मेट्रो स्टेशन से करीब सौ मीटर दूर थे कि मेट्रो आती दिखी। स्टेशन पहुँचने तक रवाना भी हो गई। सोचा कि अगली मेट्रो चार-पाँच मिनट बाद आएगी। उसे पकड़ने के लिए थोड़ा लपकते हुए आगे बढ़े। लिफ्ट, सामान चेकिंग, कार्ड स्वैपिंग की बाधाओं को पार करते हुए एस्केलेटर तक पहुंचे। मेट्रो के आने की आवाज सुनाई दी। एस्केलेटर के ऊपर जाने के साथ हम भी उचकते हुए आगे बढ़े । हमारे आगे एक लड़की भी लपकती हुई बढ़ रही थी। प्लेटफार्म पर पहुंचते ही ट्रेन आ गई। ट्रेन का आख़िरी डब्बा हमारे सामने था। हम लपककर अंदर दाखिल हुए। दूसरे दरवाज़े से वह लड़की भी दाखिल हुई जो हमसे आगे लपकते हुए प्लेटफार्म पर आई थी।
‘मेट्रो पकड़ ही ली ’ कहते हुए ख़ुशी का इजहार किया तो बगल में बैठी बालिका ने भी ‘ हाँ’ कहते हुए ‘ ख़ुशी’ का इजहार किया। बालिका ने अपने बैग से पेपर नैपकिन निकाला । उसे अपने चेहरे पर दबाते हुए घुमाया। जिस तरह तेल से परहेज करने वाले कोलेस्ट्रॉल पीड़ित लोग पकौड़े खाने से पहले उसके ऊपर का तेल कागज से पोंछते हैं कुछ उसी तरह बालिका ने चेहरे को पोंछा ।
चेहरा पोंछने के बाद बालिका ने बालों की क्लिप निकाली। बाल खोले। जूड़ा बनाया। क्लिप लगाई। बैग से मोबाइल निकाला। मोबाइल समंदर में छपाक से डूब गई।
अगले स्टेशन पर अन्य सवारियों के साथ एक बालिका मेट्रो में दाखिल हुई। हमारे और हमारे बगल में बैठी मोबाइल समंदर में डूबी बालिका के बीच की सीट पर बैठ गई। बालिका के हाथ में अंग्रेजी कोई किताब थी। सीट पर बैठकर वह किताब पढ़ने लगी। बहुत दिनों बाद मेट्रो में कोई किताब पढ़ते मिला था।
हमारा ध्यान पहले से बैठी, चेहरा पोंछती, जूड़ा बनाती, मोबाइल में डूबी बालिका से हटकर किताब पढ़ती बालिका की तरफ़ लग गया। देश, दुनिया में आजकल ऐसा ही हो रहा है। एक चीज पर कायदे से ध्यान नहीं जा पाता कि दूसरी चीज सामने आ जाती है। एक अफ़वाह पर क़ायदे से चिंतित होने के पहले ही दूसरी अफ़वाह फैलने लगती है। पहले अफवाहें महीनों तक जिंदा रहती थीं। आजकल अफवाहें 'दिन जीवी' हो गई हैं। आज फ़ैलीं कल निपट गयीं। उसकी जगह नई अफ़वाह ने गद्दी संभाल ली।
हाँ तो हम बता रहे बगल में बैठी लड़की के अंग्रेजी की किताब पढ़ने की। लड़की के हाथ में जो किताब थी उसका नाम था - poor little bitch girl. लिखने वाले का नाम जैकी कॉलिन्स (Jackie Collins)। गूगल में खोजी किताब का तो पता चला कि 1965 में Poor Little Witch Girl नाम से उपन्यास लिखा था फ्रेंच लेखिका Marie Desplechin ने। हमें लगा कि फ्रेंच से शायद अनुवाद किया हो जैकी कॉलिन्स ने। लेकिन किताब और जैकी कॉलिन्स का संबंध मिला नहीं। हमें यह भी लगा कि शायद नाम ग़लत पढ़ लिए हों। सोचा दुबारा नाम देखें बालिका की किताब का। लेकिन इस बीच नैपकिन वाली लड़की उतर गई थी। किताब वाली लड़की उसकी सीट की तरफ़ सरक गई थी।उसके सरकने से हमारे और उसके बीच बनी जगह पर एक और सवारी आकर बैठ गई थी। बालिका और उसकी किताब हमसे एक सीट दूर हो चुकी थी।
