Thursday, May 21, 2015

दम भर जो उधर मुंह फेरे

सबेरे-सबेरे सूरज भाई आसमान पर माथे की बिंदिया सरीखे सजे हुए थे।हमको देखा तो मुस्कराये। उनकी लाज लाल मुस्कान देखकर किरणें खिलखिलाने लगीं। शायद सूरज भाई से कहतीं भी हों- 'डोन्ट ब्लश डैडी। यू आर लुकिंग क्यूट।'
देखते-देखते सूरज भाई बादलों की ओट में चले गए। शायद पेड़ों की डालियों पर बैठे किसी मादा पक्षी ने चिंचियाते हुए गाना गाया हो:
'दम भर जो उधर मुंह फेरे
ओ चन्दा!!!!
मैं उनसे प्यार कर लूँगी
बातें हजार कर लूँगी।'


सूरज को पता है कि गाना चाँद को सम्बोधित है। लेकिन छिप जातें वो। सोचते हैं कर लेने दो प्यार, हो जाने दो बातें हजार।दुनिया में प्यार सबसे मासूम भाव है न!
रास्ते में अखबार वाले हॉकर भाई मिलते हैं। उनसे अखबार लेकर साइकिल पर बैठे-बैठे सड़क पर पैर टिकाकर मुख्य समाचार बांचते हैं:

1.क्लैट टॉपर आकाश को माँ की सीख-संस्कार भी सफलता की तरह श्रेष्ठ रखना।
2.बिहार में मुसलमानों ने दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के लिए दान की जमीनें।
3. बूढ़े माँ-बाप ने इकलौते शराबी बेटे से 5 लाख में किया 'सुकून' का सौदा।
4. एस टी डी नम्बरों के आगे नहीं लगाना पड़ेगा ।
5. नजीब की 'जंग' तेज. रद्द की 'आप' सरकार की नियुक्तियां।
रांझी में कई जगह हॉकरों को अखबार देने वाले फुटपाथ पर जमे थे। हॉकरों को अखबार देते जा थे । हॉकर उनको साइकिल पर लादते जा रहे थे। एक हॉकर दैनिक भास्कर अखबार में खबर में तड़के की तरह रंगीन 'डी बी स्टार '(परिशिष्ट )घुसाता जा रहा था।
वहीं बगल में एक गुमटी पर दूधवाला डब्बे से दूध निकाल-निकाल कर पालीथीन में भरता जा रहा था। फुटकर पैसे नहीं होते लोगों के पास इसलिए ग्राहक और खुद की सुविधा के लिए 10/20 रूपये के दूध के पैकेट बना रहा था। सोनल पालीथीन में।
महेश यादव नाम है दूध वाले का। पहले इनका खुद का दूध का काम था। आठ भैंसे, एक गाय थी। फिर कोई बिमारी लग गयी भैंसों को। चार मर गयीं। घाटा होने लगा तो सब बेंच दी। भैंस रखने  की जगह पर मकान बना लिया और खुद डेरी से दूध लाकर बेंचने लगे।
सुबह शाम मिलाकर 150 लीटर दूध बेंच लेते हैं। जो बच जाता है उसका दही बना लेते हैं। 2 लीटर प्रति लीटर तक बच जाता है।
2008 में जब भैंसे बेंची थीं तब दूध 10 रुपये लीटर था। आज 50 रूपये लीटर है। भूसा,चोकर,लेबर और सबके दाम बढ़े हैं इसीलिये दूध के भी। 3 रूपये किलो वाला भूसा आज 15 रूपये किलो है। जिस भाव उस समय गेंहूँ मिलता था आज उस भाव चोकर है।
दूध की डेयरियां परियट नदीं के किनारे हैं। लोगों के पास हजारों भैंसे हैं। बाहर भेजते हैं दूध। खूब कमाई है। लेकिन डेरी का रखरखाव ठीक नहीं रखते। गन्दगी और गोबर परियट नदीं में प्रवाहित कर देते हैं। नदी को नाला बना दिया है।कई बार मैंने यह जिक्र सुना है। डेयरी के कर्णधार रसूख वाले लोग हैं। प्रशासन के डेयरी की गन्दगी नदी में न बहाने के अनुरोध को दायें-बाएं करते रहते हैं।
महेश की उम्र 33 साल है। 4 साल हुए शादी के। 14 महीने की एक बच्ची है। सोचते हैं फिर कभी जायेंगे तो एक ठो चॉकलेट लेते जाएंगे बच्ची के लिए। ठीक न!
हम महेश से बात कर रहे थे कि अखबार वाले भाई लोगों ने बुला लिया-'आइये भाई साहब चाय पी लीजिये।' हम मना नहीं किये।  प्लास्टिक के चुक्कड़ में चाय पिए साथ खड़े होकर।
बात हॉकर के धंधे की होने लगी। बताये की 40 पैसे तक अखबार से मिलता है रोज का हॉकर को। हमें अपने कानपुर के अखबार वाले मिश्रा जी याद आये।गंगापार  उन्नाव के पास से अर्मापुर में अख़बार बांटने आते हैं। आँखों में मोतिया बिंद का आपरेशन नहीं करा रहे यह कहते हुए कि ग्राहक छूट जाएंगे। हमने बहुत कहा कि किसी दूसरे को लगा दो। लेकिन उनका कहना है कोई दूसरा कर नहीं पायेगा। इस घर का अखबार उस घर में डाल देगा।
इस बात का जिक्र किया मैंने तो हॉकर राजेन्द्र सिंह बोले-'आप मिलवाओ मिश्रा जी से हमको। हम बांट देंगे उनके अखबार 15 दिन। मानवता के नाते इतना तो कर ही सकते हैं अपन।'
हमने कहा-'अरे वो कानपुर में हैं। कैसे करोगे? ' वो बोले-'अरे चले चलेंगे कानपुर भी। आप मिलवाओ तो सही।'
राजेन्द्र सिंह की बात सुनकर बहुत अच्छा लगा। करना न करना तो तमाम बातों पर निर्भर करता है लेकिन परदुखकातरता होना, दूसरे के दुःख को महसूस कर पाना ही अपने आप में बड़ी बात है।
लौटते हुए फिर काली मन्दिर के पास पहाड के पास गए। जगहर हो चुकी थी। कुछ लोग नहाकर लौट रहे थे। गीले कपड़े कंधे पर फैलाये। दो महिलाएं सड़क किनारे हाथ में भूरे रंग का मन्जन लिए ब्रश कर रहीं थीं। पेट की आग बुझाने के जगह चूल्हों में आग जल रही थी। एक आग दूसरी  आग को बुझाती है।
लौटते में दो छोटे-छोटे बच्चे सड़क पर दिखे। बच्ची तेजी से सड़क पार करती किसी गिलहरी सरीखी लगी। छुटकी से प्यारी बच्ची की मुस्कान अभी भी सामने दिख रही है। आपको भी देखनी है वह प्यारी मुस्कान तो आईने में अपना मुखड़ा देखिये। आपको पक्का दिखेगी वह प्यारी मुस्कान। दिखी तो बताना । न दिखे तो फिर से मुस्कराते हुए शीशा देखना। इस बार पक्का दिखेगी।
अरे यार!!! आठ बज गया। चलते हैं। देर हो जायेगी वरना।
आपका दिन मंगलमय हो।

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2 comments:

  1. आप सबसे बातें करते हैं :) वो भी ढेर सारी बातें! फ़िर यहाँ सुना देते हैं … :)

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    1. मजा आता है मुझे बतियाने में सबसे और फ़िर शेयर करने में। :)

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