हम बैठ गए बाइक के पीछे। कमरे में आकर मोबाइल लिया। होटल का नाम नोट किया और वापस बैठ गए बाइक पर।
जसीम ने बताया कि यहाँ पेट्रोल प्रति बाइक दस लीटर प्रति माह के हिसाब से मिलता है। 140 रुपए प्रति लीटर। इससे ज़्यादा की जरूरत के लिए ब्लैक में लेना पड़ता है -200 प्रति लीटर। कार के लिए बीस लीटर प्रति माह मिलता है।
बाजार की तरफ़ जाते हुए तमाम लोग जसीम के जानने वाले मिले। सात-आठ हज़ार की आबादी है आगाती आइलैंड की। अधिकतर लोग जान पहचान के। सड़क पर लड़कियां/महिलाएं स्कूटी चलाती दिखीं। सब हिजाब में। अधिकतर लोग मुस्लिम हैं यहाँ।
रास्ते में स्कूल, अस्पताल, डाकघर दिखे। स्कूल यहाँ इंटर तक है। आगे पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ता है।
एक इलेक्ट्रॉनिक की दुकान पर पता किया। उसके पास आइफ़ोन का केबल ख़त्म हो गया था। उसने दूसरी दुकान का पता बताया। हम उधर गए। वहाँ काउंटर पर एक बच्ची कॉपी में कुछ लिखने का अभ्यास कर रही थी। मलयालम का ककहरा। बात करने पर मुस्करा दी। बोली नहीं। लेकिन आँख के कोने से हमारी बातचीत सुनती रही।
पहले हमने पता किया कि कोई कनेक्टर मिल जाये जिससे सी टाइप केबल से आई फ़ोन जुड़ जाये। कनेक्टर मिला नहीं। फिर उसने केबल निकाल के दी। चार्जिंग हो रही थी। केबल के दाम 270/- रुपए। आइफ़ोन की केबल आनलाइन शायद 1100-1200 रुपए की मिलती है। 270/- में शायद डुप्लीकेट होगी। लेकिन चल रही थी। ले ली।
चलने के पहले बच्ची की फोटो ली। उसको दिखायी। मुस्करा के देखी उसने। पापा के कहने पर उसने थेंक्यू बोला। हाथ मिलाया। हम वापस लौट लिए।
लौटते हुए बाइक का चार्ज हमने ले लिया। बहुत दिनों बाद बाइक चला रहे थे। शुरुआत में थोड़ा लहराये। जसीम ने बाइक चलाते हुए वीडियो बनाया। थोड़ी देर में आराम से चलाने लगे बाइक। बीच-बीच में जसीम गियर बदलने को, हार्न देने को कहते रहे। रास्ते में मिलने वाले लोगों को नमस्ते, वडक्कम भी करते जा रहे थे जसीम।
अपने बारे में भी बताया जसीम ने। घर में छोटा भाई, बहन, माँ-पिता हैं। पिता पहले मेहनत, मजदूरी करते थे। चाय बेचते थे। देर रात जिन जगहों पर चाय की जरूरत हो सकती है वहाँ दुकान लगाते थे। अब घर में रहते हैं।
सत्ताईस-अट्ठाइस के हो चुके जसीम से उसकी शादी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि पहले बहन की शादी करेंगे। फिर ख़ुद की। बहन अभी दूसरे द्वीप में कामर्स में ग्रेजुएशन कर रही है।
बहन की शादी के लिए उसके लिए घर बनवाना है। बातचीत से पता चला कि यहाँ मातृ सत्तात्मक समाज है। लड़का लड़की के यहाँ आकर रहता है।लड़की की शादी के लिए घर जरूरी है। अपना घर और बहन के लिए बनाया जा रहा घर भी दिखाया जसीम ने बाहर से।
और बात करने पर जसीम ने अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड के बारे में बताया। स्कूल के दिनों की साथी थे वह। इंटर के बाद रेडियोग्राफी का कोर्स करने के बाद वह कतर चली गई। वहाँ रेडियोग्राफ़ी का काम मिल गया उसको। शादी तय हो गई थी जसीम की उससे। लेकिन रेडियोग्राफी का कोर्स करने और उसके बाद नौकरी मिलने के बाद लड़की ने शादी से मना कर दिया। अपने साथ रेडियोग्राफी का कोर्स करने वाले लड़के से करेगी शादी।