हमने एक बार फिर किताब खोजी। इस बार जैकी कॉलिन्स की लिखी किताबें देखीं। पता चला दस साल पहले दुनिया से जा चुकी लेखिका का सत्ताईसवाँ उपन्यास है poor littel bitch girl. उपन्यास के बारे जानकारी लेने पर पता चला कि
Poor Little Bitch Girl is a new, sexy, and explosive novel from perennial best-seller Jackie Collins. (बेस्ट-सेलर जैकी कोलिन्स का एक नया, सेक्सी और विस्फोटक उपन्यास है।)
मन किया इस बात पर नई पीढ़ी की निन्दा करें कि वह सेक्सी और विस्फोटक किताबें पढ़ती है। लेकिन फिर लगा कुछ भी पढ़े वह पढ़ती तो है।
कुछ देर में बालिका अपने उपन्यास को बंद करके फ़ोन पर बात करने लगी। बात करते-करते अगले स्टेशन पर उतर गई। हम भी बाकी यात्रियों को देखते हुए अपने स्टेशन के आने का इंतज़ार करते रहे।
स्टेशन आने पर बाहर निकलते हुए कार्ड लगाने के बावजूद बाहर जाने वाला अवरोध हटा नहीं। यह देखकर बगल वाले बाहर जाते एक बालक ने कहा -"कार्ड उल्टा करके लगाओ।" बालक हमको मुफ्त की सलाह देकर निकल गया। हमने उसकी बात को नजरअंदाज करते कार्ड को फिर से लगाया तो अवरोध हट गया। हम बाहर निकल आए।
मुफ्त की सलाह देना देश के लोगों का सामान्य शिष्टाचार है। देश के नागरिकों की पहचान के लिए लोगों की मुफ्त की सलाह देने की आदत का उपयोग किया जा सकता है। देश के लोगों की नागरिकता का आधार से भी अधिक पुख्ता प्रमाण है -"बिना मांगे सलाह देना।"
स्टेशन पर उतरकर ऑटो किया। हमसे काफ़ी दूर था चौराहे पर ऑटो वाला। सामान्य तरीके से आता तो उसे घूमकर आना पड़ता । हम उसकी लोकेशन देखकर , उसे फ़ोन करके, उसके पास चले गए। सौ कदम चलकर ऑटो का सात सौ मीटर का चक्कर , देश का ईंधन, पर्यावरण, प्रदूषण बचाया। लेकिन इस बात के मीडिया कवरेज के लिए कोई इंतजाम नहीं था। इंतजाम होता तो पता चलता दुनिया को कि सौ कदम चलकर ऑटो की दो किलोमीटर की यात्रा बचाना देश-दुनिया के पर्यावरण रक्षा के लिए कितनी बड़ी कुर्बानी है।
ऑटो में बैठते ही डुओलिंगों का नोटिफिकेशन बजा मोबाइल में। एक सच्चे आशिक़ की तरह डुओलिंगों का संदेश था -"मैं आपका पीछा कभी नहीं छोड़ूँगा। आपने अभी तक प्रैक्टिस नहीं की है फिर भी मुझे विश्वास है आप अभ्यास करेंगे।"
अभी उस संदेश को पढ़ते हुए मुझे लगा कि कोई तो है इस दुनिया में जिसको मुझ पर भरोसा है। हमको वसीम साहब का शेर याद आ गया :
'मैं इस उम्मीद में डूबा कि वो बचा लेगा
अब इसके बाद वो मेरा इम्तहान क्या लेगा?'
देश, दुनिया में तो लोग भरोसा करने वाले के झांसे में आकर डूब रहे हैं लेकिन हमने तय किया हम डुओलिंगों का भरोसा टूटने नहीं देंगे। हम स्पेनिश का अभ्यास करने जा रहे हैं डुओलिंगों के पास।
हमे विश्वास है कि आप यह पोस्ट पढ़ेंगे। पढ़कर बताएँगे भी। मैं आपका पीछा नहीं छोड़ने वाला।
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