Saturday, May 16, 2015

नौकरी करते हुये बङी सावधानी से काम करना चाहिये

कुछ लोगों को हाल में कुछ काबिल और ईमानदार माने जाने वालों अफ़सरों को नोटिस मिलने पर एतराज हुआ होगा। किसी ने लोकसेवक कानून का हवाला दिया। लेकिन आपकी जानकारी के लिये बता दें कि नौकरी करने वालों के लिये लोक सेवक कानून से भी पुराना कानून महाभारत काल का धौम्य ऋषि का कानून है। जब पांडव लोग अज्ञातवास के लिये जा रहे थे। उनको अज्ञातवास के दौरान राजा विराट के यहां नौकरी करनी थी तो धौम्य ऋषि ने पाण्डवों को उपदेश दिया कि किसी राजा के यहां नौकरी कैसे करनी चाहिये। आप भी पढें उस उपदेश का सरल अनुवाद। ये नियम आज भी लागू हैं। बस राजा की जगह आज बॉस शब्द का चलन है। बॉस कोई भी हो सकता है जिसके अधीन आप करते हैं। 

महाभारत कथा

किसी राजा के यहां नौकरी करते हुये बङी सावधानी से काम करना चाहिये। राजा के पूछने पर ही कुछ सलाह देना चाहिये.राजा की सेवा में तत्पर रहना चाहिये किंतु अधिक बातें नहीं करनी चाहिये। उसके बिना पूंछे आप ही मंत्रणा देते रहना राजसेवक के लिये उचित नहीं। समय पाकर राजा की स्तुति भी करनी चाहिये। मामूली से मामूली काम के लिये भी राजा की अनुमति ले लेनी चाहिये। राजा मानों मनुष्य के रूप में आग है। उसके न तो बहुत नजदीक जाना चाहिये,न ही बहुत दूर हट जाना चाहिये। मतलब यह कि राजा से न तो बहुत हेल-मेल रखना चाहिये , न ही उसकी लापरवाही ही करनी चाहिये।

राजसेवक कितना ही विश्वस्त क्यों न हो ,कितने ही अधिकार उसे क्यों न प्राप्त हों,उसको चाहिये कि सदा पदच्युत होने के लिये तैयार रहे और दरवाजे की ओर देखता रहे। राजाओं पर भरोसा करना नासमझी है। यह समझकर कि अब तो राजस्नेह प्राप्त हो गया है, उसके आसन पर बैठना और उसके वाहनों पर चढना अनुचित है। राजसेवक को चाहिये कि वह कभी सुस्ती न करे और अपने मन पर काबू रखे। राजा चाहे गौरवान्वित करे चाहे अपमानित,सेवक को चाहिये कि अपना हर्ष या विषाद प्रकट न करे।

भेद की जो बातें कही या की जायें , उन्हें बाहर किसी से न कहे.उन्हें स्वयं पचा ले । प्रजाजनों से रिश्वत न ले। किसी दूसरे सेवक से ईर्ष्या न करे.हो सकता ,राजा सुयोग्य व्यक्तियों को छोडकर निरे मूर्खों को ऊंचे पद पर नियुक्त करे। इससे जी छोटा न करना चाहिये.उनसे खूब चौकन्ना रहना चाहिये।

(धौम्य ऋषि द्वारा पाण्डवों को अज्ञातवास के पूर्व आशीर्वाद एवं उपदेश)

यहां हाल में अधिकारियों से इस सार्वभौमिक लोकसेवक कानून के अनुपालन में संभवत: निम्न चूक हुईं:
1. स्तुति शायद नहीं की गयी। समय नहीं मिला या मिला तो मिलते ही उसका उपयोग नहीं हुआ।

2. पोशाक जैसे महत्वपूर्ण काम के लिये भी अनुमति नहीं ली गयी।

3.मन पर काबू नहीं रहा और मनचाही पोशाक पहनकर चले गये अगवानी में।

शेष आप खुद तय करें। लेकिन इतनी चूक पर चेतावनी तो बनती है। अब संबंधित अधिकारी को हर्ष या विषाद प्रकट करने से परहेज के नियम का सख्ती से पालन करना होगा।

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