लड़की के शादी मना करने की बात बताते हुए जसीम ने कहा -' उसकी पढ़ाई के लिए हमने पैसा भी खर्च किया। इसी लिए बहन के लिए घर बनवाने में देरी हुई। लेकिन उसकी मर्जी।उसको बेहतर साथी मिल गया तो उसने हमसे शादी से मना कर दिया। बहन के लिए घर इस साल बन जाएगा। बहन की शादी के बाद करेंगे शादी। अपनी एक्स गर्लफ़्रेंड के बारे में कोई और नकारात्मक बात नहीं की जसीम ने। जसीम ने बताया कि उनके नाम का मतलब होता है -महान, बड़ा, शक्तिशाली या मजबूत। अपने नाम के हिसाब बनने की कोशिश करते लगे जसीम।
जसीम के साथ घूमते हुए आगाती का सारा इलाका देख डाला हमने। वेस्ट जेट्टी, ईस्ट जेट्टी, लैगून बीच। सब अपने टूर के लोगों के साथ विस्तार से देखने थे इसलिए ज़्यादा रुके नहीं कहीं। देखते रहे, चलते रहे।
ईस्ट जेट्टी के पास नीचे पानी में तमाम लोग कुछ खोजते दिखे। पता चला 'कावड़ी' खोज रहे हैं। पानी में पत्थर की छोटी चट्टाने ऐसे दिख रही थीं मानो कीचड़ हो वहाँ। नीचे कावड़ी बीनते बच्चियों में से एक से जसीम ने कावड़ी फेंकने को कहा। बच्ची ने नीचे से कावड़ी फेंकी। सटीक थ्रो की तरह। जसीम ने ' कावड़ी थ्रो' कैच करके हमको दिखाई कावड़ी। बड़ी कौड़ी जैसी थी वह जिसे जसीम कावड़ी बता रहे थे। हमने हाथ में लेकर उसकी फ़ोटो ले और वापस कर दी। उस बच्ची ने उसे बिना गिराये कैच कर लिया। क्रिकेट का अच्छा अभ्यास है दोनों का।
बाद में जसीम ने बताया कि यहाँ भी आईपीएल की तर्ज पर क्रिकेट टूर्नामेंट होता है। वह भी क्रिकेट खेलता है। बोलिंग करता है। पचास रुपये है उसका बेस प्राइज। ऑकशन में कितने पैसे मिलेंगे यह बाद में पता चलेगा लेकिन खेलना है उसे।
लौटते में हमने अपने होटल के पास ही एक जगह बैठकर चाय पी।जसीम के कई दोस्त मिले वहाँ। वे चाय-नाश्ते के बाद वापस जा रहे थे। वहाँ चाय-नाश्ता करने वाले तमाम लोग बैठे थे। परिवार सहित। रेस्टोरेंट का नाम था फैमिली रेस्टोरेंट। महिलायें ही चलाती हैं इसे। शाम को तीन-चार बजे से शुरू होकर रात नौ-दस बजे तक चलता है रेस्टोरेंट।
फैमिली रेस्टोरेंट में काम देखने वाली महिला हमारे लिए दो चाय और प्लेट में कुछ नाश्ता रख गई। समोसा और बड़ा जैसे दिखने वाले नाश्ते के सामान नॉन वेज थे। हमने बताया तो वो हमारे लिए मीठा बड़ा टाइप कुछ व्यंजन लाई। नारियल और दूसरी चीजों से बने उस व्यंजन में अंदर जो भरा था उसको खाते हुए हमको शकरकंद की याद आई। उससे ही बचपन में किसी सब्जी बेचने वाली महिला (काछिन) के बारे में लिखी सुनी कविता याद आई :
"शकरकंद सी शकल बनाई
गाजर की पैजानिया
आलू के दो बंद लगाए
ठुमक चली काछनिया।"
चाय के लिए भुगतान करने काउंटर पर गए । दो चाय और जो नाश्ते में जो कुछ खाया था उसके चालीस रुपये हुए। चाय दस रुपये की एक। नाश्ते में उस सामान के ही पैसे लिए दुकान वाली ने जितना हमने खाया था। जो खाया नहीं था, छोड़ दिया था प्लेट में बिना खाये, बिना ख़राब किए उसके पैसे नहीं लिए थे।
जसीम ने बताया कि यहाँ होटल जितना खाते हैं उतने के ही पैसे पड़ते हैं। जो नहीं खाते उसके पैसे नहीं पड़ते। अगर ख़राब नहीं किया है तो वही सामान दूसरे को सर्व करते हैं।
इससे लगा कि यहाँ छुआछूत और बाजार का उतना हल्ला नहीं है। कुछ लोगों को यह खराब लग सकता है कि किसी दूसरे का बचा हुआ हमको सर्व कर दिया। लेकिन मेरी समझ में बर्बादी बचाने के लिहाज से अच्छी बात है। सामुदायिक भावना का प्रतीक है यह चलन।
चाय पीने के बाद जसीम हमको होटल में छोड़कर घर चले गए।
लक्षद्वीप यात्रा के पहले के क़िस्सा यहाँ पहुँचकर पढ़ सकते हैं :
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